श्राद्ध में किन- किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

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Shraaddha Hindu religion
श्राद्ध में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

श्राद्ध प्रत्येक वर्ष अश्विन मास के कृष्णपक्ष में आता हैं। श्राद्ध का अर्थ हैं जो कुछ श्रद्धा से दिया जाए। जिसे पाकर पितर खुश होते हैं। यह पंद्रह दिनों का होता हैं और इन दिनों में अपने पितरों को रोज जल तर्पण किया जाता हैं। इन पितृ पक्ष में कई बातों का ध्यान रखाना चाहिए। पितृ पक्ष में चांदी का बर्तन का प्रयोग शुभ माना गया हैं और बताया जाता हैं कि इसे राक्षसों का भी नाश होता हैं। पिण्ड और भोजन चांदी के बर्तन में ही निकालना चाहिए।

श्राद्ध कर्म में गाय से बनी चीजें बहुत शुभ मानी जाती हैं जैसे कि दूध, दही और घी से बनी चीजें श्राद्ध कर्म में प्रयोग की जाती हैं साथ ही यह आवश्यक भी होती हैं। श्राद्ध के वक़्त खाली जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। अगर आपको जमीन पर बैठना हैं तो कंबल, ऊन, रेशमी, कुश आदि के आसन पर बैठ कर श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन परोसते वक़्त दोनों हाथों का प्रयोग करना चाहिए। मान्यता हैं कि एक हाथ से पकड़ा हुआ अन्न पात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन कर ले जाते हैं।

श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराते वक़्त यह नहीं पुछना चाहिए कि पकवान कैसा बना हैं। माना जाता हैं कि ब्राह्मण जब तक मौन होते हैं तब तक पितर भोजन को ग्रहण करते हैं। श्राद्ध के समय यदि कोई भिखारी या अन्य आपके घर आता हैं तो उसे वापस ना लौटाए उसे रोक कर सभी पकवान खिलाएं।

श्राद्ध में गाय, देवताओं, कुत्ते, कौए और चिंटी के लिए पकवान में से पांच भाग निकाले। माना जाता हैं कि इनके जरिए पितरों को भोजन प्राप्त होता हैं। श्राद्ध में केले के पत्ते पर भोजन ना निकाले। इसके बदले सोना, चांदी, कांसे, ताबे के पात्र उत्तम माने जाते हैं। अगर यह पात्र नहीं हैं तो आप पत्तल में निकाल सकते हैं। श्राद्ध में देवताओं का भोजन चिंटी और गाय को खिला सकते हैं।

श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद पूरे सम्मान के साथ विदा करने दरवाजे तक आना चाहिए। माना जाता हैं कि ब्राह्मण के साथसाथ पितर भी चलते हैं।

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