अयोध्या मुद्दा सुलझाने के लिए की गई यह अनोखी पहल  

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अयोध्या मुद्दा सुलझाने की पहल

1992 से विवादों में रहा अयोध्या मुद्दें को अब एक और अनोखी पहल से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल किसी और के द्वारा नही बल्कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों तथा  शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद द्वारा की जा रही है।

कल शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने जानकी घाट के महंत जन्मेजय शरण समेत करीब 150 साधू संतों से मुलाकात की तथा कहा कि हम सभी को आपस में बैठ कर इस मुद्दे का हल निकालना चाहियें कोर्ट में तो हम सभी एक दूसरें के विरोधी है पर यहाँ हमें एक पक्ष में रहकर सोचना होगा कि किस तरह इस विवादित मुद्दे को सुलझाए कि दोनों धर्मो के रीति रिवाजों पर किसी भी तरह का प्रश्न चिन्ह न लगे। उन्होंने आगे बड़ते हुए कहा कि अयोध्या में तो हिंदू मुस्लिम मोहब्बत की बड़ी मिसाल रही है। यहां के मंदिरों में मुस्लिम आज भी पूजा के सामान की दुकान चलाते हैं।

शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने सुझाव दिया कि हम इस पवित्र स्थान पर मंदिर और मस्जिद दोनों ही बना लेंगे साथ ही उन्होनें कहा कि 1992 में भी यहां बाहरी लोगों ने दंगे किए लेकिन अयोध्या के हिंदुओं ने यहां के मुसलमानों की हिफाजत की। हमें अयोध्या की मोहब्बत की उस रवायत को आगे बढ़ाना है।

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शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद

वही दूसरी ओर रामजन्म भूमि मंदिर के पुजारी सत्येंद्र दास और जानकी घाट के महंत जन्मेजय शरण ने मौलाना कल्बे जव्वाद के प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि अयोध्या के साधू संत इसमें खुले दिल से सहयोग करेंगे।

हाल ही में देखा गया है कि मुस्लिम वर्ग के साथ ही हिन्दू भी अब इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहते है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने पिछले दिनों कहा कि  अगर मुसलमान सुप्रीम कोर्ट से मस्जिद के हक में मुकदमा जीत भी जाएं तो भी उस जमीन को राम मंदिर बनाने के लिए दे दें। इस तरह आप एक प्लॉट हार जाएंगे लेकिन करोड़ों दिल जीत  लेंगे.’ बता दे कि पिछले कुछ वक्त से मुसलमानों का एक तबका अयोध्या में झगड़े वाली जगह पर मस्जिद का दावा छोड़ देने की अपील कर रहा है।

बता दे कि राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले में देश की सर्वोच्चय अदालत ने भी दोनों पक्षों से कहा है कि वे इस मामले को आपसी बातचीत से ही सुलझाएं। सुप्रीम कोर्ट भी चाहती है कि इस संवेदनशील मामले को अदालत द्वारा नही बल्कि आपस में आम सहमति से हल किया जाए क्योकि ऐसे अदालती आदेशों से लोगो पर किसी एक धर्म को थोपा नही जा सकता। ऐसा करना हमारे देश के सिधांतो के ही विपरीत होगा। इसी कारण राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर बड़े फैसलों क लेने से सुप्रीम कोर्ट के जज हमेशा से ही बचते रहे है क्योकि ऐसे आदेशों से हमेशा ही बड़े दंगे होने का अंदेशा बना रहता है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना “मुस्लिम पर्सनल लॉ” यानी भारत में शरीयत अनुप्रयोग अधिनियम, सुरक्षा और अधिकारों के लिए की गई थी। जो आज भी मौजूद है।

 

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