फतवा का ख़ौफ़, आख़िर कब ख़त्म होगा फ़तवों का सिलसिला?

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इस्लाम से जुड़े किसी मसले पर क़ुरान और हदीस की रोशनी में जो हुक़्म जारी किया जाए वो फ़तवा है

मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ फ़तवे जारी करने का सिलसिला ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर से जारी फतवे में कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं को सार्वजनिक(पब्लिक) स्थानों पर अकेले नहीं जाना चाहिए। अगर ज़्यादा जरूरी है, तो घर के किसी मर्द के साथ ही जाना चाहिए।

बाल काटने और आइब्रो बनवाने पर फतवा-

हाल ही में दारुल उलूम देवबंद ने मुस्लिम महिलाओं के लिए फतवा जारी किया, जिसमे कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं के लिए हेयर कटिंग और आइब्रो बनवाना नाजायज़ है। फतवा में कहा गया है, ‘इस्लाम में आइब्रो बनवाना और बाल कटवाना धर्म के खिलाफ है। कोई मुस्लिम महिला ऐसा करती है तो वह इस्लाम के नियमों का पालन नहीं कर रही है।’

इसके पीछे का तर्क सुनकर तो सबके होश ही उड़ गए-

फ़तवे में कहा गया कि इस्लाम में महिलाओं पर 10 पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्हीं में बाल काटना और आइब्रो को शेप देना भी शामिल है। लंबे बाल महिलाओं की खूबसूरती का हिस्सा है। इस्लाम मजबूरी में बाल काटने की इजाजत देता है। बिना किसी मजबूरी के बाल कटवाना नाजायज है।’

आख़िर क्या होता है ये फतवा?

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फतवा एक अरबी शब्द है

इस्लाम से जुड़े किसी मसले पर क़ुरान और हदीस की रोशनी में जो हुक़्म जारी किया जाए वो फ़तवा है। यहां ये बात भी साफ़ कर देनी ज़रूरी है, कि फ़तवा हर मौलवी या इमाम जारी नहीं कर सकता है जब तक उसे इस्लाम की पूरी जानकारी नहीं है। फतवा देने के लिए एक अथॉरिटी होती है जो पूरी तरह सोच विमर्श करती है।
फतवा, कोई कानून नहीं है जिससे सबको डरना चाहिए। फतवा एक राय है उसको वैसे ही देखना चाहिए। इसे मानना या ना मानना लोगों के उपर ही है।

अजीबोगरीब फतवों की लंबी फे‍हरिस्‍त-

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आए दिन नए फ़तवे जारी किए जाते हैं
  • नाहिद के खि‍लाफ 46 फतवे जारी किए गए

सन 2015 में म्यूजिकल रिएलिटी टीवी शो ‘इंडियन आइडल जूनियर’ की फर्स्ट रनर अप रही नाहिद के खि‍लाफ 46 फतवे जारी किए गए। उसका कसूर बस इतना था कि 25 मार्च 2017 को असम के लंका इलाके के उदाली सोनई बीबी कॉलेज में नाहिद को परफॉर्म करना था। लेकिन फ़तवे के अनुसार यह शरिया के खिलाफ है। फतवों पर नाहिद ने कहा कि उनका संगीत अल्लाह का तोहफा है और वो इस तरह की धमकियों के आगे झुककर अपना संगीत नहीं छोड़ेंगी।

  • तारिक फतह-

ऑल इंडिया फैजान-ए-मदीना कॉउंसिल ने कनाडा के मुस्लिम सोशल वर्कर तारिक फतह का सिर कलम करने के लिए 10 लाख 786 रुपए के इनाम का ऐलान किया था। कॉउंसिल की दलील थी कि तारिक ने अपने टीवी शो ‘फ़तेह का फतवा’ में ग़लत दलीलें दी थीं। ऐसी दलीलें जो देश में मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों के बीच झगड़े को बढ़ावा देती हैं।

  • सानिया मिर्जा-

टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की स्कर्ट पर कोलकाता के एक इस्लामी संगठन ने एतराज जताकर फतवा जारी कर दिया।
उनके मुताबिक सानिया को छोटी स्कर्ट पहनकर टेनिस नहीं खेलना चाहिए।

  • एआर रहमान-

पैगंबर मोहम्मद पर बनी फिल्म में संगीत देने के कारण रहमान को मुस्लिम समुदाय के एक तबके का विरोध झेलना पड़ा।
इस कारण उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया।
फतवे में कहा गया है कि पैगम्बर की जिंदगी को एक नाटक के रूप में पेश करना और उनके किरदार को गैर-मुस्लिम अभिनेता के द्वारा निभाने से मजहब का मजाक उड़ाया गया है। इसलिए रहमान को फतवा जारी कर दोबारा कलमा पढ़ने के लिए कहा है।

  • मोहम्मद कैफ-

पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने ट्विटर पर अपनी सूर्य नमस्कार करते हुए तस्वीरें पोस्ट की थीं जिसे दारुल उलूम ने मजहब के खिलाफ बताया है। सूर्य नमस्कार पर दारुल उलूम पहले भी फतवा जारी कर चुका है।

  • मोहम्मद शमी व उनकी पत्नी हसीन जहां-

शमी ने पत्‍नी हसीन जहां के साथ तस्‍वीर पोस्‍ट की थी। इसमें उनकी पत्‍नी स्‍लीवलैस गाउन पहने होती हैं। इस पर कई कट्टरपंथियों ने आपत्ति जताई थी।

  • भारत माता की जय कहने पर फतवा-

भारत माता की जय कहने को लेकर इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने एक फतवा जारी किया था। इसमे कहा गया था कि भारत माता की जय बोलना मुसलमानों के लिए जायज नहीं है। फ़तवों की लिस्ट बहुत लंबी है। ऐसे अनगिनत अजीबोगरीब फ़तवे आए दिन जारी होते रहते है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने-

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सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने 2014 में सवाल किया, कि कौन सा कानून फतवा जारी करने का अधिकार देता है और कौन सा कानून पंडित को जन्मपत्री बनाने का अधिकार देता है? SC ने कहा कि फतवों को मानना जरूरी नहीं है।

क्या ख़त्म होगा फ़तवों का सिलसिला?

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फतवा, कोई कानून नहीं है., जिससे सबको डरना चाहिए

ये फ़तवो का सिलसिला आख़िर कब ख़त्म होगा? दूर-दूर तक कोई उम्मीद भी नहीं है कि ये सिलसिला कभी ख़त्म होगा।कभी गाना गाने पर, सरोगेसी, मोबाइल फ़ोन रखने पर, अकेले घूमने पर, छोटे कपड़ो पर और कई चीज़ों पर फ़तवा जारी कर देना कितना सही है? क्या ज़बरदस्ती फ़तवों को लागू करना क़ानून के दायरे में नहीं आना चाहिए?

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