क्या सबसे ज़्यादा आधुनिक गुलामी भारत में है? आई.एल.ओ रिपोर्ट में उलझा भारत

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FORCED LABOUR
आधुनिक गुलामी रिपोर्ट

इंटरनेशनल श्रम संगठन (आइएलओ) “द वॉक फ्री फाउंडेशन” और “इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन” (आइओएम) द्वारा संयुक्त रूप से किए गए सर्वे द्वारा दुनियाभर में आधुनिक गुलामी और बाल श्रम रिपोर्ट आधुनिक गुलामी’ (Global Estimates of Modern Slavery: Forced Labour and Forced Marriage 2017) को प्रकाशित की गई है।

  1. संयुक्त राष्ट्र में जारी आधुनिक गुलामी की वैश्विक सीमा पर एक नयी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 तक विश्व में कुल 3 मिलियन लोग गुलामी कर रहे हैं और इनमें से 71 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां हैं।
  2. रिपोर्ट में आधुनिक दासता की अवधारणा को चार श्रेणियों में बांटा गया है:-
    • जबरन श्रम,
    • मजबूर विवाह,
    • मजबूर यौन शोषण और
    • राज्य द्वारा मजबूर श्रम राज्य-श्रमिक श्रम

      Slavery
      आधुनिक गुलामी और बाल श्रम रिपोर्ट
  3. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से पता चला है कि लगभग चार करोड़ लोग आधुनिक दासता में फंसे हुए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं, जबकि 15.20 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हैं।
  4. आधुनिक दासता में फंसे चार करोड़ लोगों में 2.9 करोड़ यानी 71 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां हैं। इसमें फंसे बच्चों की संख्या लगभग एक करोड़ है।
  5. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2016 में लगभग 5 करोड़ लोग बंधुआ मजदूर थे। इसमें से 1.6 करोड़ लोगों को निजी क्षेत्र में श्रम के नाम पर लगाकर उनका शोषण किया गया। इसमें घरेलू काम, निर्माण और कृषि शामिल है। लगभग 50 लाख लोगों का जबरन यौन शोषण किया गया और 40 लाख से ज्यादा को उनके देश के प्रशासन ने बंधुआ मजदूर बनाए रखा।
  6. 4 करोड़ लड़कियां और 8.8 करोड़ लड़कों सहित कुल 15.20 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं। यह आंकड़ा दुनिया भर के बच्चों का 10वां हिस्सा है। इसमें 7.21 करोड़ बच्चे अफ्रीका में रह रहे हैं। इसके बाद एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 6.2 करोड़ बच्चे बाल श्रम में जीने को मजबूर हैं। बाल श्रमिकों में 70 प्रतिशत से अधिक बच्चे कृषि में लगे हुए हैं, जबकि 17 फीसदी से ज्यादा सेवा क्षेत्र में और उद्योग में लगभग 12 फीसदी बच्चे काम कर रहे हैं।
  7. वॉक फ्री फाउंडेशन में आधुनिक दासता को समझने के लिए लिंग गतिशीलता को भी महत्व दिया गया जैसे कि महिलाओं का शोषण किस प्रकार से घरेलू कामों में किया जाता है तथा इनके साथ वाणिज्यिक व व्यावसायिक यौन शोषण भी होता है जबकि पुरुषों का शोषण मुख्य रूप से निर्माण, विनिर्माण, कृषि, मछली पकड़ने के क्षेत्र में होता है।
  8. 37 देशों ने स्लेवरी के खिलाफ इस अभियान में किया हस्ताक्षर किये।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सबसे ज़्यादा गुलाम और दास रहते हैं। इस रिपोर्ट पर भारत सरकार की एजेंसी ने विरोध जताया है और कहा है कि ये भारत को बदनाम करने कि कोशिश है। अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 40 मिलियन गुलाम हैं। जिसमें एशिया-पैसिफिक में 25 मिलियन हैं और जिनमें सबसे अधिक भारत में हैं। भारत में दासता की स्थिति के विषय में इससे जहाँ एक ओर वैश्विक स्तर पर भारत की छवि धूमिल होगी, वहीं दूसरी ओर इससे देश को निर्यात में भी नुकसान हो सकता है।

