ये हैं दुसरी दुनिया के लोग, इस ग्रह पर कैसे रहते हैं ?

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kuber paddy town in australiya
जमीन के अंदर रहते हैं 4 हजार लोग

पृथ्वी के सिवाये हमारे जैसे लोग क्या कहीं और भी रहते होंगे। ये लोग दिखते कैसे होंगे। क्या खाते होंगे। क्या इन लोगों ने कभी हमें ढ़ुंढने की कोशिश की होगी। अक्सर दूसरी दुनिया के लोगों को लेकर हमारे मन में ऐसे ही सवाल आते हैं। वैज्ञानिक जगत के साथ –साथ हम आम लोग भी इन लोगों के बारे में सोचते होंगे। बचपन में हमने जमीन के नीचे रहने वाले बौने लोगों की कहानी पढ़ी तो बड़े होकर उड़नतशतरियों के किस्से सुने। हम हमेशा से ये जानना चाहते हैं कि क्या इस दुनिया में हम अकेले हैं या हमारे जैसे और भी लोग हैं जो कहीं और रह रहें है। आज आपकी इन्ही उत्सुकताओँ को शांत करने के लिए हम ऐसा कुछ बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप दंग रह जायेंगे

kuber paddy is different from other world
उपरी दुनिया से अलग है इनकी दुनिया

आज के समय में हम लोग सिर्फ जमीन पर रहते हैं। हम लोग न तो हवा में रहते हैं और न ही जमीन के अंदर। आपको बता दें कि इस पृथ्वी पर एक ऐसा इलाका भी है जहां के लोग न तो जमीन पर रहते हैं और न ही हवा में। ये लोग रहते हैं जमीन के अँदर। जी हां, बात सुनने में थोड़ी अजीब जरुर है लेकिन पूरी तरह से सच है। एक शहर के चार हजार लोग जमीन के अंदर रहते हैं। दरअसल आस्ट्रेलिया में एक शहर है जिसका नाम है कूबर पेडी। कई दशकों पुराने इस शहर के लोगों का उपरी दुनिया के लोगों से कम ही वास्ता रहता है।जमीन के अंदर बसा ये शहर बेहद खुबसुरत है। इस इलाके का तापमान अक्सर 40 डिग्री से उपर रहता है। इसलिए यहां के लोग उपर रहने के बजाये जमीन के नीचे रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

kuber paddy people
4 हजार लोगों की अपनी अलग दुनिया

आपको बता दें कि इस शहर के आसपास का इलाका मरुस्थलीय है जिस वजह से लोग जमीन के उपर नहीं बल्कि जमीन के अंदर घर बनाकर रहते हैं। इन लगों के घर बेहद खुबसुरत होते हैं। यह लोग कभी –कभार ही जमीन के उपर आते हैं। दरअसल इऩ लोगों ने जमीन के नीचे ही अपनी एक अलग दुनिया बसा ली है।

great stone here
बेशकीमती पत्थर की वजह से नजर में आया ये शहर

यहां आपको होटल, कैसीनो से लेकर पूल और गेम्‍स तक की सारी सुविधाएं मिल जायेंगी। इतना ही नहीं यहां एक म्‍यूजियम भी है जो लोगों को खासा आकर्षित करता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का 95 प्रतिशत बेशकिमती दूधिया पत्थर इसी इलाके में मिलता है। इस पत्थर की वजह से ही 1915 में इस शहर की खोज हो पायी थी जिसके बाद ये दुनिया के नक्शे पर आया। इस पत्थर की खासियत के चलते यहां के लोगों को प्रयाप्त रोजगार मिलता है।

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