भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन में बड़ी साझेदारी की मांग की

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UN and India
संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन और भारत

भारत शुरू से ही वैश्विक तौर पर शान्ति की पहचान रखता है इसी पहल को आगें बढ़ाते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन में अपनी भूमिका को और सक्रिय रूप से निभाने का आग्रह संयुक्त राष्ट्र से किया है। भारत की यह पहल न सिर्फ भारत की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर मज़बूती प्रदान करेगा बल्क़ि उन लोगों को भी सहायता की जा सकेगी जिन्हें राहत की तत्काल आवश्यकता है।

हाल ही में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन प्रक्रिया में शांति सैनिकों के रूप में बड़ा योगदान देने के उद्देश्य से निर्णय प्रक्रिया में बड़ी भूमिका की मांग की है। भारत ने कहा है कि आज्ञा-पत्र के निर्माण की प्रक्रिया में भारत जैसे देशों को जो कि लगातार अपनी सैनिकों की सेवाएँ देते आए हैं, लंबे समय के लिये बाहर रखना सही नहीं है।

क्या है भारत का तर्क?

भारत चाहता है कि आज्ञापत्र बनाए जाने के मौजूदा रूप पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा गौर किया जाए। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन में बड़ी संख्या में सैनिकों और पुलिस का योगदान देने वाले देशों में भारत का नाम भी शामिल है। जबकि विडम्बना यह है कि आज्ञापत्र को लागू करने के लिये सेनाएँ उपलब्ध कराने वाले देशों को इसे बनाने की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता है।

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संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन में भारत का योगदान

आगे की राह

शांति रक्षा मिशन के लिये आज्ञापत्र को लागू करने में भारत जैसे देशों की भूमिका तो होनी ही चाहिये, साथ में वैश्विक शांति बहाल करने हेतु महत्त्वपूर्ण नीतियों और सैद्धांतिक मुद्दों पर शांति सैनिक प्रदान करने वाले देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बीच अधिक प्रभावी सहयोग सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है। वर्तमान दौर में शांति अभियानों के दौरान कई जटिल चुनौतियाँ देखने को मिलती हैं। ऐसे में शांति कायम करने के लिये सुरक्षा परिषद के सदस्यों, शांति सैनिक योगदानकर्ता प्रमुख देशों और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के बीच एक राजनीतिक आम सहमति का बनना आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

इसका आरंभ वर्ष 1948 में किया गया था और इसने अपने पहले मिशन में वर्ष 1948 में ही अरब-इज़रायल युद्ध के दौरान युद्ध विराम का पालन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन तीन बुनियादी सिद्धांतों का पालन करता है:

  1. शामिल सभी पक्षों की सहमति का ख्याल रखना।
  2. शांति व्यवस्था कायम रखने के दौरान निष्पक्ष बने रहना।
  3. आत्म-रक्षा और जनादेश की रक्षा के अलावा किसी भी स्थिति में बल-प्रयोग नहीं करना।

बता दें  कि वर्तमान में चार महाद्वीपों में 17 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान चलाए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक विविध पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं। इसमें पुलिस, सैन्य और नागरिक कर्मियों को शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक बल ने 1988 में नोबेल शांति पुरस्कार जीता था।

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संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन में भारतीय सहयोग

संयुक्त राष्ट्र संघ शांति सैनिक दल में योगदान करने वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर है। रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने इस बात की जानकारी लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। उन्होंने बताया कि, मौजूदा समय में यूएन शांति सैनिक दल में योगदान करने वाले सभी देशों में दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत 11 यूएन मिशनों और दो यूएन कार्यालयों में 6,891 भारतीय सैन्य कर्मी और 782 पुलिस कार्मिक उपलब्ध करा रहा है।

31 जनवरी 2017 के आकड़ो अनुसार, सैन्य दलों और उपस्करों सहित शांति अभियानों में योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र पर भारत का 74.62 मिलियन अमेरिकी डालर बकाया है। यूएन शांति मिशनों के लिए प्रतिपूर्ति प्राप्त करना एक सतत प्रक्रिया है।

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