मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल करने पर हो जाएँगे इन जानलेवा बीमारियों का शिकार

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Hamrful and serious disorders by smartphones
मोबाइल फ़ोन का ज़्यादा इस्तेमाल पहुँचा सकता है गंभीर नुकसान

आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में इंसान मशीनों का गुलाम बन गया है। आज तो लगभग हर युवा के पास जादुई डिवाइस यानी की मोबाइल है, जिसकी बदौलत आप 24 घंटे 365 दिन दुनिया में होने वाली हर छोटी मोटी चीज़ों से अवगत रह सकते है व करीब रह सकते हैं। इनसे हमारी जिन्दगी बहुत आसान हो गई है। ऐसा कोई भी नहीं है जिसके पास मोबाइल फोन ना हो चाहे अमीर हो या ग़रीब।

mobile phone harmful for people
आज तो लगभग हर युवा के पास मोबाइल है।

मोबाइल से ब्रेन ट्यूमर का खतरा जाने कैसे-

Brain tumor by mobile
दिन भर मोबाइल पर चिपके रहने वाले लोगों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा हो सकता है।

बिना अब हम जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर पाते। आदत ऐसी बन गई है कि जब कॉल नहीं होता, तो भी हमें लगता है कि घंटी बज रही है। क्या ये मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव नहीं है? पूरे दिन मोबाइल पर फ़ेसबुक व अन्य साइट्स पर आज के यूथ अपना वक्त ज़ाया कर रहे है दिन भर मोबाइल पर चिपके रहने वाले लोगों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा हो सकता है। ये हमारे दिमाग़ को अंदर से बहुत कमज़ोर कर देता है और हमारी याददाश्त को कमज़ोर करता है। ‘न्‍यूयार्क टाइम्‍स’ ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि सेलफोन से दिन भर चिपके रहना, एसएमएस भेजना व फेसबुक-ट्विटर पर अपडेट लिखना, सूचनाओं का आदान-प्रदान कम और ध्‍यान भटकाना अधिक है। लोग जब फोन या इंटरनेट के जरिए औरों के संपर्क में रहते हैं तो वे मतलब की बातें कम और इधर-उधर की गपशप अधिक करते हैं। इससे उनका दिमाग बेमतलब की बातों में उलझ जाता है और वे किसी एक काम को भी ढंग से नहीं कर पाते।

ज़्यादा फोन पर चिपके रहने वालो के लिए हाल मे ही बुरी खबर आई है। मोबाइल फोन ने एक नया डर भी पैदा किया है। जाने इस डर के बारे में-

नोमोफोबिया है क्या, कहीं आप तो इसके शिकार नहीं ? 

mobile phone causes nomophobia
नोमोफोबिया की बीमारी के दौरान आपको बार-बार यही महसूस होता रहता है कि आपका मोबाइल कहीं खो न जाए।

नोमोफोबिया को रिंग एंजाइटी भी कहते हैं। इसमें आपको बार-बार यह महसूस होता है कि कहीं आपका फोन बज तो नहीं रहा। कहीं आपके किसी ने कोई मैसेज तो नहीं किया है। आपको अक्सर यह अंदेशा लगा रहता है कि आपका फोन बज रहा है आप उसकी रिंग को सुन नहीं पा रहे हैं। कहीं किसी ने कोई मिस कॉल तो नही किया, इन सब बातों का डर आपको हमेशा सताता रहता है। नोमोफोबिया की बीमारी के दौरान आपको बार-बार यही महसूस होता रहता है कि आपका मोबाइल कहीं खो न जाए। आप अनायास ही बार-बार अपना मोबाइल फोन चेक करते रहते हैं।

नोमोफोबिया का शिकार होने से कैसे बचें-

सोशल साइट्स पर कम एक्टिव रहने ला प्रयास करें। ज़्यादा लंबे समय तक फोन पर बात करने से बचिए। मोबाइल फोन को पैंट या शर्ट की जेब में रखने की बजाय अपने हाथ में ही रखिए। बिना वजह की चैटिंग या एसएमएस करने से बचें। बार-बार अगर मोबाइल पर नजर जा रही है तो कुछ देर तक के लिए स्विच ऑफ कर दीजिए।

क्या आपको अंदाज़ा है की सोशल साइट्स ज़्यादा इस्तेमाल करने पर आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते है? आगे पढ़िए केसे डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी की जकड़ मे आप आ सकते है।

mobile cause of depression
डिप्रेशन ऐसी बीमारी है जो इंसान को अंदर से नुकसान पहुँचाती है।

साइट्स का अत्‍यधिक इस्‍तेमाल लोगों को ‘सोशल मीडिया एंक्‍जाइटी डिस्‍ऑर्डर’ का मरीज बना दिया है। इस बीमारी में इनसान अपनी तुलना दूसरों से करने लगता है। स्‍टेटस अपडेट या फोटो पर औरों से कम लाइक मिलने तथा फोन कॉल या ईमेल के अनदेखा रह जाने पर उसे बेचैनी महसूस होने लगती है। वह खुद को औरों से कमतर आंकने लगता है। ‘एबीसी न्‍यूज’ के अनुसार मोबाइल और इंटरनेट नींद में खलल के लिए भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं। जो लोग रात में सोने से पहले इनका इस्‍तेमाल करते हैं उनकी आंख देर से लगती है।

एक ही मोबाइल का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल करने का ये है भयावह खतरा-

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एक ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कई लोगों द्वारा किए जाने से इंफेक्शन फैल सकता है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अनुसार एक ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल कई लोगों द्वारा किए जाने से इंफेक्शन फैल सकता है, क्योंकि यह बैक्टीरिया पैथोजन को बढ़ावा देता है।

मोबाइल फ़ोन ज़्यादा ख़तरनाक या टावर?

mobiles and towers both are harmful
टावर लगातार चौबीसों घंटे रेडिएशन फैलाते हैं।

प्रो. गिरीश कुमार के अनुसार टावर लगातार चौबीसों घंटे रेडिएशन फैलाते हैं। जबकि टावर के पास रहनेवाले उससे लगातार निकलने वाली तरंगों की जद में रहते हैं। अगर घर के समाने टावर लगा है तो उसमें रहनेवाले लोगों को 2-3 साल के अंदर सेहत से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। वहीं मोबाइल से भी कम रेडीयेशन नही निकलती है, मोबाइल पर अगर हम घंटा भर बात करते हैं तो उससे हुए नुकसान की भरपाई के लिए हमें 23 घंटे मिलते है।

माना की आज के समय में मोबाइल के बिना रहना असंभव है लेकिन अगर वही मोबाइल आपके बीमारियों का कारण बन जाए तो उससे कुछ हद तक अपने से दूर रखना ही बेहतर है। आकर्षक और महंगे मोबाइल हैंडसेट लेने की सबकी इच्छा होती है। लेकिन खूबसूरत दिखने वाला यह फोन न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि हमारे स्वास्‍थ्‍य के लिए बहुत खतरनाक है।

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