पटाखें बैन के बावजूद जमकर हुई आतिशबाजी, फिर से 24 गुना बढ़ा प्रदूषण का स्तर

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DIWALI 2017
फोटो- इंटरनेट से

दीवाली शुरु होने के पहले ही दिल्ली एनसीआर में पटाखों का बैन होना लोगों और व्यापारियों के लिये निराशा का कारण बन गया था, कहीं लोग मायूस तो कहीं पटाखे व्यापारी इसका विरोध कर रहे थे लेकिन अगर आपने गौर किया हो तो दीवाली की सुबह से ही पटाखों का शोर सुनायी देना लगा। और शाम ढलते ही पटाखों को शोरगुल सुनाई देना लगा वहीं तेज आवाज वाले पटाखे, राकेट पटाखे की गूंज, धुआं, प्रदूषण सब कुछ वैसा ही था जैसा हर साल होता है और पटाखों के बैन के बावजूद जिसपर सरकार ने इतनी रोक लगा दी थी। चाहे वह दिल्ली हो नोएडा, गाजियाबाद अगर गाजियाबाद की बात करें तो यहां भी शाम ढलते ही पटाखों के शोर से आसमान गूंज रहा था लेकिन कहीं भी पटाखों की दुकाने नहीं थी फिर भी लोग पटाखें जला रहा थे और प्रदूषण फैला रहे थे, देखा जाये तो एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की धज्जियां उड़ाई गईं और

दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के पटाखों पर बैन के बावजूद प्रदूषण का स्तर कम होता दिखाई नहीं दिया, दीवाली की रात के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई जगहों पर प्रदूषण का स्तर सामान्य से 12 गुना तक ज्यादा हो गया दक्षिणी दिल्ली के आरके पुरम जैसे पॉश इलाके में प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 में लगभग 12 गुना तक गिरावट दर्ज की गई है।

आरके पुरम के अलावा आनंद विहार, शाहदरा, वजीरपुर, अशोक विहार और श्रीनिवासपुरी जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर सामान्य से कई गुना ज्यादा पहुंच गया है ये आंकड़े रात करीब 10:00 बजे तक के थे और सुबह तक तो प्रदूषण स्तर और बढ गया।

दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार वजीरपुर की हवा दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषित है। वहीं प्रदूषण के मामले में दूसरे नंबर पर आनंद विहार का बस अड्डे आता है, दिल्ली के पॉश इलाकों की हालत भी ठीक नहीं है दिल्ली के पॉश इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से लगभग सात गुना तक ज्यादा है। फिलहाल पटाखें बैन होने का फायदा ही क्या रहा जब पटाखों का शोर लगातार सुनाई दे रहा था लेकिन सोचने की बात यह है कि पटाखों की दुकानें बंद होने के बाद भी पटाखें कहां से आये और कौन इन पटाखों को बेच रहा था, सरकार के आदेश के बाद भी कोई असर नहीं हुआ इससे तो यही साबित होता है प्रदूषण कितना भी बढें लेकिन पटाखों बिना दीवाली अधूरी है लोगों को यह नहीं समझ आता कि यह प्रदूषण कितना जानलेवा है।

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