HIV और AIDS : क्या है इनसे जुड़ी गलत धारणाएं और सच

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इस बीमारी के तेजी से फैलने के मुख्‍य कारणों में एक जानकारी की कमी भी है।

एड्स के बारे में लोगों में जानकारियाँ कम और धारणाएं ज़्यादा है। कई लोग जानकारी के अभाव में एड्स और एचआईवी को एक जैसा समझते हैं। आज भी समाज में इससे जुड़े कई ऐसे अफवाहें फैली हुई हैं जिसे जानकारी के अभाव में सच मान लिया जाता है। लेकिन ये गलत है। इन गलत अफवाहों को जानना बेहद ज़रूरी है। आइए जानते हैं HIV और AIDS से जुड़ी उन मिथक बातों के बारे में..

क्या है एचआईवी-
hiv
यह वायरस शरीर में ताउम्र रहता है

एचआईवी वायरस शरीर में प्रवेश कर सीडी फोर सेल्स पर हमला करता है और उनमें अपनी संख्या बढ़ाकर सीडी फोर सेल्स का ख़ात्मा शुरू कर देता है। कई सालों के दौरान धीरे-धीरे सीडी फोर सेल्स की संख्या कम होने लगती है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। इसके कुछ सालों बाद व्यक्ति के शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता ख़त्म हो जाती है और इस अवस्था को एड्स कहते हैं।

इलाज के द्वारा HIV(ह्यूमन इम्‍यूनोडिफिसिएंशी वायरस) को नियंत्रित किया जा सकता है। AIDS(एक्‍वायर्ड इम्‍यूनोडिफिसिएंशी सिंड्रोम), एचआईवी संक्रमण के कारण होता है। एचआईवी एचआईवी एक वायरस है, और एड्स एक बीमारी है।

एक साथ बैठने से यह बीमारी नहीं फैलती है

1भ्रम- एचआईवी/एड्स फैलने वाली बीमारी है

यह किसी के साथ खाना खाने से, पसीने से, हाथ मिलने से, गालों पर किस करने से, एक साथ बैठने से नहीं फैलता है। यह संक्रमित खून यानी कि ग्रसित व्यक्ति का खून चढ़ाने से होता है। इस्तेमाल की हुई सुई से, असुरक्षित यौन संबंध से, मां के दूध से फैलता है।

कीट के अंदर वायरस ज़्यादा समय के लिए नहीं टिकता है

2भ्रम- मच्‍छर के काटने से एचआईवी हो सकता है

ये एक दम गलत अवधारणा है क्योंकि किसी भी कीट के अंदर वायरस ज़्यादा समय के लिए नहीं टिकता है। इसलिए मच्‍छर अगर एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति को काटने के बाद स्‍वस्‍थ्‍य व्‍यक्ति को काटता है तो भी उसे एचआईवी नहीं हो सकता।

टैटू बनवाते वक्त टूल्स को चैक ज़रूर करें

3भ्रम- टैटू या पीयरसिंग से एड्स नहीं होता

एक ही सुई से टैटू या बॉडी पियर्सरिंग करने से एड्स होने की आशंका रहती है। इसलिए जब भी टैटू बनवाएँ हमेशा उसके टूल्‍स को चैक करें।

बच्चे को एड्स होने से बचाया जा सकता है

4भ्रम- एड्स पीड़ित के बच्चों को भी एड्स होता है 

ये एक दम गलत अवधारणा है। एड्स दंपत्ति को बच्चे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की निगरानी में प्रसव के बाद बच्‍चे को मां का दूध नहीं देना चाहिए। कई तरीक़ो से बच्चे को एड्स होने से बचाया जा सकता है।

दोनों अलग-अलग बातें हैं।

5भ्रम- एचआईवी और एड्स एक ही बात है

एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8 से 10 साल बाद तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। अगर समय से इलाज शुरू किया जाए, तो एड्स तक का गैप बढ़ाया जा सकता है।

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