किसान नेता राकेश टिकैत ने किया अपने पिता के सपनो के साथ विश्वासघात

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आज के समय किसान आंदोलन बसबसे बड़े चर्चा का विषय है। उन्होंने दिल्ली को चारों तरफ से घेरा हुआ है उनकी मांग है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए ।और उनका नेतृत्व कर रहे हैं किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ,लेकिन बहुत से लोगों को यह मालूम नहीं है कि खुद राकेश टिकैत के पिता महेंद्र टिकैत ने इन कानूनों की मांग की थी । आज से 27 साल पहले बाबा टिकैत के नाम से जाने जाने वाले भारतीय किसान यूनियन के नेता महेंद्र टिकैत ने किसानों के हक के लिए इन कानूनों की सरकार से मांग की थी । लेकिन कांग्रेस ने उस टाइम उनकी मांगों को ठुकरा दिया था। फ़िलहाल नरेंद्र मोदी जी ने स्वामीनाथन आयोग द्वारा की गई सिफारिश के आधार पर ही इन तीनों कृषि कानूनों को लागू किया है ।अपनी राजनीति कैरियर को देखते हुए राकेश टिकैत ने किसानों और खुद उनके पिता महेंद्र टिकट के साथ धोखा किया है। खुद तो अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं लेकिन किसान नही जानते की उनके साथ धोखा किया जा रहा है ।

आज से लगभग 2 महीने पहले जब यह कानून पास किया गया था तब खुद राकेश टिकैत ने कहा था कि सरकार ने किसानों के भविष्य के लिए यह तीन कानून लाकर बहुत बड़ा उपकार किया है। लेकिन बाद में विपक्ष के साथ मिलकर और अपने फायदे के लिए किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है । आज से लगभग 27 साल पहले खुद इनके पिता महेंद्र जी देखने किसानों के पक्ष में एक आंदोलन किया था जिसमें इन कानूनों की मांग रखी थी ,लेकिन तब के पीएम पी वी नरसिंह राव ने उनकी मांगों को नहीं माना था । जब आज मोदी सरकार किसानों के भविष्य के लिए कुछ अच्छा करने जा रही है तो ऐसे में राकेश टिकैत जैसे नेता किसानों के भविष्य को खतरे में डालने पर तुले हैं।

इन्हें किसानों से कुछ लेना-देना नहीं है इन्हें तो सिर्फ अपनी राजनीति चमकानी है यानी साफ साफ शब्दों में कहा जाए तो राकेश टिकैत ने अपने पिता के साथ में विश्वासघात किया है। लेकिन जैसे-जैसे अब किसान आंदोलन आगे बढ़ रहा है किसान जागरूक हो रहे हैं ।और वह धीरे-धीरे आंदोलन को छोड़ कर घर लौट रहे हैं । धीरे-धीरे उन्हें समझ आ रहा है कि यह कानून उन्हीं के लिए बनाए गए हैं । इतना ही नहीं अब तो किसानों द्वारा इन कानूनों के समर्थन में रैली निकाली जा रही है ।अब अगर देखा जाए तो समर्थन वाले किसान ज्यादा है जबकी विरोध वाले किसान कम है। उस समय महेंद्र टिकैत के द्वारा किए गए आंदोलन में सरकार ने उनकी कुछ मांगों को मान लिया था ।

लेकिन उन्हें भी ठीक से लागू नहीं किया गया। उस समय रखी गई मांगों में से कुल 35 सरकार द्वारा मांगी गई थी ,लेकिन उन्हें उचित रूप से लागू नहीं किया गया। अब देखना होगा कि कब तक राकेश टिकैत जैसे नेता अपनी राजनीति के लिए मासूम किसानों के भविष्य को खतरे में डालते रहेंगें ।

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