दिवाली से पहले जगमगाया केन्द्रीय सचिवालय:-एक साधारण कर्मचारी के हाथों से हुआ उद्घाटन

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lighting at central secretariat
दिल्ली का दिल कई रंगों को खूबसूरती से नहाया

अगर इस बार इन त्योहारों के मौसम में आपका दिल्ली घूमने का मन है तो आप ज़रुर लुटियंस ज़ोन देख कर चकाचौंध होनें वाले है क्योकिं इस बार दिल्ली का दिल कई रंगों को खूबसूरती से नहाया है।

राष्ट्रपति भवन के दोनों ओर स्थित खूबसूरत इमारतें नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक बुधवार को नई रोशनी से सजाया गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री मौजूद थे  केंद्रीय सचिवालय के इन महत्वपूर्ण भवनों को रोशन करने की नई प्रणाली से की गई।

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नई सजावट

महीपाल सिंह ने आयोजन स्थल पर प्रधानमंत्री के पहुंचने से कुछ मिनटों पहले कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं.’’। सिंह 1975 में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के तौर पर गृह मंत्रालय का हिस्सा बने थे। बता दें कि महीपाल सिंह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी है जो जल्द ही सेवानिवृत्त होनें वाले हैं।

नई प्रकाश प्रणाली 1.6 करोड़ तक कई तरह के रंगो के संयोजन के साथ अलग-अलग थीम का प्रदर्शन करेगी। इस समय ये इमारतें साल में आठ चुनिंदा दिनों को ही प्रकाश से सजाई जाती हैं जिनमें गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस शामिल हैं।

एक अधिकारी ने कहा कि बिजली का भार कम करने के लिए प्रकाश प्रणाली में प्रकाश के मंद होने की विशेषता शामिल है। यह शाम सात बजे से सुबह पांच बजे तक प्रकाशित रहेगा और कुछ सेकेंड के अंतराल पर रंग बदलते रहेंगे। ये इमारतें रात आठ से नौ बजे के बीच पूरी क्षमता के साथ प्रकाशमान होंगी। अधिकारी ने बताया कि तीन महीने के अंदर राष्ट्रपति भवन भी इस तरह की प्रणाली से प्रकाशमान हो जाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि तीन महीने के अंदर राष्ट्रपति भवन भी इस तरह की प्रणाली से प्रकाशमान हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट भी जगमगाएगा

सुप्रीमकोर्ट में भी इस तरह की सजावट 15अगस्त 2018 से की जाएगीं।

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक कैबिनेट सचिवालय है, जहां से भारत सरकार प्रशासन चलाती है, जो देश के ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। इस भवन का निर्माण 1931 में किया गया था और इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) एवं देश के रक्षा, वित्त, गृह और विदेश मामलों के मंत्रालय हैं। नई दिल्ली के रायसीना पहाड़ी पर स्थित सचिवालय में राजपथ के आमने-सामने समानरूपी भवनों के दो ब्लॉक (नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक) हैं, और इनके बीच में राष्ट्रपति भवन है।

प्रमुख वैश्विक लाइटिंग कंपनी फिलिप्स लाइटिंग (यूरोनेक्स्ट लाइट) ने केंद्रीय सचिवालय भवन के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को फिलिप्स डायनामिक फसाड लाइटिंग से रोशन किया है। फिलिप्स लाइटिंग इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुमित जोशी ने कहा, “केंद्रीय सचिवालय के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को रोशन करने की इस प्रतिष्ठित परियोजना में शामिल होने पर हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

इस सप्ताह से हमारी डायनामिक एलईडी लाइटिंग इस भवन को 1.6 करोड़ रंगों के मिश्रण का उपयोग करते हुए रोशन करेगी, जो पारंपरिक भारतीय और ब्रिटिश वास्तुकला के समृद्ध मिश्रण को प्रकाशित करेगी”।

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नई सजावट

इससे पहले 8 इमारतें स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर जगमगाती थीं

अगले तीन महीने में राष्ट्रपति भवन भी इसी तरह जगमगाएगा। इससे पहले यह ऐतिहासिक भवन साल में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस समेत 8 चुनिंदा दिवसों पर स्टेटिक लाइटिंग से सजाए जाते रहे हैं।