भारत द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि न तो इस प्रकार के किसी अध्ययन से पहले केंद्र सरकार से परामर्श किया गया और न ही इसकी विश्वसनीयता स्थापित की गई है। ऐसी स्थिति में हम यह जानना चाहते हैं कि किस आधार पर इस अध्ययन की विश्वसनीयता हेतु डाटा को सत्यापित किया गया है। विशेषकर उस स्थिति में जब न तो आईएलओ और न ही किसी अन्य राष्ट्रीय सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर सर्वेक्षण पद्धति के संबंध में कोई परामर्श लिया गया है और न ही इसे सत्यापित ही किया गया है।

वहीं अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने “आधुनिक गुलामी” पर अपनी हाल की रिपोर्ट का बाद में बचाव किया है और कहा है की रिपोर्ट में अनुमान किसी एक देश पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हुए वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिति का चित्र प्रदान करने का प्रयत्न किया है।

  • हालांकि, 2017 आईएलओ-डब्लूएफएफ रिपोर्ट में देश-वार आंकड़ों का उल्लेख नहीं किया गया था। अध्ययन में पता चला है कि 2016 में 40.3 मिलियन लोग ‘आधुनिक गुलामी’ के शिकार थे। रिपोर्ट 19 सितंबर को जारी की गई और केवल यह उल्लेख किया गया कि इसके लिए 17,000 लोगों का इंटरव्यू हुआ भारत में सर्वेक्षण के दौरान हुआ।
  • आईएलओ किसी भी देश से राष्ट्रीय आंकड़ों को उत्पन्न करने के लिए इन अनुमानों का उपयोग करने की अनुशंसा नहीं करता है। हालांकि आईएलओ सदस्य राज्यों को अपने स्वयं के राष्ट्रीय सर्वेक्षणों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है जिसके लिए आईएलओ अनुरोधित उपकरण और तकनीकी सहायता प्रदान कर सकता है।

क्या है अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ?

अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ, अंतरराष्ट्रीय आधारों पर मजदूरों तथा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए नियम बनाता है। यह संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था है। 1969 में इसे विश्व शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़दूरों के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) का गठन किया गया। यह एक संस्था है जो संयुक्त राष्ट्र में उपस्थित है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक मुद्दों को देखने के लिये स्थापित हुई है।

पूरे 193 (यूएन) सदस्य राज्य के इसमें लगभग 185 सदस्य हैं। विभिन्न वर्गों के बीच में शांति प्रचारित करने के लिये, मजदूरों के मुद्दों को देखने के लिये, राष्ट्र को विकसित बनाने के लिये, उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिये वर्ष 1969 में इसे नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) मजदूर वर्ग के लोगों के लिये अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन की सभी शिकायतों को देखता है। इसके पास त्रिकोणिय संचालन संरचना है अर्थात् “सरकार, नियोक्ता और मजदूर का प्रतिनिधित्व करना (सामान्यतया 2:1:1 के अनुपात में)” सरकारी अंगों और सामाजिक सहयोगियों के बीच मुक्त और खुली चर्चा उत्पन्न करने के लिये, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक कार्यालय के रुप में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन सचिवालय कार्य करता है।

International Labour Organization
अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) के कार्यों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन, स्वीकार करना या कार्यक्रम आयोजित करना, मुख्य निदेशक को चुनना, मजदूरों के मामलों के बारे में सदस्य राज्य के साथ व्यवहार, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक कार्यालय कार्यवाही की जिम्मेदारी के साथ ही जाँच कमीशन की नियुक्ति के बारे में योजना बनाने या फैसले लेने के लिये संस्था को अधिकार प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) के पास लगभग 28 सरकारी प्रतिनिधि हैं, 14 नियोक्ता प्रतिनिधि और 14 श्रमिकों के प्रतिनिधि हैं। जिसमें भारत से भारतीय मजदूर संघ की भुमिका अहम मानी जाती है। आम नीतियाँ बनाने के लिये, कार्यक्रम की योजना और बजट निर्धारित करने के लिये जून के महीने में जेनेवा में वार्षिक आधार पर ये एक अंतरराष्ट्रीय श्रमिक सभा आयोजित करता है (श्रमिकों की संसद के पास 4 प्रतिनिधि हैं, 2 सरकारी, 1 नियोक्ता और 1 मजदूरों का नुमाइंदा)।

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