दुर्गा अष्टमी का महत्व और पूजा विधि…

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दुर्गा अष्टमी का महत्व क्या हैं

नवरात्रि या दुर्गा पूजा के आठवें दिन को अष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार यह दिन बहुत शुभ है और इस नवरात्री को लोग बहुत धूमधाम से मनाते है। अश्विनी के महीने में नवरात्री को मनाया जाता है। नवरात्री में लोग श्रद्धा भाव से माता की पूजा करते है और अष्टमी को पूजकर माता से आर्शिवाद प्राप्त करते है। इन दिनों भक्त अपने श्रद्धा भाव से माँ की आराधना करते है और उपवास भी रखते हैं। मान्यता है कि इन दिनों उपवास रखने से माँ प्रसन्न हो कर भक्त को मनवांछित फल प्राप्त होता हैं। हिंदू धर्म के अनुसार दुर्गा अष्टमी व्रत एक महत्वपूर्ण आराधना है।

नवरात्री मनाने के पीछे का रहस्य दरहस्ल,यह है की प्राचीन समय में एक दुर्गम नामक दानव रहता था। वह दुष्ट, क्रूर रूप वाला और साथ ही शक्तिशाली भी था। इस दुष्ट दानव ने अपनी दुष्टता से तीनों लोकों में अत्याचार मचा रखा था। उसकी दुष्टता से पृथ्वी, आकाश और ब्राह्मण तीनों जगह लोग परेशान थे। उसने ऐसा आंतक फैलाया था कि सभी देवता उसे डर कर कैलाश पर चले गए और भगवान शिव से कहा कि आप इसमें हस्ताक्षेप करें।

आख़िर में जाकर विष्णु, ब्रह्मा और सभी देवताओं के साथ मिलकर शिव जी ने एक रास्ता निकाला। सबने एक साथ अपनी ऊर्जा या शक्तियों को एक साथ मिलाकर शुकल पक्ष में अष्टमी के दिन नई ऊर्जा यानी देवी दुर्गा को जन्म दिया। उसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर माँ दुर्गा को सबसे शक्तिशाली हथियार देकर युद्ध को शुरू कर दिया। माँ ने बिना समय लगाए उस दानव का संहार कर दिया। उसके बाद तीनों लोको में खुशियों के साथ माँ के जयकारे लगने लगे। इसी दिन माँ की उत्पति हुई और माँ दुर्गा ने बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी। इसीलिए इस दिन दुर्गा अष्टमी मनाई जाती हैं।

पूजा की विधि

देवी दुर्गा के नौ रूप है हर रूप का एक विशेष दिन और उसकी पूजा की जाती हैं। मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन विशेष रूप से माँ दुर्गा अष्टमी के महागौरी की पूजन किया जाता हैं। इस दिन महागौरी की तुलना शंख, चंद्रमा या चमेली के सफेद रंग से की जाती है। इस दिन माँ दुर्गा 8 वर्ष बच्ची की तरह मासूम दिखती हैं। इस दिन माँ विशेष रूप से शांति और दया बरसाती हैं। इस दिन माँ दुर्गा के चार हाथ में से दो हाथ आर्शिवाद और वरदान देने की मुद्रा में होते हैं, बाकी दो हाथ में त्रिशुल और डमरू होता हैं। इस दिन माँ दुर्गा सफेद और हरे रंग की साड़ी के साथ एक बैल पर सवार होते देखा गया हैं।

इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करके देवी दुर्गा से प्रार्थना करते हैं। पूजा के लिए लाल पुष्प, लाल चंदन, दीया आदि सामाग्रियों के साथ देवी की पूजा की जाती हैं। देवी को अर्पण करने के लिए विशेष रूप से भोग को तैयार किया जाता हैं। भोग में हलवा, पुड़ी, छोले इत्यादि बनाए जाते हैं। साथ ही देवी को गुलाबी फूल, केले, नारियल, पान के पत्ते, लोंग, सुखे मेवे इत्यादि को प्रसाद के रूप में देवी को चढ़ाया जाता हैं।

दुर्गा अष्टमी के दिन विशेष रूप से छोटी कन्याओं को बुलाकर भोजन कराया जाता हैं। माना जाता है कि छोटी कन्याओं में माँ दुर्गा का अंश होता हैं। इस दिन 5,7,9 और 11 कन्याओं को बुलाकर सबसे पहले उनके पांव धोए जाते हैं फिर उनकी पूजा करके उन्हें भोजन में हलवा, छोले, पुड़ी इत्यादि प्रसाद दिया जाता हैं और उसके बाद उन्हें कुछ उपहार देकर सम्मान से विदा किया जाता हैं।

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