अब सुप्रीमकोर्ट होगी और भी पारदर्शी

0
173
supreme court
सुप्रीमकोर्ट

हमेशा से ही पारदर्शिता किसी भी लोकतान्त्रिक प्रणाली की नीव रही है। इसी के आधार पर लोगों का भरोसा लोकतंत्र पर बना रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम् पहल करतें हुए सुप्रीम कोर्ट से सम्बंधित सारी नियुक्तियों को सार्वजनिक करने का फैसला लिया है।

  • अब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया गोपनीय नहीं रहेगी। कोलेजियम की सिफारिशों को अब सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण में गोपनीयता के चलते उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने पूर्ण पारदर्शिता की ओर कदम बढ़ाया है।
  • कोलेजियम ने फैसला किया है कि हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिशें और उसके आधार का सारा ब्योरा वेबसाइट पर डाला जाएगा।
  • इसके साथ ही कोलेजियम ने मद्रास हाई कोर्ट में 10 और केरल हाई कोर्ट में तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिशें वेबसाइट पर डाल भी दी हैं।
  • पिछले दिनों कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायाधीश जयंत पटेल का इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरण और उसके बाद जस्टिस पटेल का इस्तीफा दे देना काफी चर्चा में रहा था। इससे पहले भी कई बार कोलेजियम के फैसलों पर सवाल उठ चुके हैं।
  • transparency in SC
    जजों की नियुक्ति के फैसले होंगे सार्वजनिक
  • ऐसे में जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण प्रक्रिया को सार्वजनिक करने का यह कदम अहम माना जा रहा है। कोलेजियम ने गत तीन अक्टूबर को इस बारे में प्रस्ताव पारित किया है।
  • मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के फैसले और उसके कारण वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव पेश किया।
  • कोलेजियम ने मुख्य न्यायाधीश के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रस्ताव के मुताबिक जब भी किसी की हाई कोर्ट में नियुक्ति, उन्हें स्थाई किए जाने, स्थानांतरण अथवा किसी न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने के लिए सरकार से सिफारिश की जाएगी, वैसे ही फैसले और उसका कारण सुप्रीम कोर्ट बेवसाइट पर डाल दिया जाएगा।
  • तीन अक्टूबर को ही कोलेजियम ने मद्रास और केरल हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इसका ब्योरा वेबसाइट पर डाल दिया गया है।

कॉलेजियम प्रणाली का इतिहास

संसद ने 1993 से लागू कॉलेजियम व्यवस्था को बदलने के लिए पिछले साल एनजेएसी कानून पारित किया था। न्यायमूर्ति जेएस खेहर, जे. चेलमेश्वर, एमबी लोकुर, कुरियन जोसेफ तथा एके गोयल की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एनजेएसी कानून को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया।

साथ ही कॉलेजियम व्यवस्था के बदले नई व्यवस्था के लिए 99वें संविधान संशोधन को भी असंवैधानिक करार दिया। पीठ ने उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के बाबद सुप्रीम कोर्ट के 1993 तथा 1998 के फैसलों को समीक्षा के लिए बड़ी पीठ को भेजने का सरकार का आग्रह भी ठुकरा दिया।

क्‍या है कॉलेजियम

WHAT IS COLLEGIUM SYSTEM
क्‍या है कॉलेजियम

कोलेजियम पांच लोगों का समूह है। पांच लोगों में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। कोलेजियम के द्वारा जजों के नियुक्ति का प्रावधान संविधान में कहीं नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश एपी शाह की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में नहीं होने के बाद यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण ढंग से प्रकाश में आई है। कोलेजियम प्रणाली कैसे अस्तित्व में आई और इसे इतना असाधारण अधिकार कैसे मिला, जैसे सवाल सामने आ रहे हैं। कोलेजियम प्रणाली सुप्रीम कोर्ट के दो सुनवाई का परिणाम है।

पहला 1993 का और दूसरा 1998 का है। कोलेजियम बनाने के पीछे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मानसिकता सुप्रीम कोर्ट की रही। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में निहित प्रावधानों को दुबारा तय किया और जजों के द्वारा जजों की नियुक्ति का अधिकार दिया। हालांकि कोलेजियम व्यवस्था में नियुक्ति का सारा अधिकार मुख्य न्यायाधीश के हाथ सर्वोच्चता से न सौंप कर सभी पांच लोगों में समाहित किया गया है। कोलेजियम व्यवस्था नियुक्ति का सूत्रधार और नियुक्तिकर्ता भी खुद है।

इस संदर्भ में भारत के राष्ट्रपति एक औपचारिक अनुमोदक भर हैं। कोलेजियम किसी व्यक्ति के गुण-कौशल के अपने मूल्यांकन के आधार पर नियुक्ति करता है और सरकार उस नियुक्ति को हरी झंडी दे देती है। अपवाद में वह किसी अनुमोदन को लौटा सकती है लेकिन दुबारा कोलेजियम द्वारा भेजे जाने पर नियुक्ति टालना मुश्किल है। जजों की नियुक्ति में कार्यपालिका का अधिकार बिल्कुल नहीं है या है भी तो मामूली।

कॉलेजियम प्रणाली क्‍या करती है

  1. देश की अदालतों में जजों की नियुक्ति की प्रणाली को कॉलेजियम व्‍यवस्‍था कहा जाता है।
  2. 1990 में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों के बाद यह व्‍यवस्‍था बनाई गई थी। कॉलेजियम व्‍यवस्‍था के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में बनी सीनियर जजों की समिति जजों के नाम तथा नियुक्ति का फैसला करती है।
  3. सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति तथा तबादलों का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।हाईकोर्ट के कौन से जज पदोन्‍नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।कॉलेजियम व्‍यवस्‍था का उल्‍लेखन न तो मूल संविधान में है और न ही उसके किसी संशोधन में।

ये हैं कोलेजियम के सदस्य-

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम चार न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ कोलेजियम के सदस्य हैं। जो नियुक्ति और स्थानातंरण प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here