शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा क्यों मनाते हैं ?

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शारदीय नवरात्रि बड़े धूम- धाम से मनाया जाता है।

हिंदू त्यौहारों में से नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। लोग नवरात्रि को बड़े धूमधाम के साथ श्रद्धा भाव से मनाते हैं। नवरात्रि में माँ दुर्गा  के नौ रूपों को पूजते है और हर दिन अलगअलग तरीकों से पूजते हैं। नवरात्रि भारत के विभिन्न राज्यों में  धूमधाम और अलग ढंग से मनाया जाता हैं। गुजरात में इस पर्व को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है और यहाँ नवरात्रि में लोग माता को प्रसन्न करने के लिए डांडिया और गरबा खेलते है। पश्चिम बंगाल के मुख्य त्यौहारों में से दूर्गा पूजा सबसे महत्वपूर्ण पर्व है और इस पर्व को बड़े प्रेम भाव से मनाते हैं।

नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है। पहला चैत्र मास में, जिसे हम चैत्र नवरात्र कहते हैं और दूसरा आश्विन मास में, जिसे शारदीय नवरात्र‍ि कहते हैं। नवरात्रि के दिनों में नौ दिनों तक माँ  दुर्गा के नौ अलगअलग स्वरूपों की पूजा होती है। आश्विन मास में मनाए जाने वाले नवरात्रों में दसवें दिन विजयदशमी यानी ‘दशहरा’ त्‍यौहार के रूप में मनाया जाता है।

कभी आपने सोचा है कि नवरात्री के दसवें दिन दशहरा क्यों मनाया जाता हैं?

ऐसा माना जाता है कि शारदीय नवरात्रों की शुरूआत भगवान राम ने की थी। भगवान राम ने सबसे पहले समुद्र के किनारे शारदीय नवरात्रों पूजा की शुरुआत की। राम जी ने लगातार 9 दिनों तक शक्त‍ि की पूजा की थी। माँ दुर्गा ने राम की पूजा से प्रसन्न होकर उन्हे विजय प्राप्ती का आर्शिवाद दिया और तब जाकर उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की थी।

यही वजह है कि शारदीय नवरात्री में नौ दिनों तक दुर्गा माँ की पूजा के बाद दसवें दिन में ‘दशहरा’ मनाया जाता है। तभी से हर साल शारदीय नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। माना जाता है कि अधर्म पर धर्म की जीत, असत्‍य पर सत्‍य की जीत के लिए 10वें दिन दशहरा मनाते हैं।

 

 

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