जानें “फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब” बनाम “मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब”

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father of all bomb vs. mother of all bomb
"फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब" बनाम "मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब"

44000 किलो के “फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब” से रूस ने ISIS पर हमला किया। यह कई मायनों में अमेरिका के ‘”मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब’ से अलग है। इसी साल 14 अप्रैल में अमेरिका ने पूर्वी अफ़गानिस्तान के ठिकानों पर रात में यह विशाल बम गिराया था। अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट आतंकियों के ठिकानों पर बम को गिराया और इस विशाल बम का नाम GBU-43 बताया। इस बम का निर्माण अमेरिकी सेना के अधिकारी अलबर्ट एल वीमोर्ट्स ने किया था। इसके बाद ही रूस ने फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब बनाने का दावा किया था और कहा कि यह मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब से चार गुना शक्तिशाली है। साथ ही पेंटागन के प्रवक्ता ने बताया था कि पहली बार इस बम का प्रयोग किया गया है और इसे MC-130 एयरक्राफ्ट से गिराया गया था। यह बम नानगरहार प्रांत के अचिन जिले में एक सुरंगनुमा इमारत (टनल कॉम्पलेक्स) पर गिराया गया था। दरअसल, इस बम को सभी बमों की जननी भी कहा जाता है। GBU-43 का वजन 21,600 पाउंड (9,797 किग्रा) बताया जा रहा है।

इसी का जवाब देते हुए हाल ही में आतंकी संगठन आइएसआइएस पर कारवाई  करते हुए रूस की सेना ने ‘फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब’ से हमला किया। रूस की सेना ने सीरिया के पूर्वी शहर देर अल-जोर के बाहर एक हवाई हमले में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के चार नेताओं और कई आतंकवादियों को मार गिराया। बता दें की रुस का ‘फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब’ अमेरिका के ‘मदर ऑफ़ ऑल बम’ से चार गुना शक्तिशाली है।

‘फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्बकी विशेषताएं :-

  • अमेरिका के बम में 11 टन विस्फोटक था तो वहीं रूस के बम में 44 टन विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया है।
  • रूस ने साल 2007 में फ़ादर ऑफ़ ऑल बॉम्ब को विकसित किया था। इससे परमाणु हमले के समान तबाही मचती है।
  • इस हमले में परमाणु बम जितनी ताकत होती है। लेकिन इसमें रेडिएशन का खतरा नहीं होता। फिलहाल यह बम सिर्फ़ रूस के पास है।
  • इस बम का वज़न 7 हज़ार किलोग्राम से भी ज़्यादा है। कुछ साल पहले अमेरिका ने जब इस बम को अफगानिस्तान में गिराया था तो उसने जमीन में 1000 फ़ीट नीचे तक छेद कर दिया था। अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि रूस का बम कितना ताकतवर होगा।

शीत युद्ध खत्म होने के बाद भी आज अमेरिका और रूस आपस में अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने में लगे हुए है। अमेरिका और रूस को शुरू से ही दो अलग विचारधारायों ने बांट रखा है, एक ओर जहाँ अमेरिका पूंजीवाद का समर्थक है वही रूस का झुकाव समाजवाद की ओर है। पूरा विश्व भी इन्ही दो विचारधारायों में तब तक उलझा रहा जब तक भारत के जवाहरलाल नेहरु ने 1947 में आज़ाद होने के बाद गुट निरपेक्षता आन्दोलन की नीव न रखी।

बता दे की गुट निरपेक्ष आंदोलन (NAM) राष्ट्रों की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, जिहोंने निश्चय किया है, कि वे विश्व के किसी भी पावर ब्लॉक के संग या विरोध में नहीं रहेंगे। यह आंदोलन भारत के प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एवं युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसेफ़ ब्रॉज़ टीटो द्वाराआरंभ किया हुआ है। इसकी स्थापना अप्रैल,1961 में हुई थी और 2012 तक इसमें 120 सदस्य हो चुके थे।

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