क्या 21वीं सदी में भी देश की महिलाओं को सुरक्षित रहने का हक नहीं?

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crime against women
फोटो: इंटरनेट द्वारा- महिलाओं को असली सुरक्ष कब मिलेगी, यह कहना मुश्किल है

वैसे तो महिला सुरक्षा की बात हर कोई करता है चाहे सरकार हो या फ़िर पुलिस। लेकिन सच्चाई ये है कि आज भी कई जगह ऐसे है जहा स्ट्रीट लाईट्स न होनें के कारण महिलाऐं शाम के बाद घर से नहीं निकल सकती या फ़िर आॅफ़िस में देर रात काम नहीं कर सकती। एक सच यह भी है कि आए दिन महिलाओं को छेड़छाड़, पीछा करने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

आए दिन अख़बार में खबरें-

crime against women
हमारे देश में महिलाओ की सुरक्षा एक गंभीर विषय है

आजकल तो अख़बार पढ़ने में भी बहुत डर लगता है। न जाने कब किसी महिला के साथ रेप, छेड़खानी या एसिड अटैक जैसी खबरों से सामना हो जाए। अगर अख़बार को पूरा खंगालें तो बस दुष्कर्म और हत्या, बलात्कार, शोषण, रेप कर गर्भपात जैसी खबरें मिलेंगी। अपराधियों में आख़िर ख़ौफ़ इतना कम क्यों होता जा रहा है?

हमारे देश में महिलाओ की सुरक्षा एक गंभीर विषय है, कई महिलाएँ अपने घरो से बाहर निकलने में भी डर रही हैं। वही दूसरी ओर कई महिलाएँ भी हैं डट कर हर समस्या से लड़ रहीं है।

अपराधियों में ख़ौफ़ कम क्यों होता जा रहा है?

Rising Crime Against Women in India
फ़ोटो कर्टसी: द इंडियन एक्सप्रेस- लड़कियों के साथ हुए अपराध का दिसंबर 2015 तक का डेटा

छेड़खानी की शिकायत को गंभीरता से न लेना भी अपराधियों के मन में पुलिस का डर मिटा देती है। अक्सर इन मामलों में आरोपी से माफ़ी मंगवाकर या थोड़ा बहुत पुलिस द्वारा उसे सबक सिखाकर उसे छोड़ दिया जाता हैं क्योंकि कानूनी पचड़े से सब दूर रहना चाहते हैं।

ऐसा नहीं है कि शिकायतकर्ता को न्यायप्रणाली में यकीन नहीे है बल्कि न्याय पाने की लम्बी प्रक्रिया से है।
ऐसे में लड़कियों को बेझिझक होकर छेड़खानी की शिकायत करनी चााहिए और पुलिस को भी आरोपी को सज़ा दिलाने में कोई कसर नहीे छोेड़नी चाहिए, ताकि शुरूआत में ही ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कस इन्हें आगे जघन्य अपराध करने से रोका जा सके।

लड़कियाँ डरे नहीं-

crime against women
फोटो: इंटरनेट द्वारा- लड़कियों को अब डरने की ज़रूरत नहीं है।

सबसे पहली बात आज ज़माना बहुत आगे निकल चुका है। इसलिए लड़कियों को अब डरने की ज़रूरत नहीं है। किसी भी समस्या के खिलाफ अपनी आवाज़ ज़रूर उठाए। चाहे स्ट्रीट लाइट्स रास्ते में ना हो, चाहे वर्क प्लेस पर उत्पीड़न हो, चाहे छेड़खानी या अन्य कोई भी दिक्कत।
अगर आज अपनी आवाज़ नही उठाई तो आगे भविष्य में खुद आपको बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इसलिए अपराध के खिलाफ चुप ना बैठे और ना ही अपराध सहें।

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