भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने क्याें रखा था करवा चौथ का व्रत?

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भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने करवाचौथ का व्रत क्यों रखा

आज है अखंड सौभग्य का प्रतीक करवा चौथ का व्रत यह व्रत महिलायें अपने पति की लंबी उम्र के लिये रखती है, इस बार रविवार 8 अक्टूबर 2017 को करवा चौथ मनाया जा रहा है, हिंदू शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ का व्रत सुहागिनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना गया है, यह व्रत सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करती हैं, करवा चौथ का यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखकर रात में चांद दिखते ही अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं। करवाचौथ का व्रत ऐसा व्रत है जिसका वर्णन पौराणिक काल में भी हुआ है। आइये जानते है इस व्रत से जुडीं कुछ खास बातें और इसका महत्व

पौराणिक काल में करवाचौथ का व्रत
भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने करवाचौथ का व्रत रखा था, मान्यता है कि इसी करवाचौथ व्रत से पांडवों को महाभारत युद्ध में विजय मिली थी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को दिन भर निर्जल व्रत रखने के बाद, शाम को चंद्रमा को जल का अर्घ्य देने के साथ व्रत संपन्न होता है इस दिन सिर्फ चंद्रमा की ही पूजा नहीं होती. बल्कि करवाचौथ को शिव-पार्वती और स्वामी कार्तिकेय भी पूजा की जाती है। शैलपुत्री पार्वती ने भी शिव जी को इसी प्रकार के कठिन व्रत से पाया था।इस दिन गौरी पूजन से जहां महिलायें अखंड सुहाग की कामना करती हैं, वहीं अविवाहित कन्या , सुयोग्य वर पाने की प्रार्थना करती हैं, द्वापर युग में एक बार अर्जुन, वनवास के दौरान नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गये थे जब कई दिनों तक अर्जुन वापस नहीं आये, तो द्रौपदी को चिंता हुई, तब कृष्ण जी ने द्रौपदी से न सिर्फ करवाचौथ व्रत रखने को कहा बल्कि शिव द्वारा पार्वती जी को जो करवाचौथ व्रत की कथा सुनाई गई थी, उसे स्वयं द्रौपदी को सुनाया था।

मान्यता है कि जिन दंपत्तियों के बीच छोटी छोटी बात को लेकर अनबन रहती है, करवाचौथ व्रत से आपसी मनमुटाव दूर होता है। करवाचौथ में चंद्रमा की पूजा की जाती है, चंद्रमा मन का कारक है सारे रिश्ते नाते भी इसी मन की डोर से बंधे हैं पति के प्रति प्रेम की आत्मिक अभिव्यक्ति के लिए किया जाने वाला करवा चौथ का व्रत पिया की दीर्घायु के लिए किया जाता है, अन्न जल का त्याग कर व्रत रखकर, रात्रि समय में चांद को अर्ध्य देकर यह व्रत पूर्ण होता है।

पूजा की सामग्री
इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि छलनी में से चद्रमां यानि की अपने पति को देखना जो इस व्रत के उत्साह को बढ़ा देता है, चूंकि व्रत पति की लंबी उम्र के लिए है, इसलिए पूजन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। पूजन सामग्री की सूची जो इस व्रत व पूजन में उपयोग होती हैं, कुल मिलाकर ऐसी 34 चीजें हैं, जो इस व्रत की शुरूआत से लेकर व्रत खोलने तक प्रयोग में आती है।

KARVACHAUTH2017
करवाचौथ पूजा

चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, पान, कच्चा दूध, शकर, शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, कुंकुम, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शकर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे, कथा की पुस्तक।

करवा चौथ पूजन विधि
पूजा घर में दीवार आदि को साफ कर उस पर गेरू से फलक बनाकर चावल, हल्दी के घोल से करवा आदि बनाएं. करवा के चित्र में गेरू की स्याही से गणेश जी, पार्वती जी, शंकर एंव कार्तिकेय जी का चित्र बनाकर एक वटवृक्ष तथा मानव आकृति बनाकर उसके हाथ में चलनी भी बनाएं, उदित होते हुए का एक चित्र बनाए। तत्पश्चात पीली मिट्टी से गौरी प्रतिमा बनाकर उनकी गोद में गणेश जी बनाकर बिठाए जाते हैं, शाम को चंद्र उदय होने के बाद दोनों करवे चावल से भरे पात्र से ढककर उस पर सुपारी, नैवेद्य के रूप में चावल शक्कर से बने लड्डू, पूड़ी की आठ अठावरी तथा कोई ऋतुफल अर्पित किए जाएं. दाएं करवे को बाएं और बाएं करवे को दाई और स्थापित कर मंत्रों का प्रयोग करने के बाद पूजन करें।

