सरकार ने बढ़ाया एक और कदम सामाजिक सुरक्षा की ओर

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सरकार ने एक और कदम बढ़ाया सामजिक सुरक्षा की ओर

सरकार अब सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए समाज के सबसे निम्न तबके तक अपनी योजनाओं को विस्तार देने की कोशिशों में जुटी हुई है। हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली के दिए गये एक बयान में सरकार की मंशा को साफ़ कर दिया है।

बता दे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मई में कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं मसलन प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) शुरू की हैं। इन योजनाओं का मकसद सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि बेहतर नीति गठन व संयोजन के लिए सरकार का इरादा विभिन्न विभागों व मंत्रालयों द्वारा चलायी जा रही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक छत के नीचे लाने का है।वित्त मंत्री ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 11 फीसद आबादी ही पेंशन योजनाओं के दायरे में है। सिर्फ 20 प्रतिशत लोग ही बीमित हैं। सरकार इस स्थिति में सुधार चाहती है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इन योजनाओं का लाभ मिल सके।

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समाज के निचले तबके का रखा जाएगा ध्यान

सरकार की वित्तीय समावेशी पहल के बारे में जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना काफी सफल रही है। अभी तक इस योजना के तहत 16.73 करोड़ खाते खोले गए हैं और इनमें कुल जमा राशि 19,990 करोड रुपये है। उन्होंने कहा कि सरकार अंतत: समाज के सभी वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाएगी। इसके तहत वह सूक्ष्म बीमा, सूक्ष्म पेंशन व सूक्ष्म रिण योजनाएं शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि एक साल के अंदर ही सरकार जनधन से जन सुरक्षा की ओर कदम बढा चुकी है।

सरकार से मुफ्त सामाजिक सुरक्षा की चाहत रखने वालों को अपनी अचल संपत्ति जैसे मकान, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स का ब्योरा देना पड़ सकता है। अगर संपत्ति की कीमत तय सीमा से कम हुई तभी सरकार की प्रस्तावित सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा योजना का फायदा मिलेगा। श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक असंगठित क्षेत्र और स्वरोजगार में लगे लोगों के न्यूनतम वेतन का निर्धारण उनकी कुल अचल संपत्ति के जरिए किया जाएगा। जिन लोगों की संपत्ति तय सीमा से ज्यादा होगी अपनी सामाजिक सुरक्षा के लिए खुद भुगतान करने को कहा जा सकता है।

योजना से संबंधित महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • गौरतलब है कि ‘यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी कवरेज’ नाम से बन रही 1.2 लाख करोड़ की लागत वाली इस योजना का लक्ष्य देश के सबसे गरीब तबके की आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित करना है।
  • यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी योजना के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र के कामगारों को भी कवर किये जाने की योजना है। यह योजना दो चरणों में लागू की जाएगी, पहले चरण में अनिवार्य पेंशन, बीमा (मृत्यु और विकलांगता) और जननी सुरक्षा जैसे विषय शामिल होंगे, वहीं दूसरे चरण में चिकित्सा, बीमारी और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।
  • श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय से संबद्ध इस प्रस्तावित नीति के अंतर्गत घरेलू श्रमिकों के अधिकारों को दूसरे श्रमिक वर्ग के समान ही महत्त्व एवं विस्तार देना शामिल है।
  • साथ ही तय न्यूनतम मज़दूरी, समान पारिश्रमिक, काम के घंटे आदि भी सुनिश्चित किए जाएंगे। श्रमिक कानूनी अधिकार दिलाना भी इस योजना का एक अंग है।

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    सभी को मिलेगा लाभ
  • इन्हें काम दिलाने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को भी इस दायरे में लाया जाएगा। ये एजेंसियाँ इन्हें काम दिलाने के भुगतान स्वरूप इनके एक माह का वेतन शुल्क के रूप में स्वयं ले लिया करती थीं। इस शुल्क को घटाकर अब 15 दिन कर दिया जाएगा।
  • चिकित्सकीय सहायता देना भी इसी का एक भाग होगा। सामाजिक सुरक्षा कवर, रोज़गार का उचित स्वरूप, शिकायत निवारण और घरेलू कामगारों के विवादों का समाधान करने हेतु संस्थागत तंत्र स्थापित किया जाएगा।
  • बता दे कि यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा कोड का हिस्सा होगा। श्रम मंत्रालय इस योजना को अंतिम रूप दे रहा है और यह देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज को संचालित करने वाले 17 मौजूदा कानूनों की जगह लेगी।

क्या है सामाजिक सुरक्षा कोड?

  • दूसरी राष्ट्रीय श्रम आयोग की सिफारिशों के आधार पर वर्तमान श्रम कानूनों को कार्य संबंधी आधार पर 4 अथवा 5 श्रम कोडों में बांटा जा रहा है।
  • श्रम मंत्रालय ने वर्तमान केंद्रीय श्रम कानूनों के उचित प्रावधानों को सरल बनाकर और युक्ति संगत बनाकर चार श्रम कोड बनाए हैं और सामजिक सुरक्षा कोड इसका एक अहम् हिस्सा है।

 

 

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