क्या हुआ 12 मार्च 1993 को और उसके बाद आइए जानें विस्तार में

0
253
Mumbai 12 serial blast in 1993.
12 मार्च 1993 का वो दिन

24 साल बाद मुबंई बम धमाके पर आज अंतिम फैसला आगया है। 24 साल पहले 12 बम धमाके हुए एक के बाद एक। इस बम धमाके मामले में कब क्‍या हुआ?, क्‍या हुआ 12 मार्च 1993 को? कौन-कौन जिम्‍मेदार था इस धमाके का, किस दोषी को कितनी सजा मिली? आइए जानते हैं इस मामले से जुड़ी हर जानकारी।

एतिहास में काला दब्‍बा

12 मार्च 1993 का वो दिन जिसके अगले दिन की सुबह मुबंई वालों के लिए हुई ही नहीं। 12 मार्च को मुंबई में 12 सीरियल बम धमाके हुए। आंतकियों ने भारत में पहली बार सीरियल धमाके किए थे। मुंबई में ज्‍यादा से ज्‍यादा जान-माल का नुकसान करने के मकसद में आंतकियों ने धमाके बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज, सेंटूर होटल, एअर इंडिया बिल्डिंग, कत्‍था बाजार, झावेरी बाजार में किए। सबसे पहला धमाका करीबन दोपहर को 1 बजकर 30 मिनट पर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सेंज की इमारत के बेसमेंट में हुआ। उसके आधे घंटे बाद ही एक बार और धमाका हुआ। और फिर दो घंटे से भी कम समय में मुंबई में 12 धमाके कर दिए गए। हर वक्‍त चलती मुबंई थम-सी गई लोगों के मन में डर बैठ गया इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई और 700 से भी अधिक लोग घायल हो गए। साथ ही करीबन 27 करोड़ रूपये की संपत्ति को नुकसान पंहुचा।

12 मार्च 1993 के बाद की कहानी

4 नवंबर 1993 को 10 हजार पन्‍ने की पहली चार्जशीट दायर की गई। जिसके बाद 19 नवंबर 1993 को ये मामला सीबीआई को दे दिया गया। करीबन दो साल के बाद 19 अप्रैल 1995 से मुबंई की विशेष टाडा अदालत में सुनवाई शुरू हुई। फिर दो महीनों में ही आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। करीबन आठ साल बाद सिंतबर 2003 में इस मामले की सुनवाई खत्‍म हुई। और ठीक तीन साल बाद सिंतबर 2006 में कोर्ट ने अपना फैसला दुनिया के सामने रखना शुरू किया।

इस मामले में 125 अभियुक्‍त पाए गए। जिसमें से 12 दोषियों को निचली अदालत ने मौत की सज़ा दी, 20 दोषियों को उम्रकैद, 68 दोषियों को उम्रकैद से कम सज़ा सुनाई थी। जबकि 23 लोगों को निर्दोष पाया गया। जिसके बाद उन्‍हें बरी कर दिया गया। इस मामले में जाने –माने अभिनेता संजय दत्‍त को भी दोषी पाया गया था। नवंबर 2006 में संजय को पिस्‍तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया था मगर उन्‍हें अन्‍य संगीन मामलों में बरी कर दिया था।

1993 मुबंई बम धमाके के दोषियों को आज मिलेगी सजा

नंवबर 2011 में सुनवाई शुरू हुई, जो दस महीने चली। और सुप्रीम कोर्ट ने अगस्‍त 2012 में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 21 मार्च 2013 को सुनवाई करते हुए, संजय दत्‍त को दोषी पाया। और उन्‍हें पांच साल की जेल सुनाई थी। मगर उन्‍हें सिर्फ 18 महीने की जेल बितने पड़े। इस मामले में चार दोषी पाए गए। जो एक ही परिवार के थे, उनके नाम यकूब मेमन, यूसफ मेमन, इसा मेमन और रूबिना मेमन थे। इस में से ब्‍लास्‍ट का मुख्‍य आरोपी यकूब मेमन को कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई। जिसके बाद यकूब ने राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दया याचिका दायर की और भी कई याचिका दायर की। मगर हर याचिका को खारिज कर दिया गया। 30 जुलाई 2015 को सुबह 6 बजे फांसी पर लटका दिया गया।

क्‍या था इस मामले में अबु सलेम का रोल

कोर्ट के मुताबिक, अबु सेलम ही गुजरात से मुबंई हथियार, एक्‍सप्‍लोसिव्‍स और गोला-बारूढ़ एक वैन में लाया था। उन हथियारों को संजय दत्‍त के घर पहुंचाया गया।

Mumbai serial blast in 1993.
माफिया डॉन अबू सलेम

इन्‍हीं हथियारों और गोलाबारूद का इस्‍तेमाल मुबंई धमाके में किया गया था। अबु सेलम पर गुजरात से हथियार लाने, मुबंई में बाटंने, साजिश रचने के आरोप में दोषी पाया था।

आरोप ताहिर मर्चेंट का रोल

दुबई क दफ्तर में साजिश की मीटिंग की ओर इसने ही आरोपियों के दुबई में रहने का पूरा इंतजाम किया। साथ ही लोगों का पाकिस्‍तान भेजा था ट्रेनिंग के लिए।

7 सिंतबर, 2017 को आया अंतिम फैसला

7 सिंतबर, 2017 को इस मामले के दोषी माफिया डॉन अबू सलेम और उसके साथ पांच दोषी मुस्तफा दोसा, मोहम्‍मद ताहिर मर्चेट, करीमुल्‍लाह खान, रियाज सिद्दीकी, फिरोज अब्‍दुल राशिद खान को सजा सुनाई गई। इनमें से एक दोषी मुस्‍तफा दोसा को 28 जून को हार्टअटैक आने से मौत हो गई थी।

अबू सलेम और करीमुल्‍लाह को उम्रकैद की सजा और दो लाख रूपये का जुर्माना लगाया। अबू से पूछताछ में ही रियाज सिद्दीक्री, करीम शेख के बारे में पता चला ताहिर मर्चेंट को फांसी की सजा सुनाई गई। ताहिर को जून 2010 में गिरफ्तार किया गया था। फिरोज़ अब्‍दुल रशीद खान को भी फांसी की सजा सुनाई गई।

आप को बता दें, अभी भी इस मामले के 33 दोषी फरार है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here