और जब आज के ही दिन इस राजा ने एक सन्देश के चलते सब छोड़ दिया

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king mardan singh
राजा मर्दन सिंह

ये कहानी है एक ऐसे राजा की जिसने आज के ही दिन रानी झांसी के एक सन्देश के चलते अपना राज पाठ, धन दौलत और यहाँ तक कि परिवार को भी चन्द मिनटों में ही छोड़ दिया। उनकें पास वजह बतानें तक समय नही था। धर्म पत्नी के हज़ारो बार पूछने के बाद बस इतना ही कह दिया कि बहन ने राखी भेजी है,याद किया है। मैं जा रहा हूँ यही वक़्त है जब मैं अपनी बहन की सहायाता कर सकता हूँ।

वो आज का ही दिन है जब एक घुड़ सवार बड़ी तेज़ी से झांसी से ललितपुर के बानपुर की तरफ़ बढ़ रहा था। वो घुड़सवार रानी झांसी का एक सन्देश लेकर बानपुर के राजा मर्दन सिंह के पास जा रहा था, जिसे रानी झांसी अपना मुंह बोला भाई मानतीं थी। उस सन्देश के लिफ़ाफ़े में कोई संदेश नही था बस थी एक राखी। राजा मर्दन सिंह को एक मिनट भी नही लगा ये सोचनें में कि मेरी बहन को मेरी आवश्यकता है।

राजा मर्दन सिंह ने ना आओ देखा ना ताओ बस आदेश दे दिया कि सेना को तुरंत तैयार करो और बहन से मिलने जाना है, तैयारियों में कोई कमी नही आनी। पूरे गाँव को पता चल गया कि उनकें राजा बहन से मिलने जा रहे है, लेकिन रानी अभी भी बेख़बर थी।

king mardan singh
राजा मर्दन सिंह

जैसे ही रानी को पता चला की राजा साहब जा रहें है, वो तुरंत दियों का थाल लेकर राजा का राज तिलक करनें पहुंची और राजा बिना कुछ कहे वहाँ से निकल गये बहन से मिलने। रानी भी जानती थी कि राजा साहब से वापस आने की पूछना बेमानी है क्योकिं हो सकता है कि अब उनकें शौहर कभी वापस ही नही आये।

क्या थी असल वजह

बात उन दिनों की है जब रानी झांसी अपना राज्य बचानें के लिए अंग्रेजो के खिलाफ़ लड़ रहीं थी और ऐसें में रानी झांसी को मदद की सख्त ज़रूरत थी। एक ज़माने में रानी झांसी को बानपुर के राजा मर्दन सिंह को मुंह बोला भाई बनाया था, राजा मर्दन सिंह झांसी के पड़ोसी राज्य के राजा ही थे। इसके साथ उस वक़्त राजा मर्दन सिंह ने वादा किया रानी झांसी से कि जब भी बहन को ज़रूरत होगी वे तुरंत रानी की मदद को पहुचेगें।

raani jhansi
रानी झाँसी

बस फिर क्या था, आज मतलब दिवाली के एक दिन बाद और भाई दूज के एक दिन पहले रानी झांसी का सन्देश मिलते ही राजा मर्दन सिंह निकल पड़े अपनी बहन के लिए अपना सब कुछ त्याग कर। शायाद हमारें इतिहास में ऐसी ही कई वजह रहीं होंगीं जो इस भाई दूज के त्यौहार को आधार दे रहीं होंगी। इसीलिए ये त्यौहार न सिर्फ् हमारी संस्कृति का आधार है बल्क़ि भाई बहन के रिश्तों की डोर का भी एक अहम् पहलू भी है।

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