पुलिस की छवि पर आँच, नाभा जेल ब्रेक मामले में यूपी के आईजी स्तर के अधिकारी पर बड़ा आरोप

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nabha jail break
फ़ोटो- एएनआई ट्विटर: 27 नवंबर 2016 को नाभा जेल ब्रेक कर आतंकवादियों को छुड़ाया गया था

ख़बर है कि पंजाब की नाभा जेल ब्रेक मामले का मास्टर माइंड गोपी घनश्यामपुरा रहस्यमय हालात में यूपी से गायब हो गया है। इस मामले के उठने के बाद तुरंत सब हरकत में आ गए। घनश्यामपुरा जैसे खूँखार अपराधी को छुड़ाने के लिए यूपी के एक बड़े अफ़सर पर शक गया है।

आईपीएस अफ़सर पर घूस का आरोप:-

यूपी में आईजी लेवल के एक आईपीएस अफ़सर पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब की नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड गुरप्रीत सिंह उर्फ़ गोपी घनश्याम पुरा को पकड़कर, 1 करोड़ की घूस के बदले फ़रार कर दिया।
मामले की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार देर शाम सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख गृहसचिव को तुरंत जाँच कराने के आदेश दिए हैं।

आरोपियों ने कबूली आईजी की भूमिका:-

वहीं अब अफ़सर का नाम आने के बाद जानकारी आईबी को दी गई। आईबी के आदेश पर जब यूपी एटीएस 15 सितंबर को होटल पहुँची जहाँ पता चला कि पंजाब के तीन लोग एक दिन पहले चले गए, तीन और लोग थोड़ी देर पहले निकले हैं।
एटीएस ने सर्विलांस (सीसीटीवी) के द्वारा उन तीनों को ट्रेस किया और सुलतानपुर के कॉंग्रेसी नेता संदीप तिवारी उर्फ़ पिंटू, पीलीभीत के हरजिंदर और अमनदीप को गिरफ़्तार कर लिया। सूत्रों के मुताबिक अधिकारी के घूस लेने का ऑडियो मुख्यमंत्री के पास मौजूद है।

क्या है नाभा जेल का पूरा मामला:-

27 नवंबर 2016 को पटियाला की नाभा जेल से ख़ालिस्तान लिब्रेशन फ़्रंट और बब्बर ख़ालसा के आतंकवादियों को अपराधियों ने बड़ी शातिर तरीके से भगा दिया था। अपराधी पुलिस की वर्दी में आए थे। अपराधियों ने फ़ायरिंग शुरू की और बब्बर ख़ालसा ग्रुप के हरमिंदर सिंह मिंटू, विक्की गोंदर, गुरुप्रीत सिंह राखो उर्फ़ सोनू मुटकी, कुलप्रीत सिंह उर्फ़ नीता देओल, अमनदीप धोतिया और कश्मीर सिंह को छुड़ा लिया था। इस वारदात में पहली गिरफ़्तारी सहारनपुर से हुई थी। इस षड्यंत्र का मास्टरमाइंड गुरप्रीत सिंह उर्फ़ गोपी घनश्याम पुरा था जिसे 10 सितंबर को यूपी के शाहजहांपुरा से गिरफ़्तार किया गया।

भ्रष्टाचार के दलदल में धँस चुकी है वर्दी:-

ट्रैफ़िक पुलिस में भ्रष्ट अफ़सरों के आँकड़े बताते हैं कि पुलिस के खिलाफ़ जनवरी 2011 से मई 2017 तक भ्रष्टाचार को लेकर साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा शिकायत दर्ज हुई हैं।
सिपाही से लेकर हवलदार तक और सब इंसपेक्टर से लेकर इंसपेक्टर तक की सूची इन आँकड़ों में उपलब्ध कराई गई है।जिनके हाथों में देश और जनता की सुरक्षा सौंपी जाती है अगर वो ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएँ, तो ऐसे में देश कभी भी उन्नति नहीं कर पाएगा।

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