क्या सुरक्षा में भी असुरक्षित हैं हमारे बच्चे

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Ryan internationl
प्रतीकात्मक फोटो

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या ने पूरे देश में सनसनी मचा दी है वाकई में यह बहुत बडी. दुखद घटना है इस घटना ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया है। क्योंकि इतने बड़ी नामी स्कूल में जहां सुरक्षा के इंतजाम होने के बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही हो जाना कोई इतेफाक तो नहीं हो सकता। कि स्कूल के बाथरुम में किसी बच्चे को इतनी बेहरमी से मार दिया जाये और किसी को भनक ही लगे, यह कैसे संभव है ? क्या उस बच्चें को किसी ने बाथरुम में जाते हुये नहीं देखा होगा, या उस कंडक्टर जिस पर इस घटना के लिये आरोप लगाया गया है वह कैसे बच्चों के बाथरुम का इस्तेमाल कर सकता है इस बात पर क्या स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया वो बच्चें चिल्लाया होगा क्या उसकी चीख किसी को सुनाई नहीं ?दी यह प्रश्न ऐसे हैं जो स्कूल प्रशासन की इतनी बड़ी लापरवाही पर सवालिया निशान उठातें हैं, स्कूल ऐसी जगह है जहां हम बिना किसी डर के अपने बच्चों को उनके उज्व्वल भविष्य के लिये भेजते हैं और इस जगह ऐसी घटनाएं होने लगा तो लोगों का स्कूल से ही विश्वास उठ जायेगा इस घटना ने पूरे स्कूल के बच्चों को दहशत में डाल दिया और उनके माता-पिता में गहरा आक्रोश दिखायी दे रहा है प्रद्युम्न के दोस्त जो उसके साथ उसी क्लास पढा.ई कर रहे थे वह सदमें में हैं उनके अभिभावकों का कहना है कि बच्चे इतने ज्यादा डरे हुए हैं कि इस घटना के बाद ना तो वह ठीक से बात कर पा रहे हैं, ना खाना खा रहे हैं केवल उनमें दहशत दिखाई दे रही है। और हो भी क्यों ना क्योंकि यह घटना ऐसी है कि जो हम सभी को यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या सुरक्षा में भी सुरक्षित नहीं रह गए हमारे बच्चे।

अगर बात करें तो उस बंस कंडक्टर की तो उसके परिवालों का यह कहना है कि उसे फंसाया जा रहा है, इसमें इसका कोई कसूर नहीं है ऐसा उस स्कूल की वजह से किया जा रहा है।

अभी इस घटना से लोग उबर नहीं पाये कि दिल्ली के शाहदरा स्थित गांधी नगर इलाके में एक प्राइवेट स्कूल के परिसर में एक चपरासी द्वारा पांच साल एक बालिका के साथ कथित रूप से बलात्कार किये जाने का मामला सामने आया है। शाहदरा की पुलिस उपायुक्त नुपूर प्रसाद ने बताया 40 वर्षीय आरोपी विकास को गिरफ्तार कर लिया गया है, वह इसी स्कूल में चपरासी का काम करता है पुलिस ने बच्ची के बताए हुलिये और पहनावे के आधार पर विकास को पकड़ा, जिसके बाद उसकी तस्वीर बच्ची को दिखाई गई बच्ची ने उसे पहचान लिया

इससे पहले इसी साल अगस्त में मुंबई में स्कूल में चार साल की बच्ची से रेप का मामला सामना आया था हमारे देश में रेप की घटनाओं की संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि हर दूसरे दिन अखबार में रेप की खबरें जरुर आती हैं और यदि आप गौर करें तो इसमें बच्चों के साथ अब रेप की घटनाओं खबरें आये दिन आती रहती हैं।

आंकड़ें बताते हैं कि साल 2015 में बच्चि‍यों के खि‍लाफ होने वाले अपराध के 94,172 मामले दर्ज किए गए. इनमें 12 प्रतिशत यानी कि 10,854 रेप के मामले थे, इसका मतलब यह हुआ कि देश में हर 48 मिनट पर कोई एक बच्ची रेप का शिकार होती है तो इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अब तक कितनी बच्चे इस घटना का शिकार हुए होगें। और ज्यादातर इन घटनाओं का अंजाम कोई जानने वाला ही देता है फिर चाहे वह स्कूल में हो या घर में , सुरक्षा के बावजूद भी बच्चे रेप जैसे जघ्नय अपराध का शिकार बन जाते हैं।

सबसे बडा. सवाल यह उठता है कि हमारे बच्चे स्कूल हो घर हो कहीं भी सुरक्षित नहीं है हम उन पर 24 घंटे तो नजर नहीं रख सकते हैं लेकिन उनको इस बात के लिये तैयार कर सकते हैं कि कभी भी किसी अंजान या अपने करीबी शख्स की बातों में ना आये अपने बच्चे की प्रत्येक गतिविधयों पर नजर रखे, उन्हें किसी भी शख्स से दूर रहने को बोले फिर चाहे वह स्कूल का हो या घर का या फिर और आस-पडो.स का । बच्चों को अपने विश्वास में जरुर लें ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश करे साथ ही स्कूल की भी हर उस गतिविधियों पर नजर रखें जिसमें संदेह लगे यह सब केवल ऐसी सावधनियां हैं जो हम अपना सकते हैं लेकिन जब कोई व्यक्ति ऐसी घटना को अंजाम देता है उसके बारें में तो हमे खबर नहीं लग सकती है लेकिन बच्चों को यह सारी बातें समझकर शायद बच सकते हैं ।

प्रद्युम्न तो दोबारा नहीं वापस आ सकता लेकिन इस घटना से अभिभावकों को यह सबक तो मिल सकता है कि स्कूल बड़ा हो या फिर छोटा कब क्या वारदात हो जाये कुछ नहीं कहा जा सकता है इसीलिये किसी भी स्कूल में एडमिशन से पहले उसके हर पहलू यानी कि स्कूल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था और उस स्कूल के हर स्टाफ के बारें में जानकारी रखने की कोशिश करें।

जो भी हो इन बच्चों और प्रद्युम्न के पर क्या बीती होगी यह सोचकर दिल दहल जाता है और उन बच्चों उस समय की क्या स्थिति होगी वो कितना चीखे होगें किस तरह से अपने आपको बचाने की कोशिश की होगी कि काश कोई उनकी पुकार सुन ले यह सोच कर ही रुह कांप जाती है। तो सोचिये उन बच्चों पर क्या बीती होगी । इसलिये मन में यही सवाल उठता है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद असुरक्षित हैं हमारे बच्चे।

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