भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन को महारत्न का दर्जा मिला

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Bharat Petroleum Corporation Limited
भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन को महारत्न का दर्जा मिला

भारतीय कंपनियों का इतिहास काफी पुराना रहा है। 1947 में आज़ाद होने के बाद नेहरु ने सबसे पहला काम किया, भारतीय कंपनियों को फिर से खड़ा करना ताकि वें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनीं मज़बूत पहचान बना सकें। उसी क्रम में एक और उपलब्धी भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन ने महारत्न का दर्जा लेकर हासिल की है।

  1.  भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को ‘महारत्न’ कंपनी का दर्जा प्रदान किया गया है और बीपीसीएल महारत्न के रूप में सम्मानित की जाने वाली आठवीं कंपनी बन गयी है।
maharatana PSU
महारत्न पीएसयू

पीएसयू कंपनियों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है-

1- महारत्न

2- नवरत्न

3- मिनिरत्न- कैटेगरी -1 और कैटेगरी- 2

महारत्न

सरकार द्वारा इस टाइटल की स्थापना 2010 में की गई, जिसने एक कंपनी के निवेश को 1000 करोड़ से बढ़ाकर 5000 करोड़ कर दिया।

आज के समय में कोई भी महारत्न फर्म किसी प्रोजेक्ट में अपनी कुल कीमत का 15 प्रतिशत निवेश करने का निर्णय बिना सरकार की अनुमति के ले सकती है। इसके लिए कम्पनी को यह काम करने होंगे:-

1- तीन साल तक 5000 करोड़ से अधिक का शुद्ध लाभ कमाना होगा।

2- तीन सालों की औसत नेट वर्थ 15000 करोड़ रुपए होना चाहियें।

3- तीन सालों का औसत टर्नओवर 25000 करोड़ रुपए हों।

नवरत्न कम्पनी

वहीं दूसरी ओर, कोई भी नवरत्न कंपनी सरकार की अनुमति लिए बिना किसी भी प्रोजेक्ट में 1000 करोड़ रुपए तक निवेश कर सकती है।

नवरत्न टाइटल 1997 में 9 पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज को भारत सरकार की ओर से दिया गया था, क्योंकि वह पब्लिक सेक्टर की ऐसी कंपनियां थीं, जिनकी परफॉर्मेंस अन्य कंपनियों से खास थी।

इस तरह का टाइटल देने के देकर सरकार इन कंपनियों का सपोर्ट करना चाहती थी, ताकि भविष्य में वे एक ग्लोबल दिग्गज के रूप में उभर कर सामने आ सकें।

भारत सरकार ने शुरू में नौ सार्वजनिक उद्यमों की पहचान की जो तुलनात्मक रूप से फायदे की स्थिति में थे और इनमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशाल उद्यमों के रूप में उभरने की क्षमता थी। उस समय बीएचईएल, बीपीसीएल, जीएआईएल, एचपीसीएल, आईओसी, एमटीएनएल, एनटीपीसी, ओएनजीसी और सेल को नवरत्न कहा गया था। आज इन कंपनियों की सख्यां 22 है।

मिनिरत्न कंपनीज

इन कंपनियों की स्थापना राज्य सरकारे कर सकतीं है तथा ये सहायक कंपनीज के नाम से भी जानी जाती है।

प्राइवेट कम्पनी और सरकारी कम्पनी में क्या फर्क होता है? आइये जानें

प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी निजी लोगों के स्वामित्व वालि कम्पनी होती है, जिसकी स्थापना करने के लिए कम से कम दो लोगों की ज़रूरत होती है। पब्लिक लिमिटेड कंपनीज के उपर सरकार और शेयर धारकों का कब्ज़ा होता है तथा इसकी स्थापना के लिए कम से कम 7 सदस्यों का होना ज़रूरी होता है।

 

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