दोषियों के चुनाव लड़ने पर हो आजीवन बैन

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LIFETIME BAN ON CRIMINAL POLITICIANS, NO VOTE TO CRIMINAL POLITICIANS
उन नेताओं पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी है जिनके खिलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज है।

देश में चुनाव सुधारों पर बहुत बहस हो चुकी है और अभी भी हो रही है। इस मामले में चुनाव आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि आपराधिक मामलों में दोषियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन पाबंधी होनी चाहिए और आपराधिक मामलों म नेताओं का ट्रायल एक साल के अन्दर पूरा हो जाना चाहिए। अगर चुनाव आयोग की बात को मान लिया जाता है तो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई नेता कभी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

ऐसा कदम स्वस्थ लोकतन्त्र और राजनीति में अपराधिकरण रोकने के लिए भी ज़रूरी है। संसद को अपराधी प्रविर्ती वाले लोगों से मुक्त करवाना देश के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि जिस देश की बागडोर आपराधिक रिकाॅर्ड वाले मंत्रियों पर होगी वो देश किसी भी सूरत में प्रगतिशील नहीे बन सकता। अपराधी द्वारा संचलित कोई लोकतंत्र जनता के हितों की रक्षा नहीं कर सकता, ऐसे में उन नेताओं पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी है जिनके खिलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज है।

ऐसे लोगों के चुनाव लड़ने, राजनीतिक दल का गठन करने और पदाधिकारी बनने पर रोक लगाई जानी चाहिए। इन जैसे दागी नेताओं से कैसे उम्मीद की जा सकती है की वो देश का भला करेंगे और इन जैसे नेताओं ने भारत को अँग्रेज़ों से ज़्यादा बर्बाद किया है। देश मे हज़ारों नेता किसी ना किसी अपराध के कारण हमेशा सुर्ख़ियों मे रहते है फिर चाहे लालू का चारा घोटाला कहो, कॉंग्रेस का कोल घोटाला आदि। लेकिन फिर भी ऐसे नेता बड़ी शान बान के साथ जनता से वोट माँगने चले जाते है। अगर सरकार या न्यायपालिका से ताउम्र बैन लगने में देरी हो रही है तो जनता को ऐसे मोर्चों मे सामने आना चाहिए और ऐसे नेताओं को वोट ना देकर खुद बहिष्कार करना चाहिए।

आज भारत भ्रष्ट नेताओं की सूच में कई देशों को पछाड़ चुका है ओर अगर आगे भी अपराधी प्रविर्ती वाले नेताओं पर बैन नही लगाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा देश सच मे पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर पहुँच जाएगा।

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