दीवाली पर जलायें केवल दिये, सुप्रीम कोर्ट ने बैन किये पटाखे जानिये पटाखों से होने वाले नुकसान

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इस बार दीवाली बिना पटाखों की

दीवाली का त्यौहार एकदम करीब और लोग इसकी तैयारी में जुट गये हैं दीवाली में गणेश-लक्ष्मी पूजन तो इस त्यौहार की विशेषता है और पटाखों बिना दीवाली अधूरी है। लेकिन यह पटाखें हमारे लिये बहुत हानिकारक हैं हर साल दीवाली पर ना जाने कितने लोगों की जान केवल पटाखों की वजह से चली जाती है। और अगर हमारें वातावरण और पर्यावरण की बात करें तो दीवाली पर पटाखों की वजह से वातावरण बहुत ही प्रदूषित हो जाता है।

इस बार पटाखों की बिक्री पर रोक

इन्हीं सब बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक बरकरार रखने के बाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिहायशी इलाके में पटाखे बेचने पर रोक लगा दी है अदालत ने प्रशासन को आदेश दिया है कि वो रिहायशी इलाके में पटाखे बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के ये आदेश दीवाली से पहले आये हैं और इस बार दीवाली 19 अक्टूबर को मनाई जायेगी, सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ यह भी आदेश दिये हैं कि पटाखों की बिक्री पर 31 अक्टूबर तक रोक रहेगी, इस फैसले का प्रमुख कारण यह है कि सुप्रीम कोर्ट देखना चाहता है कि पटाखों के कारण प्रदूषण पर कितना असर पड़ता है।

पटाखों पर पाबंदी लगाने की मांग

पटाखों पर पाबंदी को लेकर बहुत से लोग जागरुक भी रहते हैं, वहीं पिछले साल भी कुछ बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट में पटाखा बैन को लेकर अर्जी डाली थी, सुप्रीम कोर्ट में तीन बच्चों की ओर से दाखिल एक याचिका में दशहरे और दीवाली पर पटाखे जलाने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी। बच्चों की तरफ से इस तरह की पहल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत उनका पक्ष लेते हुये इस अनूठी याचिका को दाखिल किया और खास बात यह है कि याचिका दाखिल करने वाले इन बच्चों की उम्र महज छह से 14 महीने के बीच थी। सबसे चौकानें वाली बात यह है कि दीवाली को लेकर बच्चे सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं और बच्चों ही पटाखे सबसे ज्यादा जलाते हैं। लेकिन यह पहला मामला है, जब ऐसा हुआ है कि बच्चे पटाखा बिक्री पर बैन लगाने के लिए कोर्ट के दरवाजे पर जा पहुंचे।

सर्वोच्च न्यायालय ने उठाया कदम

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पटाखों की बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने वाले नवंबर 2016 के आदेश को बरकार रखते हुए यह फैसला सुनाया, न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले को बरकरार रखते हुए कहा, ‘हमें कम से कम एक दीवाली पर पटाखे मुक्त त्यौहार मनाकर देखना चाहिए.’ अदालत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध हटाने का 12 सितंबर 2017 का आदेश एक नवंबर से दोबारा लागू होगा यानी एक नवंबर से दोबारा पटाखे बिक सकेंगे।

पटाखों से भंयकार प्रदूषण और नुकसान

पटाखें जहां एक तरफ कुछ लोगों को खुशी का एहसास कराते हैं वहीं कुछ लोगों के लिये जानलेवा बन जाते हैं, खासतौर से दमा व हृदय रोग से पीड़ित लोगों को पटाखों के शोर से बेहद परेशानी होती हैं, लेकिन कुछ लोग मनाते ही नहीं वह पटाखों पर इतने रुपये फूंक देते हैं और उसका नतीजा बहुत ही खतरनाक होता है वहीं वातावरण में धूल व धुएं के रूप में अति सूक्ष्म पदार्थ मुक्त तत्वों का हिस्सा कई दिनों तक मिश्रित रहता है, जिससे आम आदमी का स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों की सेहत बिगड़ने का खतरा रहा है। इसका व्यास 10 माइक्रो मीटर तक होता है। यह नाक के छेद में आसानी से प्रवेश कर जाता है। जो श्वसन प्रणाली, हृदय व फेफड़ों को प्रभावित करता है। पटाखे ध्वनि प्रदूषण भी करते हैं व लोगों के अलावा पशु, पक्षियों, जलजनित जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं।