लुटियंस ज़ोन कहलाता है पूरा केंद्रीय सचिवालय का क्षेत्र

ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स लुटियंस ने ही पूरे केंद्रीय सचिवालय का क्षेत्र का निर्माण किया था। लुटियंस ने शहर के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र को बिछाने में आर्किटेक्ट्स के एक समूह का नेतृत्व किया, जिसमें क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा हरे रंग की जगह के रूप में रखा गया था। शहर के केंद्र में राष्ट्रपति भवन है  जिसे पूर्व में वाइसराय हाउसके नाम से जाना जाता था जो कि, रायसीना हिल के शीर्ष पर स्थित है जो राजपथ  के ज़रिये इंडिया गेट से जुड़ता है। वर्तमान में, रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति हैं, और राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक घर में रहते हैं।

सचिवालय भवन, जो प्रधान मंत्री कार्यालय सहित भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राष्ट्रपति भवन के पास है और हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। इसके अलावा बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था संसद भवन, संसद मार्ग पर स्थित, राजपथ के साथ समानांतर चल रहा है। इस क्षेत्र में दो शानदार कैथेड्रल हैं, एंग्लिकन कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्प्शन और कैथोलिक सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल हेनरी मेड द्वारा डिजाइन किए गए थे।

राष्ट्रपति भवन में है भारतीय कला की छाप

इमारत के ऊपर भारतीय स्थापत्यकला का एक अभिन्न अंग है छोटे गुम्बदनुमा ढांचे – छतरी। इमारत में विभिन्न भारतीय डिज़ाइन डाले और जोड़े गये। इनमें ढेरों गोलाकार परात/कुण्ड रूपी घेरे हैं (चित्रित), जो कि भवन के ऊपर लगे हैं और जिनमें पानी के फौव्वारे भी लगे हैं, वे भारतीय स्थापत्य के अभिन्न अंग हैं। यहां परंपरागत बारतीय छज्जे भी हैं, जो कि आठ फीट दीवार से बाहर को निकले हुए हैं और नीचे पुष्पाकृति से सम्पन्न हैं। ये भवन को सीधी धूप के खिड़कियों में पड़ने से और मानसून में वर्षा के जल और फुहार को जाने से रोकते हैं।

छत के ऊपर बनीं कई छतरियां, बवन की छत के उस भाग को, जहां मुख्य गुम्बद नहीं बना है, वहां के सपाट दृश्य होने से रोकतीं हैं। लूट्यन्स ने कई भारतीय शैली के नमूनों को उपयुक्त स्थानों पर प्रयुक्त किया है, जो कि काफी प्रभावशाली हैं। इनमें से कुछ हैं, बाग में बने नाग, स्तंभों पर बने सजे धजे हाथी (चित्रित) और छोटे खम्भों पर लगे हुए बैठे हुए सिंह (चित्रित)। ब्रिटिष शिल्पकार चार्ल्स सार्जियेन्ट जैगर, जो कि अपने बनाये कई युद्ध स्मारकों के लिये जाने जाते हैं, ने बाहरी दीवारों पर बने हाथियों की सजावट की थी। इसके साथ ही जयपुर स्तंभ के निकट का पूर्ण बास रिलीफ भी उन्हीं ने बनवाया था।

http://https://www.youtube.com/watch?v=DaRXoBk75g0

लाल बलुआ पत्थर से बनी जालियां भी भारतीय स्थापत्य से प्रेरित थीं। भवन के आगे की ओर, पूर्वी ओर, बारह असमान स्थित स्तंभ हैं, जिनपर ऊपर की ओर, खड़ी रेखाओं का बॉर्डर है और अकैन्थस की पत्तियों सहित बेक बनी है, जिसके संग चार पैन्डेन्ट रूप में घंटी बनी है, जो कि भारतीय हिन्दू धर्म के मंदिरों का एक अनिवार्य अंग हैं। प्रत्येक स्तंभ के प्रत्येक ऊपरी कोण पर एक घंटी बनी है। यह कथित था, कि क्योंकि ये घंटियां शांत हैं, इसलिये भारत में ब्रिटिश राज्य समाप्त नहीं होगा। प्रासाद के सामने की ओर कोई खिड़की नहीं है, सिवाय किनारों की ओर बनी हुई वाली के। लूट्यन्स ने भवन में कुछ व्यक्तिगत प्रभाव भी डाले हैं, जैसे कि उद्यान की दीवार में एक स्थान और स्टेट कक्ष में दो रोशनदान, जो कि चश्में जैसे प्रतीत होते हैं।

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