जानिए क्यों करते है, भगवान देवशिल्पी की पूजा….

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Special For Visvkarma Jayanti
भगवान विश्वकर्मा। इन्हे हिन्दू धर्म में निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है।

हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमे 33 करोड़ देवी देवता है,इन्ही देवताओं में से एक है भगवान विश्वकर्मा, इन्हे हिन्दू धर्म में निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है। विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है।

कब मनाई जाती है जयंती-

विश्वकर्मा भगवान की पूजा कन्या संक्रांति के दिन की जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इसलिए इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते है। इस साल विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2017 को रविवार के दिन मनाई जाएगी। हमारे देश में विश्वकर्मा जयंती खूब धूमधाम से मनाई जाती है। कई लोग भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विश्वकर्मा पूजा करते हैं तो कुछ लोग इसे दीपावली के अगले दिन मनाते हैं।

कौन है विश्वकर्मा-

भगवान विश्वकर्मा को ही देव शिल्पी के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है की विश्वकर्मा ने ही रावण की सोने की लंका से लेकर भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी भी इन्होने ने बनाई थी। जब भगवान शिव को माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करवाना था तो इसके लिए भगवान शिवजी ने विश्वकर्मा को कहा तभी विश्वकर्मा जी ने इस महल का निर्माण किया। महाभारत में पाँडव जहाँ रहा करते थे उस जगह को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था,उसका भी भगवान विश्वकर्मा ने ही निर्माण किया था। कौरव के हस्तिनापुर भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाई थी। पुष्पक विमान का निर्माण,कर्ण का कुण्डल, विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, शंकर भगवान का त्रिशुल और यमराज का कालदंड आदि वस्तुओं का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया है।

क्यों की जाती है विश्वकर्मा की पूजा

भगवान विश्वकर्मा के आविष्कार एवं निर्माण कार्यो के सन्दर्भ में इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी आदि का निर्माण इनके द्वारा ही किया गया है। विश्‍वकर्मा पूजन का दिन उन्‍ही को समर्पित है इसलिए इस दिन देश के विभिन्न राज्यों में ख़ासकर औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, लोहे की दुकान, वाहन शोरूम, सर्विस सेंटर आदि में पूजा होती है। इस मौके पर मशीनों, औज़ारो की सफाई एवं रंगरोगन किया जाता है।

इस दिन ज़्यादातर कारखाने बंद रहते हैं। हमारे देश में विश्वकर्मा जयंती खूब धूमधाम से मनाई जाती है। इस मौके पर मशीनों, औजारों की सफाई एवं रंगरोगन किया जाता है। राष्ट्रीय हित के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त 00:54 है

विश्वकर्मा पूजा की विधि-

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए व्यक्ति को प्रातः स्नान करने के बाद अपनी पत्नी के साथ पूजा करनी चाहिए। पत्नी के साथ यज्ञ के लिए पूजा स्थान पर बैठें और हाथ में फूल, अक्षत लेकर भगवान विश्वकर्मा का नाम लेते हुए घर में अक्षत छिड़कना चाहिए।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते समय दीप, धूप, पुष्प, गंध, सुपारी आदि सामग्री का प्रयोग करना चाहिए। पूजा स्थान पर कलश में जल तथा विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। विश्वकर्मा प्रतिमा पर फूल चढ़ाने के बाद सभी औज़ारो को तिलक लगा कर पूजा करनी चाहिए। अंत में हवन कर सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए।

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