करवा चौथ पूजन मंत्र
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’

करवा चौथ पूजा मूर्हूत 
करवा चौथ पूजा का समय 08 अक्टूबर 2017 को शाम 4:58 pm पर शुरू होगा और शाम को 7:09 pm पर करवा चौथ पूजा करने का समय खत्म होगा, इस बार महिलाओं के पास पूजा करने के लिए 8 अक्टूबर 2017 को 1 घंटे और 14 मिनट का समय है. चतुर्थ तिथि आठ अक्तूबर को चार बजकर 58 मिनट से शुरू होकर नौ अक्तूबर को चार बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी।

इस दिन सुहागिन नारी का अपने पति की दीर्घायु और हर प्रकार के सुख-ऐश्वर्य की कामना के साथ किया गया निर्जल व्रत। इस पर्व में दिनभर का उपवास करके, शाम को सुहागिनें करवा की कहानियां कहती-सुनती हैं, उसके पश्चात गौरा से सुहाग लेकर तथा उगते चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सुहाग की अटलता की कामना करती हैं। जब चंद्र को अर्घ्य दें तो यह मंत्र अवश्य बोलें।
करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।

करवा चौथ 2017 -चन्द्र पूजा
करवा चौथ पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं, इस दिन महिलाएं बिना चंद्रमा के पूजा संपन्न कर अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं, मान्यता यह है कि चंद्र देखे बिना व्रत अधूरा रहता है, जबतक चंद्रमा की पूजा ना की जाए महिला न कुछ भी खा सकती हैं और न पानी पी सकती हैं. चंद्रमा की पूजा के दौरान महिलाओं को एक घेरा बनाकर बैठती हैं और फिर एक महिला 7 बार फेरी लगाकर एक-दूसरे से थाली बदलती हैं। इस फेरी के दौरान गीत गाएं जाते हैं, महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना करती जाती हैं और थाली को 7 बार फेरती जाती हैं।

करवा चौथ का त्योहार देशभर में मनाया जाता है, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय को मनाया जाता है, करवाचौथ हिंदू कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा के चौथे दिन पड़ता है> इस दिन शादीशुदा महिला अपनी पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन अपने पति के कल्याण और स्वस्थ्य जीवन के लिए भगवान गणेश से अर्चना करते हैं, देश में कहीं कहीं शादी से पहले भी व्रत करने की प्रथा होती है. अविवाहित कन्या, सुयोग्य वर पाने के लिए व्रत करती हैं।

करवा चौथ पर न करें ये काम
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार वैसे तो हर जगह के अनुसार करवा चौथ की पूजन विधि अलग-अलग होती है, इस व्रत को रखने से एक दिन पहले महिलाएं हाथों में मेंहदी रचाती हैं। ज्यादातर महिलाएं अपने घर की परंपराओं और रीति रिवाजों के अनुसार पूजा करती हैं और कहानी सुनती हैं। इस व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है, करवा चौथ की भी अपनी एक कहानी है जिसे स्त्रियां कथा के रूप में व्रत के दिन सुनती हैं। सुहागिनों को इस दिन खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए कि सुहाग सामग्री यानि चूड़ी, लहठी, ब‌िंदी, स‌िंदूर को कचड़े में बिल्कुल ना फेंके। इतना ही नहीं अगर चूड़ी पहनते वक्त टूट भी जाए तो उसे संभालकर पूजा स्थान पर रख दें करवा चौथ का व्रत रखने वाली सुहागिनों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि आज के दिन स‌िलाई, कटाई, बुनाई के ल‌िए कैंची, सुई, चाकू का इस्तेमाल न करें।

करवा चौथ पर्व की सभी सुहागिनों को हार्दिक शुभ कामनायें।

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