वाल्मीकि जयंती: जानें कौन थे वाल्मीकि और कैसे बने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि

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वाल्मीकि जयंती के शुभावसर पर उनकी शोभा यात्रा भी निकली जाती हैं

महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का पहला महान महाकवि कहते है। उन्होंने संस्कृत में पहले महाकाव्य की रचना की थी, जिसे दुनिया वाल्मीकि रामायण से जानती है। वैदिक काल के प्रसिद्ध महर्षि वाल्मीकि ‘रामायण’ महाकाव्य के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है। महर्षि वाल्मीकि को न केवल संस्कृत बल्कि कई भाषाओं के महान कवियों में शुमार किया जाता है।

वाल्मीकि जयंती के दिन इनकी मंदिर में पूजा की जाती है और शोभायात्रा के दौरान मार्ग में लोग इसमें बडे़ उत्साह के साथ भाग लेते हैं। युवक इस दिन महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा भाव व्यक्त करते हैं।
वाल्मीकि को याद करते हुए इस दिन उनके जीवन पर आधारित झाकियाँ निकाली जाती हैं व राम भजन होता है।

रामायण कथा:-

VALMIKI JAYANTI
उनके मुँह से निकला महाकाव्य रामायण का आधार बना।

एक बार महर्षि वाल्मीकि नदी के किनारे क्रौंच पक्षी के जोड़े को देख रहे थे। अचानक तभी एक व्याध ने क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिया। नर पक्षी की मृत्यु से दुखी मादा पक्षी विलाप करने लगी।

वाल्मीकि जी हृदय द्रवित हो उठा और उनके मुँह से अचानक यह श्लोक फूट पड़ा :

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्।।

अर्थ- ‘‘हे निषाद् (शिकारी)! तू भी अनन्त-काल तक प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं करेगा क्योंकि तूने संगिनी के प्रेम में मग्न एक क्रौंच पक्षी का वध कर दिया है।’’ यही महाकाव्य रामायण का आधार बना।

महर्षि वाल्मीकि के बारे में जाने कुछ ख़ास बातें:-

VALMIKI JAYANTI
महर्षि वाल्मीकि को न केवल संस्कृत बल्कि कई भाषाओं के महान कवियों में शुमार किया जाता है।

उनका जन्मदिन वाल्मीकि जयंती के रूप में हिंदु चंद्र कैलेंडर के अनुसार अश्विन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जो इस बार 5 अक्टूबर को पड़ी। महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी कुछ बातें आपको प्रेरणा और कुछ कर दिखाने का हौसला देंगी।

नारद मुनि के दिए गए ज्ञान द्वारा ही, वाल्मीकि रत्नाकर से ‘महर्षि वाल्मीकि’ बने

1वाल्मीकि पहले एक डाकू थे:-

एक पौराणिक कथा के अनुसार वाल्मीकि जी पहले एक लुटेरे थे। पहले उनका नाम रत्नाकर था। एक बार उन्होने लूटने के मकसद से नारद मुनि को घेरा। जब नारद मुनि ने उनसे पूछा कि आप ये काम क्यों करते हैं? तो रत्नाकर ने जवाब दिया कि परिवार के पालन-पोषण के लिए वो लूट पाट करते हैं।

भगवान नारद ने उनसे से कहा कि हम जो पाप करते है उसका फल इस दुनिया में ही भोगना होता है। इसलिए तुम जितने पाप करोगे, वो सब तुम्हें इसी जन्म में भोगने पड़ेंगे।  इस बात का रत्नाकर(वाल्मीकि) पर गहरा असर हुआ।
वह गहरी सोच में पड़ गए और नारद को पेड़ से बाँधकर अपने घर चले गए। जब उन्होने घर में जाकर इस बारे में घरवालों से पूछा तो घरवालों ने उनके पाप में साझीदारी से साफ़ इनकार कर दिया।
वह वापस लौटकर नारद के चरणों में गिर पड़े और उनसे ज्ञान देने के लिए कहा। नारद मुनि ने उन्हें राम नाम जपने के लिए कहा।

2वाल्मीकि राम नाम नहीं जप पाते थे:-

नारद मुनि ने वाल्मीकि जी को राम-नाम जपने का उपदेश दिया। लेकिन वाल्मीकि ‘राम’ नाम का उच्चारण नहीं कर पाते थे। तब नारद जी ने उन्हें बताया कि वो मरा-मरा जपें। नारद जी के कहने पर महर्षि वाल्मिकी ने मरा रटते-रटते राम का उच्चारण करना सीख लिया।

3वाल्मीकि के जन्म को लेकर असमंजस है:-

उनके जन्म को लेकर भी उसी प्रकार का असमंजस है जैसा संत कबीर के बारे में है। यह कथा भी प्रचलित है कि वास्तव में बाल्मीकि ब्राह्मण थे व एक भीलनी उन्हें चुराकर ले गई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि का जन्म नागा प्रजाति में हुआ। उन दिनों यह प्रजाति समृद्ध नहीं थी। ऐसी ही उनके जन्म को लेकर कई अटकलें है।

4वाल्मीकि ने कड़ी तपस्या की:-

उन्होने रत्नाकर वन में कई वर्षों तक तप किया और इस वजह से उनके शरीर पर चीटिंयों ने अपना घर भी बना लिया।  ऐसी कठिन हालातों में भी उन्होंने अपने हौसले को गिरने नहीं दिया।

यही रत्नाकर आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि के रूप में प्रसिद्ध हुए। आज पूरा विश्व इनकी पूजा करता है और लोग वाल्मीकि जयंती मनाकर श्रद्धा भाव प्रकट करते हैं।

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