आख़िर पितृपक्ष में क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ कार्य ?

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pitra paksh
पितृपक्ष में नहीं किए जाते हैं शुभ कार्य

पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुके हैं और इस बार यह 14 दिनों का ही हैं। माना जाता हैं कि हमारे पूर्वज एवम पितृ धरती पर आते हैं और हमें देखते हैं साथ ही आर्शिवाद भी देते हैं।

इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करनी चाहिए-

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पितृपक्ष काल को शुभ नहीं माना जाता हैं। इसीलिए इस दौरान में कोई भी शुभ कार्य नहीं करनी चाहिए जैसे कि शादी, घर की खरीदारी, शादी की खरीदारी आदि ठीक उसी प्रकार जब घर में किसी की मृत्यु हो जाती हैं तो घर में एक खास अवधी तक कोई भी शुभ कार्य नहीं कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार-

धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि इन दिनों पितृ हमसे आत्मिक रूप से जुड़े होते हैं। इन दिनों जो भी पूजा विधि होती है, उन के जरिए हमें उनसे आर्शिवाद लेना चाहिए। पितृपक्ष के दौरान अपनी आदतों और शौकों को थोड़ा नियंत्रण में रखे। पितृपक्ष काल में पितरों को खुश करना चाहिए। ऐसा माना जाता हैं कि इस अवधि में शुभ कार्य से मन हटाकर अपने पितरों से जुड़ा हुआ महसूस करना चाहिए।

कहा जाता हैं कि पितृपक्ष में पितृगण, पितृलोक से धरती पर आते हैं। इन दिनों में पितृलोक में जल का अभाव हो जाता हैं। इसलिए पितृपक्ष में पितृलोक से भूलोक आ जाते हैं और अपने वंशसों से तर्पण करा कर तृप्त हो जाते हैं। इसलिए जब कोई व्यक्ति कर्ज़ में होता हैं तो वह खुशी मनाकर मंगल कार्य कैसे कर सकता हैं ? पितृऋण के कारण ही पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता हैं।

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