जीएसटी परिषद के फैसलों का ऐलान, जानें क्या है जीएसटी और क्यों किया गया इसे लागू

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जीएसटी व्यवस्था लागू होने के दूसरे महीने अगस्त में कुल 90,669 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ।

सरकार ने देश को दिवाली पर बड़ा तोहफ़ा देते हुए, जीएसटी की दरों में बदलाव करने का फ़ैसला ले लिया है। यह फ़ैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिया गया है। यह बैठक नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई। सुबह(6 अक्टूबर) 10.30 बजे जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक शुरू हुई थी।

आइए नज़र डालते हैं बैठक में लिए गए अहम फ़ैसलों पर-

आज 10.30 बजे जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक शुरू हुई
  • कम्पोज़िशन स्कीम के तहत सीमा बढ़ाई गई, इसकी सीमा 75 लाख रुपए से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए की गई है। इस स्कीम में ट्रेडिंग (एक करोड़ के टर्नओवर पर 1 प्रतिशत , मैन्यूफ़ैक्चरिंग को 2 प्रतिशत) और रेस्त्रां को 5 फ़ीसदी कर देना होगा।
  • अब डेढ़ करोड़ टर्नओवर वाले व्यापारी तीन महीने में रिटर्न दे सकते हैं।
  • डीज़ल इंजन के पार्ट्स पर अब 18 फ़ीसदी टैक्स।
  • आयुर्वेदिक दवाओं पर टैक्स 5 फ़ीसदी किया गया। इससे पहले यह 12 फ़ीसदी था।
  • कमेटी की सिफ़ारिश में कहा गया कि एक करोड़ तक की कमाई वाले रेस्तरां मालिकों को अब 5 फ़ीसदी टैक्स देना होगा।
  • खाखरा पर 5 फ़ीसदी टैक्स।
  • छोटे व्यापारियों पर टैक्स भरने का दबाव अधिक है। इस दबाव को कम करने की कोशिश होगी।
  • रिवर्स चार्ज की व्यवस्था को 31 मार्च तक स्थगित कर दिया गया है।
  • 10 अक्तूबर से निर्यातकों को जुलाई, अगस्त का रिफंड दिए जाने का फ़ैसला किया गया।
  • हर निर्यातक के लिए ई वॉलेट बनेगा। अप्रैल 2018 से ई वॉलेट व्यवस्था पर काम शुरू करने की कोशिश होगी।
  • सर्राफा कारोबारियों को भी राहत दी गई है। अब 2 लाख रुपये की तक की खरीदारी पर पैन देना जरूरी नहीं होगा।पहले 50 हजार रुपये से ज्यादा की खरीदारी पर पैन देना अनिवार्य था।

वहीं डेढ़ करोड़ रुपये तक के टर्न ओवर वाले व्यापारियों को तिमाही रिटर्न दाखिल करने की छूट दी गई है। पहले हर महीने रिटर्न दाखिल करने का प्रावधान था।

जीएसटी में बदलाव को लेकर मोदी का बयान-

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जीएसटी को 30 जून से देश भर (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार(4 अक्टूबर) को कहा था, कि जीएसटी लागू करने में आ रही मुश्किलों को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार जीएसटी कानून में बदलाव करने के पक्ष में है।

मोदी ने कहा था, कि कारोबारियों को राहत देने और नई कर व्यवस्था जीएसटी को जल्द से जल्द ट्रैक पर बैठाने के लिए, उन सभी दिक्कतों को हटाने की पहल की जाएगी जिससे कारोबारियों को मुसीबतें हो रही है।

क्या है जीएसटी-

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जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगना शुरू हुआ

जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) को 30 जून से देश भर (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू किया गया था। जीएसटी काउंसिल ने सभी वस्तुओं और सेवाओं को चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) में बाँटा था।

1 जुलाई 2017 से पूर्व किसी भी सामान पर केंद्र एवं राज्य सरकार कई तरह के अलग-अलग कर लगाती थी। लेकिन जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगना शुरू हुआ है।

देश में अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की जीएसटी व्यवस्था को एक जुलाई से लागू किया गया। इसमें एक दर्जन से अधिक केन्द्रीय और राज्य स्तर के अप्रत्यक्ष करों को समाहित किया गया है।

इसके अंतर्गत 20 लाख तक का व्यापार करने वालों को जीएसटी से बाहर रखा गया था। 75 लाख तक के व्यापारी को कंपोज़िट स्कीम में लाकर जीएसटी से राहत देने की बात कही गई थी। लेकिन जीएसटी लागू होने के तीन महीने बाद इसके इसमे आई परेशानियों को देखते हुए सरकार ने इसमें कुछ संशोधन का फैसला किया।

जीएसटी के पक्ष और विपक्ष में लोग सामने आए-

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जीएसटी को सामान्य होने में कम से कम एक साल का समय लगेगा

कई लोगों के इसका जमकर साथ दिया। जीएसटी व्यवस्था लागू होने के दूसरे महीने अगस्त में कुल 90,669 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ। 1 जुलाई 2017 से पूर्व किसी भी सामान पर केंद्र एवं राज्य सरकार कई तरह के अलग-अलग कर लगाती थी। जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगना शुरू हुआ है।

वहीं दूसरी और जीएसटी से कई लोगों में नाराज़गी भी दिखी। हाल ही में जीएसटी के खिलाफ अपना गुस्सा जताने के लिए खेल व्यापारियों ने मंगलवार(3 अक्टूबर) को बस्ती नौ चौक के पास जीएसटी का पुतला जलाया और केंद्र और प्रदेश सरकार के विरुद्ध नारेबाज़ी की।

ट्रांसपोर्टर्स को जीएसटी के दायरे में लाने और डीज़ल के लगातार बढ़ते दामों के विरोध में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने 9 और 10 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। कपड़ा कारोबार भी इससे नाराज़ नज़र आया।

उप-राष्ट्रपति ने भी की जीएसटी की तारीफ़-

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उप-राष्ट्रपति वैंकेया नायडु ने कहा: जीएसटी भारत का अबतक का सबसे बड़ा कर सुधार है

उप-राष्ट्रपति वैंकेया नायडु ने एक दिन पहले हि कहा, कि लोगों को समझना चाहिए कि जीएसटी भारत का अबतक का सबसे बड़ा कर सुधार है। किसी भी बदलाव या किसी भी सुधार के रास्ते में शुरुआत में कुछ मुश्किलें आती हैं। उन्होने यह बात रेलवे और मेट्रो प्रोजेक्ट्स में टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहीं।

जीएसटी पर क्या बोले नायडू, वीडियो देखने के लिए- यहाँ क्लिक करें

जीएसटी को सामान्य होने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। जीएसटी के सफल क्रियान्वयन के साथ ही भारत बड़ी आर्थिक शक्तियों के समूह में शामिल हो जाएगा। लेकिन इसके लिए इसमे कुछ संशोधनों की ज़रूरत थी जो आज(6 अक्टूबर) की बैठक में हुआ।

1 COMMENT

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