अहोई अष्टमी व्रत 2017 कथा, और पूजन विधि

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AHOI ASHTMI 2017
अहोई माता

करवाचौथ के ठीक चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। यह व्रत महिलायें अपनी संतान के लिये करती हैं तथा पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिन भर उपवास रखती हैं और सायंकाल तारे दिखाई देने के समय होई का पूजन किया जाता है। तारों को करवा से अर्घ्य भी दिया जाता है, अहोई अष्टमी को आठें भी कहते हैं। इस बार यह व्रत 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

अहोई अष्टमी व्रत की कथा

अहोई अष्टमी काफी खास व्रत है इस व्रत को करने से पारिवारिक सुख प्राप्त‍ि और संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है।इस पूजा के पीछे एक प्राचीन कथा है दीवाली पर घर को लीपने के लिए एक साहुकार की सात बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई और साथ में उनकी ननद भी चली आई, साहुकार की बेटी जिस जगह मिट्टी खोद रही थी। उसी जगह स्याहु अपने बच्चों के साथ रहती थी, मिट्टी खोदते वक्त लड़की की खुरपी से स्याहु के एक बच्चे की मृत्यु हो गयी। इसके बाद साहुकार की लड़की के जब भी बच्चे होते थे, वो सात दिन के अंदर मर जाते थे और एक-एक कर सात बच्चों की मौत के बाद लड़की ने जब पंडित को बुलाया और इसका कारण पूछा लड़की को पता चला कि अनजाने में जो उससे पाप हुआ, उसका ये नतीजा है। पंडित ने लड़की से अहोई माता की पूजा करने को कहा, इसके बाद कार्तिक कृष्ण की अष्टमी तिथि के दिन उसने माता का व्रत रखा और पूजा की बाद में माता अहोई ने सभी मृत संतानों को जीवित कर दिया।

अहोई अष्टमी के व्रत की विधि
सुबह उठकर स्नान कर निर्जला व्रत करें, सूरज ढलने के बाद अहोई पूजा की जाती है पूजा के दौरान अहोई कलेंडर और करवा लेकर पूजा करें,कथा सुननें के बाद अहोई की माला दिवाली तक पहननी चाहिए। उसमें 8 कोष्ठक वाली एक पुतली बनाती हैं कुछ जगहों पर दीपावली के पूजन के लिए कुछ प्रतिमाएं भी बनाई जाती हैं। इसकी पूजा का विधि-विधान भी खास होता है। इसमें एक खास बात यह भी है कि पूजा के लिए माताएं चांदी की एक अहोई भी बनाती हैं, जिसे बोलचाल की भाषा में स्याऊ भी कहते हैं। उसमें चांदी के दो मोती डालकर विशेष पूजन किया जाता है, जिस प्रकार गले में पहनने के हार में पैंडिल लगा होता है उसी प्रकार चांदी की अहोई डलवानी चाहिए और डोरे में चांदी के दाने पिरोने चाहिए फिर अहोई को रोली, चावल, दूध व भात से पूजा करें। जल से भरे लोटे पर सातिया बना लें, एक कटोरी में हलवा तथा रुपये का बायना निकालकर रख दें और सात दाने गेहूं के लेकर अहोई माता की कथा सुनने के बाद अहोई की माला गले में पहन लें। जो बायना निकाल कर रखा है उसे सास के चरण छूकर उन्हें दे दें, इसके बाद चंद्रमा को जल चढ़ाकर भोजन कर व्रत खोलें। इतना ही नहीं इस व्रत पर धारण की गई माला को दिवाली के बाद किसी शुभ अहोई को गले से उतारकर उसका गुड़ से भोग लगा और जल से छीटें देकर मस्तक झुका कर रख दें।

अहोई अष्टमी के व्रत का शुभ मुहूर्त

अहोई व्रत 2017 का शुभ मुहूर्त
सुबह: 6.14 से 7.28 बजे तक
शाम: 6.39 बजे से शुरूअहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि

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