इस संस्था ने दिया पूरे विश्व को शान्ति का सन्देश

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शान्ति का नोबेल पुरस्कार

शान्ति का नोबेल पुरस्कार

विश्व शान्ति 1914 के प्रथम विश्व युद्ध के बाद से ही काफी संगीन विषय रहा है पर प्रमुख तौर पर शान्ति के वास्तविक प्रयास दूसरें विश्व युद्ध 1945 के बाद से शुरू हुए जब अमेरिका ने जापान पर परमाणु हथियारों से हमला किया। उस वक्त से लेकर आज तक कई सरकारी महकमों के साथ कई गैर सरकारी संगठनो ने भी आज तक केवल यही प्रयास किया है कि जापान की त्रासदी को किसी भी सूरत में दुबारा ना दोहराया जाए क्योंकि मानवता ही हमारे जीवन का आधार है और यही शांति है। यह शान्ति का आधार अब और मजबूती से आज विश्व के सामनें आया है, जिसे शान्ति के नोबेल पुरस्कार से और भी मज़बूत रूप प्रदान किया गया है।

इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार परमाणु हथियारों के ख़ात्मे के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल कैम्पेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स‘ (आईकैन) को दिया गया है।

नोबेल कमेटी की प्रमुख बेरिट रेइस-एंडरसन ने कहा कि परमाणु हथियारों पर रोक की संधि की आईकैन की कोशिशों के लिए ये पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने उत्तर कोरिया का ज़िक्र करते हुए कहा ,”हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का ख़तरा पहले से कहीं ज़्यादा है”। उन्होंने परमाणु हथियार संपन्न देशों से एटमी हथियार ख़त्म करने के लिए बातचीत शुरू करने की अपील की है।

आई.सी.ए.एन. का पक्ष

नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त होने के संबंध में आई.सी.ए.एन. द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इस सम्मान से उन्हें न केवल आगे बढ़ते रहने हेतु प्रोत्साहन प्राप्त होगा, बल्कि इससे शांति की दिशा में किये जा रहे संस्था के प्रयासों को एक नया मार्गदर्शन भी मिलेगा जिसके बल पर संपूर्ण विश्व को परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व में तब्दील करने में मदद प्राप्त होगी।

वर्तमान की स्थिति

बता दें कि जुलाई 2017 में विश्व के तकरीबन 122 देशों द्वारा परमाणु हथियारों के निषेध पर एक संयुक्त राष्ट्र संधि को अपनाया गया था, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका सहित रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे परमाणु हथियार सम्पन्न राष्ट्र इस वार्ता में शामिल नहीं हुए। आई.सी.ए.एन. को शांति का नोबेल पुरस्कार एक ऐसे समय में प्राप्त हुआ है जब न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु हथियारों के परीक्षण एवं प्रयोग को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है, बल्कि वर्ष 2015 में ईरान और विश्व की अन्य प्रमुख ताकतों के मध्य हुए एक सौदे (जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने संबंधी प्रावधान किये गए थे) को लेकर भी तनाव बना हुआ है। आई.सी.ए.एन. को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किये जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस पुरस्कार से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा परमाणु हथियारों के निषेध के संदर्भ में किये जा रहे प्रयासों को प्रभाव में लाने हेतु आवश्यक 55 अनुमोदनों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। वस्तुत: यह एक सराहनीय कदम है।

पुरस्कार की दौड़ में शामिल अन्य लोग

इस साल शांति के नोबेल पुरस्कार की दौड़ में आई.सी.ए.एन. के अतिरिक्त पोप फ्रॉंसिस, ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ तथा सऊदी अरब के ब्लॉगर रैफ बदावी भी शामिल थे। नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा पुरस्कार की घोषणा करते समय इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि समय रहते इन हथियारों के संबंध में ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में इसके बहुत अधिक विनाशकारी परिणाम साबित हो सकते हैं।

इससे संबद्ध भारत के तीन संगठन हैं

  1. ‘इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलेपमेंट’।
  2. ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पीस, डिसआर्नामेंट एंड एनवायरमेंट प्रोटेक्शन’।
  3. ‘पापुलर एजु़केशन एंड एक्शन सेंटर’।

शांति पुरस्कार क्यों दिया जाता है

शांति का नोबेल पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति अथवा संस्था को दिया जाता है जो दो देशों के मध्य सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ-साथ समाज की बेहतरी के लिये काम करते है। भारत में अभी तक केवल मदर टेरेसा और कैलाश सत्यार्थी को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उल्लेखनीय है कि शांति के नोबेल पुरस्कार को ओस्लो में प्रदान किया जाता है, जबकि अन्य पुरस्कारों को स्टॉकहोम में दिया जाता हैं। विदित हो कि नोबेल पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान नहीं किये जाते हैं।

जानें आईकैन के बारे में?

International Campaign to Abolish Nuclear Weapons
‘इंटरनेशनल कैम्पेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स’ (आईकैन)

आईकैन ख़ुद को सौ से ज़्यादा देशों में काम करने वाले ग़ैर-सरकारी संस्थाओं का समूह बताता है। इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी और साल 2007 में विएना में इसे औपचारिक तौर पर लॉन्च किया गया। 30 अप्रैल, 2007 को विएना में औपचारिक तौर पर इसे लॉन्च किया गया। स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में इसका मुख्यालय हैं।

स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में आधारित इस संस्था को दिसंबर में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में 122 देशों ने परमाणु हथियारों के निवारण के लिए संयुक्त राष्ट्र की संधि को मंज़ूरी दी थी, इसमें अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन शामिल थे और फ्रांस इस वार्ता से बाहर रहा था।

उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बढ़े तनाव के बीच नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई है, ये निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

नोबेल फाउंडेशन के बारे में

नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष 1901 में शुरू किया गया यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ 14 लाख डालर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल 355 आविष्कार किए जिनमें 1867 में किया गया डायनामाइट का आविष्कार भी था। नोबेल को डायनामाइट तथा इस तरह के विज्ञान के अनेक आविष्कारों की विध्वंसक शक्ति की बखूबी समझ थी। साथ ही विकास के लिए निरंतर नए अनुसंधान की जरूरत का भी भरपूर अहसास था। दिसंबर 1896 में मृत्यु के पूर्व अपनी विपुल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रख दिया।

उनकी इच्छा थी कि इस पैसे के ब्याज से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिनका काम मानव जाति के लिए सबसे कल्याणकारी पाया जाए। स्वीडिश बैंक में जमा इसी राशि के ब्याज से नोबेल फाउँडेशन द्वारा हर वर्ष शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। नोबेल फ़ाउंडेशन की स्थापना 29 जून 1900 को हुई तथा 1901 से नोबेल पुरस्कार दिया जाने लगा। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1968 से की गई। पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया।

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