आईएएफ़ के मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में निधन, अस्पताल में ली अंतिम साँस

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IAF MARSHAL ARJAN SINGH NO MORE
उन्हें शनिवार सवेरे दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें सेना के रिसर्च एंड रेफ़रल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

भारतीय वायुसेना के सबसे वरिष्ठ और पाँच स्टार वाले रैंक तक पहुँचे मार्शल अर्जन सिंह का आज शनिवार को निधन हो गया है, वह 98 वर्ष के थे।
उन्हें शनिवार सवेरे दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें सेना के रिसर्च एंड रेफ़रल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अर्जन सिंह का हाल जानने अस्पताल पहुँचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया।

आइए उनके ज़िंदगी के कुछ तथ्यों के बारे में विस्तार से जानते हैं…

1970 में भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए अर्जन सिंह को सम्मान में भारत सरकार ने जनवरी 2002 में उन्हें वायुसेना का मार्शल रैंक दिया था। मार्शल रैंक फ़ील्ड मार्शल के बराबर होता है जो केवल थल सेना के अफ़सरों को दिया जाता रहा था।
अर्जन सिंह वायु सेना और ग़ैर थल सेना के ऐसे पहले अफ़सर थे जिन्हें मार्शल का रैंक दिया गया था।

महज़ 44 साल की उम्र में बने वायु सेना प्रमुख:-

अर्जन सिंह को जब वायु सेना प्रमुख बनाया गया था तो उनकी उम्र उस वक्त महज़ 44 साल थी। आज़ादी के बाद पहली बार लड़ाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उनके ही हाथ में थी।

15 अगस्त 1947 को विमानों का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी निभाई:-

देश जब 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ तब अर्जन सिंह को 100 भारतीय वायु सेना के उन विमानों का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई, जो दिल्ली और लाल किले के ऊपर से गुज़रे थे।

अर्जन सिंह कभी रिटायर नहीं हुए:-

अर्जन सिंह सेना के 5 स्टार रैंक अफ़सर थे। देश में पाँच स्टार वाले केवल तीन सैन्य अधिकारी रहे थे, जिनमें से फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फ़ील्ड मार्शल के एम करियप्पा का नाम है, ये दोनों भी जीवित नहीं हैं। ये तीनों ही ऐसे सेनानी रहे, जो कभी सेना से रिटायर नहीं हुए।

चीन के खिलाफ़ युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका:-

चीन के साथ 1962 की लड़ाई के बाद 1963 में उन्हें वायु सेना उप-प्रमुख बनाया गया था। एक अगस्त 1964 को जब वायु सेना अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रही थी, उस समय एयर मार्शल के रूप में अर्जन सिंह को इसकी कमान सौंपी गई थी।

उनके नेतृत्व में ही एयरफ़ोर्स ने पाकिस्तानी फौज पर हमला बोला था:-

1965 में पहली बार जब एयरफ़ोर्स ने जंग में हिस्सा लिया तो अर्जन सिंह ही उसके चीफ़ थे। उनके नेतृत्व में ही एयरफ़ोर्स ने एक घंटे के भीतर ही पाकिस्तानी फौज पर हमला बोला था।

पद्म विभूषण से भी सम्मानित गया किया:-

अर्जन सिंह को 2002 में एयरफ़ोर्स का पहला और इकलौता मार्शल बनाया गया। वे एयरफ़ोर्स के पहले फ़ाइव स्टार रैंक अधिकारी बने। उन्हें 1965 में ही पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।

2 करोड़ रुपए ट्रस्ट को दे दिए:-

सिंह ने दिल्ली के पास अपने फ़ार्म को बेचकर 2 करोड़ रुपए ट्रस्ट को दे दिए। ये ट्रस्ट सेवानिवृत्त एयरफ़ोर्स कर्मियों के कल्याण के लिए बनाया गया था। सिंह दिसंबर 1989 से दिसंबर 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे।

हमेशा यादों में रहेंगे:-

सिंह 1 अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक चीफ़ ऑफ एयर स्टाफ़ रहे। पूरा भारत उन्हें कभी नही भूलेगा और वो भारत देशवासियों की यादों में हमेशा रहेंगे।

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