मिग 21लड़ाकू विमान के ज़रिये अपने सपनों की उड़ान भी भरेगीं ये भारतीय महिलाएं

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three women pilot
भारतीय महिला पायलट

कई मौकों पर खुद को साबित करने के बाद अब भारतीय महिलाएं लड़ाकू विमान मिग 21 उड़ाने जा रही है। यह न सिर्फ देश के लिए सम्मान की बात होगी बल्क़ि उन लोगों और समाज के लिए चुनौती भी होगी जो आज के युग में भी महिलाओं को दोयम दर्ज़े का नागरिक मानते आये है।

भारतीय वायु सेना के पहले महिला लड़ाकू विमान पायलट बैच को सबसे पहले मिग-21 उड़ाने का मौका मिलेगा। वायु सेना स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद प्रेस से बातचीत में वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि महिला पायलटों का पहला बैच मिग-21 बाइसन जेट उड़ाएगा। तीन महिला विमान चालक-अवनि चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह तीन हफ्ते की कठिन-कठोर प्रशिक्षण पूरा करने जब सैन्य जेट उड़ाएंगी तो वे एक नया इतिहास रचेंगी।

चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा, फिलहाल उन्हें मिग 21 बाइसन स्क्वाड्रन में डालने का विचार है। हमारा विचार है कि यह उनके कौशल को निखारेगा क्योंकि इस विमान में अन्य आधुनिक विमान की तुलना में ज्यादा मैनुअल फीचर हैं। एयर चीफ मार्शल धनोआ ने इंगित किया कि मिग 21 बाइसन उड़ा कर अपना कौशल निखारने के बाद तीनों महिलाएं दूसरे जेट उड़ा सकती हैं।

बता दें कि पिछलें वर्ष जुलाई में दूरदर्शन समाचार ने जानकारी दी थी कि वायु सेना ने तीन महिला पायलटों का प्रशिक्षण हो चुका है। इनमें तीन लड़ाकू महिला पायलट शामिल हैं भावना कंठ बिहार से, अवनी चतुर्वेदी मध्य प्रदेश से और मोहना सिंह राजस्थान से हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौक़े पर तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का एलान किया गया था। इस अवसर पर पर्रिकर ने पासिंग आउट परेड निरीक्षण किया और विभिन्न शाखाओं के 129 स्नातक प्रशिक्षुओं सहित 22 महिला प्रशिक्षुओं को ‘प्रेजिडेंशियल कमीशन’ दिया था।

वायुसेना प्रमुख अरूप साहा ने कहा था कि, “हमने महिला पायलटों को वायुसेना में 1991 में शामिल किया गया था। लेकिन अब तक वो केवल हेलीकॉप्टर और दूसरे विमान ही उड़ा रही थीं”। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी कहा था कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 2.5 प्रतिशत है वो भी केवल गैर लड़ाकू भूमिकाओं में।

हालाँकि वर्ष 2014 में कहा जा रहा था कि, “प्राकृतिक रूप से महिलाएं लंबे वक़्त तक लड़ाकू विमान उड़ाने में सक्षम नहीं होती हैं। ख़ासतौर पर जब वो गर्भवती हों या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो”।

बता दें कि पाकिस्तान में पहले से लड़ाकू विमानों की 20 महिला पायलट हैं लेकिन पिछले साल अक्तूबर में उन्होंने कहा था कि वायुसेना महिलाओं को लड़ाकू भूमिकाओं में लाने पर विचार कर रहा है।

जानें मिग 21 के बारे में…

मिकोयान-गुरेविच मिग-21 (अंग्रेज़ी: Mikoyan-Gurevich MiG-21,रूसी : Микоян и Гуревич МиГ-21) एक सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है जिसका निर्माण सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच डिज़ाइन ब्यूरो ने किया है। इसे “बलालैका” के नाम से बुलाया जाता था क्योंकि यह रुसी संगीत वाद्य ऑलोवेक (हिन्दी: पेन्सिल) की तरह दिखता था।

