गोधरा कांड, वह ‘भयानक नरसंहार’ जिसकी लपटों से आज भी दहल जाता है देश

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27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 डिब्बे फूंक दिए गए थे

गोधरा कांड मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने आज(9 अक्तूबर) को बड़ा फैसला सुनाते हुए 11 दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। कोर्ट ने मारे गए 59 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

क्या है गोधरा कांड-

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देश इस घटना से बेहद प्रभावित हुआ।

27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 डिब्बे फूंक दिए गए थे। सुबह 7 बजकर 57 मिनट पर हुई इस घटना में अय़ोध्या से लौट रहे 59 कार सेवकों की जलकर मौत हो गई थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, आग लगाए गए डिब्बे में कुल 59 लोग मौजूद थे, जिसमें अधिकतर अयोध्या से लौट रहे कार सेवक शामिल थे। इस कांड से पूरा देश दहल गया था।

गोधरा दंगों में गई हज़ारों की जान-

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दंगों में लगभग 1000 लोगों की मौत हुई थी

इस घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे जिसमें लगभग 1000 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के थे। तीन दिन तक चली हिंसा में 790 मुस्लिम और 254 हिंदू मारे गए। 223 लोग लापता हो गए।

कितने घर जला दिए गए, कितने ही मासूमों की हत्याऐं कर दी गईं। कितने ही लोगों का परिवार उजड़ गया। देश इस घटना से बेहद प्रभावित हुआ। कांग्रेस नेता एहसान जाफरी को दंगाईयों की भीड़ ने मार डाला था। इस मामले में गुजरात के सीएम, भाजपा नेता अमित शाह समेत 59 सीनियर अधिकारियों पर दंगे कराने की साजिश के गंभीर आरोप लगे थे।

इस मामले में कब क्या क्या हुआ-

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गुजरात हाई कोर्ट
  • इस मामले में 1500 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
  • भयानक कांड में एसआईटी की एक विशेष अदालत ने 1 मार्च 2011 को 31 लोगों को दोषी ठहराया था जबकि 63 लोगों को बरी कर दिया था। 11 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि और 20 लोगों को उम्रकैद दी गई थी।
  • जिन लोगों को बरी किया गया था उनमे से मुख्य लोग- आरोपी मौलाना उमरजी, गोधरा नगरपालिका के तत्कालीन प्रेजिडेंट मोहम्मद हुसैन कलोटा, मोहम्मद अंसारी और गंगापुर, उत्तर प्रदेश के नानूमिया चौधरी शामिल थे।
  • 130 से ज्यादा आरोपियों में से एसआईटी कोर्ट में 94 के खिलाफ़ सुनवाई हुई। 22 फरवरी 2011 को एसआईटी कोर्ट के फैसला देने के बाद भी कुछ आरोपी पकड़े गए और उनके खिलाफ़ मामला चला।
  • नानावटी कमिशन ने यह कहा था कि S-6 कोच में आग लगना कोई दुर्घटना नहीं थी बल्कि आग लगाई गई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में NHRC की याचिका पर पांच साल के लिए इस मामले की सुनवाई पर स्टे लगा दिया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
  • 21 सितंबर 2004 को यूपीए सरकार ने पोटा कानून को खत्म कर दिया और आरोपियों के खिलाफ पोटा आरोपों की समीक्षा का फैसला किया।
  • 16 मई, 2005 को पोटा समीक्षा समिति ने अपनी राय दी कि आरोपियों पर पोटा के तहत आरोप नहीं लगाये जाएं।

नानावटी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार-

  • 18 सितंबर, 2008 को नानावटी आयोग ने गोधरा कांड की जांच रिपोर्ट सौंपी और कहा कि यह पूर्व नियोजित षड्यंत्र था और S-6 कोच को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जलाया।
  • 20 फरवरी, 2009 को गोधरा कांड के पीड़ितों के रिश्तेदार ने आरोपियों पर से पोटा कानून हटाये जाने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
  • 01 मई, 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा मामले की सुनवाई पर से प्रतिबंध हटाया और सीबीआई के पूर्व निदेशक आर.के.राघवन की अध्यक्षता वाले विशेष जांच दल ने गोधरा कांड और दंगे से जुडे़ आठ अन्य मामलों की जांच में तेजी लाई।

गोधरा दंगे के सबूत जुटाने वाला आईपीएस-

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शर्मा 2002 में अलग तरीके से दंगों पर नियंत्रण करने के कारण चर्चा में आए थे।

राहुल शर्मा 2002 के गोधरा पश्चात दंगे को लेकर खुलेआम गुजरात सरकार से टक्कर ली थी। आईआईटी कानपुर से तालीम ले चुके शर्मा 2002 में अलग तरीके से दंगों पर नियंत्रण करने के कारण चर्चा में आए थे। गुजरात दंगों को लेकर राहुल शर्मा ने महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए थे।

शर्मा ने न्यायमूर्ति नानावती आयोग को एक सीडी सौंपी। सीडी में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे दक्षिणपंथी संगठनों के पदाधिकारियों एवं नेताओं के कॉल डाटा रिकार्ड और वर्ष 2002 की हिंसा के दौरान उनकी गतिविधियों का ब्योरा था। नरोदा पाटिया, नरोदा गाम और गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामलों की जांच के दौरान शर्मा ने ये कॉल रिकार्ड तैयार किया था। उन्होंने उसकी एक सीडी बनायी और उसे आयोग को सौंप दिया था।

वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने यह कहते हुए शर्मा के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था कि उन्होंने 2002 के दंगे से कॉल रिकार्ड डिटेल की सीडी दंगा मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों को जानबूझकर नहीं सौपी और बाद में उसे नानावती आयोग को सौंप दिया।

आज भी उस कांड की लपटों को याद करते हुए सहम जाता है देश-

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इस कांड के कई पीड़ित ऐसे है जिनके दुखों को ज़िंदगी भर कम नही किया जा सकता

आज भी लोग इस घटना को लेकर सहम जाते हैं क्योंकि ज़्यादा केवल उसका हुआ जिसे इससे कोई लेना देना नहीं था। इस कांड के कई पीड़ित ऐसे है जिनके दुखों को ज़िंदगी भर कम नही किया जा सकता। इन दंगों के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बहुत बदलाव आए।

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