कहीं आपके बच्चे के साथ तो नहीं हो रहा यौन शोषण ?

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child sexual abuse
बाल शोषण के लगभग 53 प्रतिशत बच्चें है,शिकार

अक्सर लोग सोचते हैं कि उनका बच्चा घर में सुरक्षित है लेकिन यह सच नहीं है,आपको जानकर हैरानी होगी घर में भी आपका बच्चा सुरक्षित नहीं है। जी हां,चाइल्ड एब्यूज सिर्फ सेक्सुअल एब्यूज ही नहीं बल्कि बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण भी है। 2012 में स्टार प्ल्स के प्रोग्राम ‘सत्यमेव जयते’ में आमिर खान ने चाइल्ड एब्यूज पर एक प्रोग्राम भी किया था। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 2007 की एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में 53 पर्सेंट बच्चे चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूस (बाल यौन शोषण) का शिकार हो चुके हैं यानि हर दो में से एक बच्चा। सिर्फ बड़े शहरों ही नहीं बल्कि छोटे शहर, टाउन, गांव भी इसमें सभी शामिल है।

क्या होता है,बाल शोषण ?

दरअसल बाल शोषण दो तरह का होता है। एक गंभीर तरह का है जिसमें 21 पर्सेंट ऐसे बच्चे आते हैं जिसमें रेप, बच्चे को गलत जगह हाथ लगाना, बच्चे को जबरन छूना, उसके कपड़े उतारना और बच्चे की अश्लील तस्वीरें खींचना, कम गंभीर में 32 पर्सेंट बच्चे आते हैं जिसमें बच्‍चे को जबरन चूमना और बच्चे को अश्लील वीडियो दिखाना शामिल है। लोग सोचते हैं कि चाइल्ड‍ एब्यूज सिर्फ लड़कियों के साथ ही होता है जबकि ऐसा नहीं है। 2007 की महिला एवं बाल विकास मंत्रालय रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बच्चों के साथ बाल यौन शोषण हुआ उनमें से 53 पर्सेंट लड़के थे।

एेसे में क्या करे…

अकसर, एेसी हालत में बच्चें पेरेंट्स को नहीं बता पाते आपके बच्चों को पता ही नहीं होता कि इस बारे में पेरेंट्स से क्या बात करें और कैसे करें। एेसे में आपको इस लायक बनना होगा कि आप अपने बच्चे की बात सुनें, बच्चे की बात समझें।बच्चे इस बात को समझते हैं कि अगर वे इस बारे में पेरेंट्स को बताएंगे तो उनका विश्वास नहीं किया जाएगा। और चुप्पी शोषण का ही एक हिस्सा है। लोग बच्चों को धमकी देते हैं कि इसके बारे में बताना मत। बच्चे इससे डर जाते हैं। कई बार बच्चों को अपराधी प्‍यार से बात करता हैं कि ये तुम्हारे और हमारे बीच का मामला है या फिर हम एक खेल खेल रहे हैं. ये सभी बातें होती हैं । एेसे वक्त में बहुत जरूरी है आप बच्चे का विश्वास करें कि बच्चे इस तरह की बातों के बारे में झूठ नहीं बोलेंगे। बच्चे से माफी मांगे कि उनके रहते हुए बच्चे के साथ ऐसा हुआ,उसके बाद बच्चे की पूरी बात सुनें और कोई ठोस कदम उठाने का निर्णय लें।

हमें बच्चों के अंदर के इंसान को जिन्दा रखना होगा

बाल यौन उत्पीडन एक स्वस्थ बाल मस्तिष्क को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर देता है जिससे बच्चों में व्यवहार संबंधी अनेक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं जिसका परिणाम एक खराब युवा मानव संसाधन के रूप में आता है। प्रख्यात बाल लेखक जैनज़ कोरज़ाक ने कहा था कि- ‘बच्चे और किशोर, मानवता का एक-तिहाई हिस्सा हैं। इंसान अपनी जिंदगी का एक-तिहाई हिस्सा बच्चे के तौर पर जीता है। हमें जरूरत है तो बस बच्चों के अंदर के इंसान को जिन्दा रखने की।

मनोवैज्ञानिको का क्या कहना है

मनोवैज्ञानिक डॉ. रजत मिश्रा का कहना है कि ऐसे लोग जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं इनमें किसी तरह की गिल्ट की भावना नहीं होती। इन्हें पछतावा नहीं होता ऐसे लोग मानते हैं कि उन्होंने बच्चो के साथ जो किया है वो सही किया है.वे बच्चे को एडल्ट की तरह देखते हैं। वे मानते हैं कि बच्चा इसे एन्जॉय करता है। ऐसे अपराधी शातिर दिमाग से ऐसा करता है। वे किसी को देखकर अपना टारगेट बनाते हैं। बच्चे के मूवमेंट, बच्चे के बिहेवियर और उसके एन्वायरन्मेंट को जांचते हैं। इनमें अपना एक तरह का कॉन्फिडेंस होता है। यह जल्दी‍ ही बच्चों का दिल जीत लेते हैं। बच्चों को बहला-फुसला लेते हैं।और बच्चें जल्दी ही इन पर भरोसा भी करने लगते हैं। यह जरूरी है एेसे लोगो के खिलाफ आवाज उठाई जाए।

यह जरूरी नहीं कि कोई आपसे बड़ा है तो उसको रिसपेक्ट करो। आपको उसके व्यवहार का आदर करना चाहिए उनकी उम्र का नहीं,अगर किसी का व्यवहार आपके साथ ठीक नहीं है तो उसका आदर ना करें फिर उनकी उम्र चाहे कितनी भी हो। बल्कि हमें उसके खिलाफ शिकायत करनी चाहिए। जब भी आप देखें कि कोई बच्चा मुसीबत में है तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नबंर 1098 पर कॉल करें।

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