अक्षरधाम में विशेष रुप से होती है अन्नकूट पूजा 1100 से ज्यादा पकवानों का होता है अनोखा अन्नकूट

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AKSHARDHAM
फोटो -इंटरनेट माध्यम से

दीवाली के अगले दिन अन्नकूट पूजा का विशेष महत्व है और हर घर, मंदिर में अन्नकूट पूजा की जाती है। खास तौर से स्वामी नारायण अक्षरधाम में अन्नकूट की पूजा बहुत खास तरह से होती है। मंदिर के तमाम गलियारे और गर्भगृह में पकवानों, फलों, शर्बतों और चाट पकौड़ों के थाल, प्लेट और दोने ऐसे सजाए जाते हैं कि भगवान और भक्तों की आत्मा तक तृप्त हो जाती है और समस्त वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

साल में एक बार होने वाले इस पूजा और उत्सव का इंतजार श्रद्धालुओं को काफी इंतजार रहता है। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि 1100 से अधिक तरह के स्वादिष्ट पकवान भगवान स्वामी नारायण को समर्पित किए जाते हैं। इस दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती हैं और इसी के चलते संस्था के सैकड़ों स्वयंसेवक सहायता के लिये लगे रहते हैं और लाइन में खड़े लोग दिव्य अन्नकूट दर्शन के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा जयकारों से करते हैं।

अन्नकूट की परंपरा भारतीय संस्कृति में द्वापर युग से मिलती है जब बाल कृष्ण ने ब्रजवासियों को नई फसल के अन्न और पकवान गिरिराज पर्वत को अर्पण कर प्रकृति के संरक्षण का व्यावहारिक संदेश दिया।

अन्नकूट पूजा के पीछे की मान्यता

अन्नकूट की परंपरा आज से नहीं बल्कि द्वापर युग से चली आ रही है पौराणिक कहानियों के अनुसार बालकृष्णबालकृष्ण की गोवर्धन धारण लीला से शुरू हुई थी, कान्हा ने इंद्र का मान भंग करने और गोप ग्वाल समाज को प्रकृति से जोड़ने के लिए ये उपक्रम किया, इंद्र की पूजा बंद कर गिरिराज पर्वत की पूजा का विधान किया इंद्र ने कोप कर घनघोर वर्षा की तो कान्हा ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन उठा लिया, सात दिन-रात बारिश हुई तमाम परेशनियों को झेलते हुये कान्हा ने गोवर्धन उठाए रखा।

इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत्त का चित्र बनाएं। फिर उस पर अक्षत, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा, जल, बताशा, फल, दूध आदि चढाया जाता है। फिर तिल या घी के दीपक जलाकर इसके बाद गायों को स्नान करने के बाद उसे आरती दिखाकर मिठाई खिलाते हैं।

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