नवरात्रि की पौराणिक कथाएँ , जानें उन कथाओं के बारे में

0
303
navratri mythology
नवरात्रि की पौराणिक कथाएँ

पहली कथा

शारदीय नवरात्रों की शुरूआत राम जी ने शुरू की थी। रावण से युद्ध करके लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए माँ का आर्शिवाद प्राप्त करना आवश्यक था क्योंकि बिना माँ के आशीर्वाद के लंका पर विजय प्राप्त करना असम्भव था। लंकायुद्ध के लिए ब्रह्मा जी ने श्री राम को चंडी पूजा करके  माँ को प्रसन्न के लिए कहा। साथ ही बताया कि इस चंडी पूजन और हवन के लिए 108 नीलकमल माँ को अर्पण करना होगा। जिससे माँ प्रसन्न होकर विजय का आशीर्वाद देगी। वहीं दूसरी तरफ़ रावण ने भी अमरत्व और विजय प्राप्त के लिए चंडी का पाठ शुरू किया।

navratri mythology ram ji
राम जी ने लंका-युद्ध पर विजय प्राप्त करने के लिए माँ की पूजा की

राम ने चंडी पूजा शुरू किया उसी दौरान हवन सामग्री से एक नीलकमल गायब हो गया। रावण ने अपनी मायावी शक्ति से उस नीलकमल को गायब किया जिससे राम जी का संकल्प टूट जाए और उन्हें विजय का आशीर्वाद प्राप्त ना हो। राम जी को अपना संकल्प टूटता नज़र आ रहा था और इस बात का भय था कि माँ रूष्ट ना हो जाए। एक नीलकमल की व्यवस्था करना वो भी तत्काल असम्भव था। तब भगवान राम जी को तुरंत स्मरण हुआ कि मुझे लोग कमलनयन कहते हैं तो क्यों ना संकल्प पूरा करने के लिए एक नयन माँ के चरणों में अर्पित कर दिया जाए। तभी प्रभु श्री राम ने अपने तरकश से एक तीर निकालकर अपने नेत्र को निकालने के लिए तैयार हुए तभी माँ वहां प्रकट हुई और राम जी का हाथ पकड़ कर कहा कि राम मैं प्रसन्न हुई और तुम्हें विजय का आशीर्वाद देती हूँ।

दूसरी कथा

रावण ने चंडी पाठ यज्ञ के लिए ब्राह्मणों को बुलाया। उस यज्ञ में हनुमान जी ने भी बाल ब्राह्मण रूप को धारण कर ब्राह्मणों की सेवा में जुट गए। ब्राह्मणों ने देखा कि नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर रहे थे तो ब्राह्मणों ने हनुमान से वर माँगने को कहा।

navratri mythology ravana
रावण की चंडी यज्ञ की दिशा एक शब्द से बदल गई

हनुमान जी ने इस पर विनम्रता से कहा कि प्रभु आप लोग प्रसन्न हैं तो, मेरे कहने से आप जिस मंत्र का यज्ञ कर रहे है आप उसका एक अक्षर बदल दें। ब्राह्मण उनके रहस्यमय को समझ नहीं पाए लेकिन इसके बावजूद ब्राह्मणों ने उन्हें तथास्तु कह दिया। हनुमान ने कहा  कि मंत्र में जयादेवीभूर्तिहरिणी में के स्थान पर उच्चारण करें। यह मेरी इच्छा है।

भूर्तिहरिणीका मतलब कि प्राणियों की पीड़ा को दूर करने वाली और करिणीका अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित देने वाला जिसे माँ रूष्ट हो गई। हनुमान ने श्लोक में के बदले करवा दिया जिससे रावण की यज्ञ की दिशा बदल गई और उसका सर्वनाश हो गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here