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पटाखों से निकलता धुआं

कौन-कौन से दिक्कतें होती हैं पटाखों की वजह से

दीपावली आते ही हल्की ठंड होने लगती है और ऐसे मौसम में कई बार धुंध भी पड़ती है। पटाखों का धुआं इससे नीचे ही रह जाता है। इस धुएं व धुंध मे मिश्रण के कारण कई बीमारियां पैदा होती हैं। शारीरिक परिवर्तन से लेकर सांस फूलना, घबराहट, खांसी, हृदय व फेफड़े संबंधी दिक्कतें, आंखों में संक्रमण, दमा का दौरा, रक्त चाप, गले में संक्रमण हो जाता है। वायु प्रदूषित होने से दिल का दौरा, दमा, एलर्जी, व निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पटाखों की आवाज से कान का पर्दा फटने व दिल का दौरा पड़ने की भी संभावना बनी रहती है। इसके अलावा पटाखों से जलने, आंखों की क्षति, अनिद्रा की स्थिति भी बनी रहती है।

दस गुणा बढ़ जाता है प्रदूषण
दीपावली के मौसम में पटाखों के कारण वायु प्रदूषण छह से दस गुणा बढ़ जाता है। आवाज का स्तर 15 डेसीबल तक बढ़ जाता है सबसे ज्यादा इसका असर छोटे बच्चों व गर्भवती महिलाओं और मरीजों पर भी पड़ता है। पटाखों के शोर धुयें की वजह से मासूम जीव-जन्तु भी काफी प्रभावित होते हैं और उनको भी बहुत नुकसान पहुंचता है।

निकलती हैं कई जहरीली गैसें

पटाखों से कई प्रकार की खतरनाक गैस निकल कर वायुमंडल में घुल जाती हैं। कार्बन डाइ आक्साइड पर्यावरण के साथ साथ शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। ग्लोबल वार्मिंग को भी यह गैस प्रभावित करती है। कार्बन मोनोआक्साइड जहरीली, गंधहीन गैस भी पटाखों से निकलती है, जो हृदय की मांस पेशियों को नुकसान पहुंचाती है। सल्फर डाइआक्साइडकार्बन मोनोआक्साइड जहरीली, गंधहीन गैस भी पटाखों से निकलती है, जो हृदय की मांस पेशियों को नुकसान पहुंचाती है। सल्फर डाइआक्साइड ब्रोकाइटिस जैसी सांस की बीमारी पैदा करती है। इससे कफ व गले की बीमारियां पैदा होती हैं। नाइट्रेट कैंसर जैसी बीमारियां, हाइड्रोजन सल्फाइड मस्तिष्क व दिल को नुकसान व बेरियम आक्साइड आंखों व त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। क्रोमियम गैस सांस की नली में व त्वचा में परेशानी पैदा करती है तथा जीव जंतुओं को नुकसान करती है।

दीवाली रोशनी और खुशियों का त्यौहार है जितना हम पटाखों पर पैसा लगाते हैं उतना अगर हम किसी गरीब व्यक्ति की दीवाली मनाने में मदद कर दें तो शायद उसके घर में भी दीवाली पर दिया जल जायेगा इसलिये दीवाली पर दियें जलाये अपने घर-आगंन और आस-पडोस जहां अधेरा हो, मिठाई बांटे, बंधाइया दे क्योंकि पटाखों से केवल प्रदूषण, हानि और मासूम जीव-जन्तु को ही नुकसान पहुंचेगा। तो हो सके यह दीवाली बिना पटाखों के खुशी-खुशी मनायी जायें।

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