ये कैसे अंधविश्वास में उलझी कर्नाटक सरकार

0
298
superstition
अंधविश्वास

आये दिन भारत में अंधविश्वास की कई कहानियाँ सुनने में आती है। ऐसे अजीबों ग़रीब किस्से सामने आते है कि जिसकें चलते लोगों की रूह काँप जाए। यूँ तो कभी सरकारों ने इन अंधविश्वासो पर ज़्यादा गौर नही फ़रमाया पर अब इस बार कर्नाटक सरकार के सामने कोई और रास्ता ही नही बचा था सिवाय कानून बनाने के।

अंधविश्वास ने कई अरसों से कर्नाटक सरकार के सामने चीन की दिवार के समान समस्या खड़ी कर रखी थी, कभी धर्म, कभी समाज तो कभी राजनीति के चलतें कर्नाटक सरकार इस दिवार को भेद ही नही पा रही थी। पर अबकी बार कर्नाटक सरकार ने सुपर मैन की तरह बहादुरी का परिचय देते हुए चीन की दिवार को पार कर ही लिया और बना डाला अंधविश्वास के खिलाफ़ कानून अपने राज्य में।

antisuperstition bill in karnataka
कर्नाटक में अंधविश्वास

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने अंधविश्वास विरोधी विधेयक को मंज़ूरी दे दी है। बता दें कि अमानवीय प्रथाओं और काला जादू की रोकथाम और उन्मूलन विधेयक 2017 (अंधविश्वास विरोधी विधेयक) पर काफी वक्त से बहस चल रही थी। इस विधेयक में कुछ गंभीर मामलों में मौत की सज़ा का भी प्रावधान है।

अंधविश्वास निरोधक विधेयक में क्या है?

कर्नाटक में सिद्दुभुक्टी, माता, ओखली जैसे कई रिवाज़ आपराधिक माने गए हैं, जिनसे इंसान की जान को खतरा होता है। विधेयक के मुताबिक, अगर ऐसी किसी दकियानूसी प्रथा से इंसान की जान चली जाती है, तो दोषियों को मौत की सज़ा दी जा सकती है। विधेयक में अंधविश्वास को फैलाने वाले तत्त्वों के खिलाफ एक्शन लेने का भी प्रावधान है। यदि गाँव का ओझा ग्रामीणों को झाड़-फूँक के जाल में फँसाएगा, तो उसके अलावा उस व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी जो उसका प्रचार-प्रसार कर रहा है। इसके लिये सरकार प्रचार के सभी माध्यमों पर भी नज़र रखेगी। यह विधेयक आम लोगों के हक में होगा और शरारती तत्त्वों को काबू में रखने में मदद करेगा। इस विधेयक में नर बलि पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव किया गया है।

कर्नाटक के कुछ गाँवों में अंधविश्वास के चलते नर बलि की प्रथा भी प्रचलित है। अंधविश्वास विरोधी विधेयक में नर बलि के साथ-साथ पशु की गर्दन पर वार कर उसकी बलि पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इस विधेयक में ‘बाईबिगा प्रथा’ के नाम पर लोहे की रॉड को मुंह के आर-पार करते हुए करतब करना, ‘बनामाथी प्रथा’ के नाम पर पथराव करना, तंत्र-मंत्र से प्रेत या आत्मा को बुलाने की मान्यता पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

अंधविश्वास विरोधी विधेयक में धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चियों को देवदासी बनाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस विधेयक में धर्म के नाम पर महिलाओं और लड़कियों के यौन शोषण को रोकने और खत्म करने का प्रावधान किया गया है।

superstition in karnatak
कर्नाटक सरकार अंधविश्वास के खिलाफ़

क्यों महत्त्वपूर्ण है यह प्रयास  

कर्नाटक के कई गाँवों में लोग आज भी बीमारियाँ ठीक करने के लिये बच्चों को काँटों पर सुला देते हैं या गर्भवती महिला को किसी तरह की शारीरिक या मानसिक यातना देते हैं। यह विधेयक जैसे ही कानून की शक्ल लेगा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ेगी। विदित हो कि ऐसा कानून महाराष्ट्र में बहुत पहले से है और अब कर्नाटक में इसे मज़बूती से लागू करने के लिये राज्य सरकार गंभीर है। कुप्रथाओं के उन्मूलन में कानूनी प्रावधानों की उपयोगिता अवश्य है, लेकिन समाज से अंधविश्वासों को जड़ से समाप्त करने के लिये पर्याप्त नहीं है। कुछ लोगों का मत यह हो सकता है कि प्रस्तावित कानून संविधान के अनुच्छेद 25 (प्रत्येक व्यक्ति को अन्तःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप में मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हालाँकि इसे एक उचित प्रतिबंध के रूप में देखा जाना चाहिये, क्योंकि इससे सार्वजनिक हित सुनिश्चित होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here