छठ पूजा 2017: इस शुभ मुहूर्त में सूर्य को दें अर्घ्य

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CHHATH PUJA
छठ पूजा 2017

कार्तिक महीनें में कई खास त्यौहारों की शुरुआत हो जाती है,करवाचौथ और दीपावली के बाद सबसे खास व्रत और त्यौहार होता है छठ, इस बार मंगलवार, 24 अक्टूबर से छठ आरम्भ हो रहा है। चार दिनों तक मनाया जाने वाला यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है। और अगर इस बार के छठ पर्व की बात करें तो यह कई मायनो में खास है क्योंकि 34 साल बाद एक महासंयोग बन रहा है, क्योंकि इस बार की छठ पूजा के पहले दिन सूर्य का रवियोग बना रहा है जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

छठ पूजा के पीछे की मान्यतायें

छठ पूजा के पीछे की सप्रियव्रत जो पहले मनु माने जाते हैं। इनकी कोई संतान नहीं थी। प्रियव्रत ने कश्यप ऋषि से संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। महर्षि ने पुत्रेष्ठि यज्ञ करने को कहा, इससे उनकी पत्नी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन यह पुत्र मृत पैदा हुआ।भी देव लोक से ब्रह्मा की मानस पुत्री प्रगट हुईं जिन्होंने अपने स्पर्श से मरे हुए बालक को जीवित कर दिया। तब महाराज प्रियव्रत ने अनेक प्रकार से देवी की स्तुति की। देवी ने कहा कि आप ऐसी व्यवस्था करें कि पृथ्वी पर सदा हमारी पूजा हो। तब राजा ने अपने राज्य में छठ व्रत की शुरुआत की।

दूसरी मान्यता के अनुसार क‌िंदम ऋष‌ि की हत्या का प्रायश्चित करने के लिए जब महाराज पांडु अपनी पत्नी कुंती के साथ वन में दिन गुजार रहे थे। तब उन दिनों पुत्र प्राप्ति की इच्छा से महारानी कुंती ने सरस्वती नदी में सूर्य की पूजा की। इससे कुंती पुत्रवती हुई। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए छठ पर्व का बड़ा महत्व है। कुंती की पुत्रवधू और पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने उस समय सूर्य देव की पूजा की थी जब पाण्डव अपना सारा राजपाट गंवाकर वन में भटक रहे थे।

छठ पर्व के बारे में एक और प्रचलित धारणा यह है कि इस पर्व की शुरुआत अंगराज कर्ण से माना जाता है। अंग प्रदेश वर्तमान भागलपुर में है जो ब‌िहार में स्‍थ‌ित है।अंगराज कर्ण के विषय में कथा है कि, यह पाण्डवों की माता कुंती और सूर्य देव की संतान है। कर्ण अपना आराध्य देव सूर्य देव को मानते थे।अपने राजा की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंग देश के निवासी सूर्य देव की पूजा करने लगे। धीरे-धीरे सूर्य पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र तक हो गया इसलिये यह मुख्य रूप से ब‌िहारवास‌ियों का पर्व है।

दीपावली से छठे द‌िन भगवान राम ने सीता के संग अपने कुल देवता सूर्य की पूजा सरयू नदी में की थी। भगवान राम ने देवी सीता के साथ षष्ठी तिथि का व्रत रखा और सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्टान एवं अन्य वस्तुओं से अर्घ्य प्रदान किया। सप्तमी तिथि को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राजकाज संभालना शुरु किया। इसके बाद से आम जन भी सूर्यषष्ठी का पर्व मनाने लगे।

क्यों खास है इस बार का छठ
शास्त्रों के अनुसार इस बार के छठ पूजा में रवियोग बन रहा है इस योग में छठ पूजा शुरू होने से सूर्यदेव भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। यदि कुंडली में किसी व्यक्ति की सूर्य की दशा खराब चल रही हो तो सूर्य की पूजा करने से सभी तरह की परेशानियों का अंत हो जाता है।

पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है।

चार दिनों तक चलने वाला ये छठ पर्व 24 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरू होगा। 25 अक्टूबर को खरना, 26 अक्टूबर को सांझ का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को सूर्य को सुबह का अर्ध्य के साथ ये त्योहार संपन्न होगा।

छठ पूजा के दिन सूर्यादय – 06:41 बजे सुबह

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त- 06:05

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