नटराज के रूप में भगवान शिव की नृत्य की पावन कथा जानें

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भगवान शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है

भगवान शिव के तांडव के दो स्वरूप है। पहला उनके क्रोध का परिचायक, प्रलंयकारी रौद्र तांडव तथा दूसरा आनंद-प्रदान करने वाला आनंद तांडव। ज़्यादातर लोग तांडव शब्द का अर्थ शिव के क्रोध का स्वरूप मानते है। रौद्र तांडव करने वाले शिव रुद्र,आनंद तांडव करने वाले शिव नटराज कहलाए जाते है। प्राचीन आचार्यों के मतानुसार शिव के आनन्द तांडव से ही सृष्टि अस्तित्व में आती है तथा उनके रौद्र तांडव में सृष्टि का विनाश हो जाता है।

भगवान शिव के अद्भुत तांडव नृत्य की पवित्र कथा में ‘नटराज’ भगवान शिव के तांडव-नृत्य में सम्मिलित होने के लिए सभी देवगण कैलाश पर्वत पर उपस्थित हुए। जगत जननी माता गौरी वहाॅं दिव्य रत्नसिंहासन पर विराजमान होकर तांडव का आयोजन कराने के लिए उपस्थित थी। देवर्षि नारद भी उस नृत्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोकों का परिभ्रमण करते हुए वहाॅं आ पहुॅंचे थे। थोड़ी देर में भगवान शिव ने भाव-विभोर होकर तांडव-नृत्य का प्रारंभ कर दिया। समस्त देवगण और देवियाॅं भी उस नृत्य में सहयोगी बनकर विभिन्न प्रकार के वाद्य बजाने लगे। वीणावादिनी माॅं सरस्वती वीणा-वादन करने लगी, विष्णु भगवान मृदंग बजाने लगे, देवराज इंद्र बंशी बजाने लगे, ब्रह्माजी हाथ से ताल देने लगे और लक्ष्मी जी गायन करने लगी। अन्य देवगण, गंधर्व, किन्नर, यक्ष, उरग, पन्नग, सिद्ध, अप्सराएं, विद्याधर आदि भाव-विभोर होकर भगवान शिव के आगे नदमस्तक हो गए। भगवान शिव ने उस प्रदोष काल में उन समस्त दिव्य विभूतियों के समक्ष अत्यंत अद्भुत, लोक-विस्मयकारी तांडव-नृत्य का प्रदर्शन किया।

भगवान शिव की ऐसी मुद्रा को देखकर सभी के मन और नेत्र दोनों एकदम अचंचल हो उठे। सभी ने नटराज भगवान शंकर जी के उस नृत्य की सराहना की। भगवती महाकाली तो उन पर अत्यंत ही प्रसन्न हो उठी। उन्होंने शिवजी से कहा- ‘भगवन! आज आपके इस नृत्य से मुझे बड़ा आनंद प्राप्त हुआ, मैं चाहती हूॅं कि आप आज मुझसे कोई वरदान माॅंगे’। उनकी बातें सुनकर भगवान शिव ने कहा- ‘हे देवी ! इस तांडव-नृत्य के जिस आनंद से आप, देवगण तथा अन्य दिव्य योनियों के प्राणी आनंदमय हो रहे हैं, उस आनंद से पृथ्वी के सारे प्राणी वंचित रह जाते हैं। हमारे भक्तों को भी यह सुख प्राप्त नहीं हो पाता। अतः आप ऐसा कुछ करिए कि पृथ्वी के समस्त प्राणियों को भी इसका दर्शन प्राप्त हो सके और आनंद अनुभव कर सके।

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