कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ले सकती है ऐसा बड़ा कदम, जिससे टूटेगी सालों पुरानी परंपरा

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CAMBRIDGE UNIVERSITY TO SCRAP 800 YEARS OLD TRADITION
फ़ोटो- इंटरनेट द्वारा: कैंब्रिज यूनिवर्सिटी अपनी परीक्षा देने की प्रणाली में बदलाव पर सोच विचार कर रही है।

हाल ही मे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2018 में दूसरा स्थान मिला है। दुनिया की बेस्ट दूसरी यूनिवर्सिटी मे इसने अपना नाम दर्ज कराया है तभी तो यहाँ पढ़ने के लिए जी जोड़ मेहनत करनी पड़ती है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी अपनी परीक्षा देने की प्रणाली में बदलाव पर सोच विचार कर रही है। यूनिवर्सिटी अब 800 साल से अधिक पुरानी लिखित परीक्षा की परंपरा को खत्म करने पर सोच विमर्श कर रही है।

इस परंपरा को ख़त्म करने की वजह-

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी 800 साल से अधिक पुरानी लिखित परीक्षा की परंपरा को खत्म करने पर सोच विमर्श कर रही है।
ऐसा इसलिए क्यूंकी कई बार परीक्षा में छात्रों की राइटिंग इतनी खराब होती है कि पढ़ पाना मुश्किल होता है। इससे मार्क्स देने मे मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों ने कहा कि लैपटॉप पर बढ़ती निर्भरता की वजह से छात्रों की लिखावट खराब होती जा रही है जिसे पढ़ने में काफी दिक्कत होती है।

वहीं खराब हैंडराइटिंग को देखते हुए यूनिवर्सिटी लैपटॉप या आईपैड पर परीक्षा देने के समर्थन में हैं। लेक्चर के नोट्स व मटीरियल लेने के लिए स्टूडेंट्स के बीच लैपटॉप के इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी होरही है और ऐसे में इस कदम के लागू होने के साथ ही 800 साल से अधिक पुरानी हाथों से लिखकर परीक्षा देने की परंपरा का भी अंत हो जाएगा।

प्रोफ़ेसर डॉ. सारा पीयरसल ने कहा-

इस शुरुआती पहल से जुड़ी कैंब्रिज के इतिहास विभाग की प्रोफ़ेसर डॉ. सारा पीयरसल ने कहा कि आज की स्टूडेंट्स की पीढ़ी के बीच लिखावट लुप्त होने की कगार पर है। उन्होंने एक अँग्रेज़ी न्यूज़पेपर को बताया, ‘15-20 साल पहले छात्र एक दिन में नियमित रूप से काँसे कम कुछ घंटे हाथ से लिखते हुए बिताते थे, लेकिन आज वे एग्ज़ाम को छोड़कर कुछ भी हाथ से नहीं लिखते हैं।’

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कुछ लोग इसका कड़ा विरोध भी कर रहे है-

इन्हीं सब चीज़ों को ध्यान में रखते हुए  यूनिवर्सिटी ये फैसला लेने के बारे में सोच विमर्श कर रही है। वहीं कुछ लोग इसके पक्ष में है तो कुछ लोग इसका कड़ा विरोध भी कर रहे है, उनके मुताबिक तकनीक कितनी भी आगे निकल जाए लोगों को हाथ से लिखना एक चलन है और अगर ये कदम अमल में आया तो शायद हाथों से लिखना सिर्फ़ यादों में रह जाएगा।

1 COMMENT

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