MIG 21
मिग 21

वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन ने मिग-21 ब्राउन ने कहा था कि विमान अपनी अभूतपूर्व लड़ाकू क्षमता के कारण लंबी अवधि तक वायुसेना के लड़ाकू दस्ते का आधारस्तंभ बना रहा। एयर चीफ मार्शल ब्राउन ने आगे कहा कि, 1980 और 90 के दशक में वायुसेना के लड़ाकू विमानों में तकरीबन 60 प्रतिशत ये विमान थे। मौजूदा समय में वायुसेना के करीब 90 प्रतिशत पायलट मिग-21 विमानों के एक या अन्य प्रकार में उड़ान भर चुके हैं। मसलन एफएल-77, जो आज बेड़े से बाहर हो गया। 1971 के पाकिस्तान  युद्ध में मिग-21 विमानों को लेकर उड़ान भर रहे वायुसेना के पायलटों द्वारा ढाका में गर्वनर्स हाउस पर किया गया सटीक हमला निर्णायक साबित हुआ था। इसके चलते शत्रु खेमे को समर्पण के लिए बाध्य होना पड़ा। करगिल के संघर्ष में भी विमान को तैनात किया गया था।

जानें तीनों पायलट के बारे में 

मध्य प्रदेश के छोटे से ज़िले की हैं अवनि चतुर्वेदी

22-वर्षीय चतुर्वेदी ने अपना पूरा प्रशिक्षण हैदराबाद की वायु सेना अकादमी से लिया। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दियोलैंड से की जो कि मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित एक छोटा सा शहर है। उन्होंने 2014 में अपनी स्नातक प्रौद्योगिकी वनस्थली विश्वविद्यालय, राजस्थान से करते हुए भारतीय वायु सेना की परीक्षा भी पारित की।

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मध्य प्रदेश के छोटे से ज़िले की हैं अवनि चतुर्वेदी

उनके पिता संसदीय सरकार में एक कार्यकारी इंजीनियर और माता एक गृहिणी हैं। चतुर्वेदी को टेनिस खेलना और चित्रकारी करना पसंद है। उन्हें अपने परिवार के सेना अधिकारियों द्वारा प्रेरणा प्राप्त हुई।उन्हें अपने महाविद्यालय के फ्लाइंग क्लब से कुछ घंटे की उड़ान का अनुभव प्राप्त हुआ जिसने उन्हें भारतीय वायुसेना मे शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

 बरौनी की भावना कंठ के बचपन से ही थे उड़ान भरने के सपनें

भावना का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बरौनी में हुआ था। उनके पिता इंडियन ऑयल कंपनी में इंजीनियर हैं। ‘मेधा पुरस्कार’  भावना को मिला आईओसीएल से 10 वीं कक्षा में अपनी परीक्षा में 90% से जादा अंक लेने पर।

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भावना कंठ

भारतीय वायु सेना में एक पायलट बनने का बचपन का सपना था भावना का जो पूरा हो गया। बेगुसराय के बरौनी रिफ़ाइनरी टाउनशिप में डीएवी विद्यालय में उनकी पढ़ाई हुई और वह राजस्थान में कोटा चली गई इंजीनियरिंग प्रवेश द्वार के लिए तैयार करने। बिहार के पटना में उन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक के दौरान भावना ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के लिए जाने की इच्छा व्यक्त हुए थी पर उस समय महिलाएं एनडीए के लिए अयोग्य थी। तो उसने बेंगलुरु में बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स स्ट्रीम में अपनी इंजीनियरिंग करने का फैसला किया।

फिर उसने भारतीय वायु सेना परीक्षा दी और सफल हुई। जल्द ही भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक बन गई।

 मोहना सिंह का ये ज़ज्बा उनकें परिवार की ही दें है  

सैन्य परिवार की बेटी मोहनासिंह जिला पापड़ा गांव के जाटाहाला ढाणी के वीर चक्र लांस नायक लादूराम जाट की पोती है। जो राजिस्थान के झुंझुनू ज़िले में आता है।

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मोहना सिंह

देश के लिए शहीद हुए थे इनके दादा :बता दें कि मोहना के पिता प्रताप सिंह भी एयरफोर्स में जॉब करते हैं। – इनके दादा लादूराम सेना में लासं नायक थे। 1948 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में लादूराम जाट शहीद हो गए थे। उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। मोहना के दादा के नाम पर उनके गांव पापड़ा में स्कूल का नाम भी रखा गया था। लादूराम की याद में पापड़ा गांव के राप्रावि का नामकरण वीर चक्र लांस नायक लादुराम राप्रावि किया गया।लेकिन, दो साल पहले सरकार ने समानीकरण के नाम पर स्कूल को बंद कर दिया था। ग्रामीणों ने स्कूल को यथावत रखने के लिए पंस सदस्य मनीता सोनी के नेतृत्व में विरोध प्रर्दशन कर शिक्षा विभाग को ज्ञापन भी दिया था। लेकिन, सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। वर्तमान में ये स्कूल रामावि के अधीन चल रही है।

 

 

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