अब देश का हर घर होगा रौशन

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'सौभाग्य योजना'

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  दीनदयाल ऊर्जा भवन का लोकार्पण किया। इसी दौरान मोदी ने हर घर को बिजली देने की घोषणा करते हुए सौभाग्य योजना का ऐलान किया। इस योजना के तहत गरीबों को मुफ्त में बिजली के कनेक्शन दिए जाएंगे। योजना का पूरा नाम ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ है। योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

  1. चार करोड़ से ज़्यादा घरों में बिजली नहीं है। बल्ब का अविष्कार हुए सवा सौ साल हो गए हैं, लेकिन दुखद है कि इन परिवारों तक बिजली नहीं पहुंच सकी।
  2. गरीबों से बिजली कनेक्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 16,000 करोड़ रुपये की लागत से गरीबों तक बिजली पहुंचाई जाएगी।
  3. 18 हज़ार अंधेरे गांवों में बिजली पहुंचाने का वादा था, अब 3000 गांव बचे हुए हैं। दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना गांवों में चल रही है।
  4. जहां बिजली पहुंचाना संभव नहीं होगा, वहां सोलर पैक देंगे।
  5. पिछले तीन सालों में पहली बार इंस्टाल्ड पावर कैपिसिटी में 60 हज़ार मेगावाट की बढ़ोतरी हुई, जो कि लक्ष्य से 12 फ़ीसदी अधिक है।
  6. निजी क्षेत्र ने 41 करोड़ एलईडी बल्ब बांटे और 33,700 स्ट्रीट लाइट्स लगाईं।

क्या है सौभाग्य योजना?

इसका पूरा नाम प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना – साैभाग्य है। इसके तहत सभी राज्यों में मौजूद हर घर तक 31 मार्च 2019 तक बिजली पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। हालांकि, पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और पावर मिनिस्टर आरके सिंह का कहना है कि दिसंबर 2018 तक इस टारगेट को पूरा कर लिया जाएगा। यह योजना उन 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाने की स्कीम से जुड़ी है जिसे 2018 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया था। इसका टारगेट भी रिवाइज कर दिसंबर 2017 की डेडलाइन रखी गई है।

har ghar bijali yojna
हर घर बिजली योजना

कैसे होगी सौभाग्य योजना की फंडिंग?

  1. यह योजना 16,320 करोड़ रुपए की है। इसमें केंद्र सरकार 60% की मदद करेगी। स्पेशल कैटेगरी में आने वाले राज्यों के लिए केंद्र से 85% मदद दी जाएगी।
  2. योजना में 10% कॉन्ट्रिब्यूशन राज्य सरकारों का होगा। बाकी की 30% फंडिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और बैंकों से कर्ज लेकर होगी।
  3. गांवों में मौजूद घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए 14 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। 1700 करोड़ रुपए शहरी इलाकों के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए खर्च होंगे।

किसे मिलेगा इसका का फायदा?

बिजली के फ्री कनेक्शन मुहैया कराने के लिए सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना 2011 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी इस सेंसस में शामिल उन परिवारों या घरों को इस योजना का फायदा मिलेगा, जिनकी पहचान बिना बिजली कनेक्शन वाले घरों के रूप में की गई है। योजना के तहत सरकार ट्रांसफॉर्मर, बिजली के तार और खंभे लगाने में भी मदद करेगी।

जो 2011 की जनगणना में शामिल नहीं था, क्या उसे हर घर बिजली योजना का फायदा नहीं मिलेगा?

जो घर या परिवार 2011 की जनगणना में शामिल नहीं हो सके थे, यानी दूसरे शब्दों में जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं, वे भी 500 रुपए देकर बिजली कनेक्शन हासिल कर सकेंगे। 500 रुपए की यह रकम भी एकमुश्त नहीं देनी होगी। यह बिजली के बिलों से 10 किस्तों में वसूली जाएगी। यानी किस्त 50 रुपए महीने की होगी।

योजना के तहत क्या मिलेगा?: एक LED लाइट और एक चार्जिंग प्वाइंट मिलेगा। बिजली कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगेगा। यह प्री-पेड कनेक्शन होगा। यानी आपके बिजली कनेक्शन को भी मोबाइल या डीटीएच कनेक्शन की तरह मोबाइल से रिचार्ज कर सकेंगे। यह रिचार्ज भीम ऐप से करा सकेंगे।

कनेक्शन पाने के लिए नहीं करना होगा किसी भी प्रकार का खर्च: इस योजना के लिए सरकार ने 16,320 करोड़ रुपये का बजट रखा है. हर घर तक बिजली पहुंचाने का 60% खर्च केंद्र सरकार उठाएगी जबकि 10% खर्च राज्य सरकारों को उठाना होगा और 30% बैंकों से लोन लिया जाएगा। इस योजना की खास बात यह है कि लोगों को अपने घर में बिजली कनेक्शन पाने के लिए कोई खर्च नहीं करना होगा।

सौर ऊर्जा के सहारे मिलेगी बिजली: इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीबों के घर बिजली पहुंचाने की योजना का लक्ष्य रखा गया है। देश के दूरदराज इलाकों में जहां हर घर में बिजली का कनेक्शन पहुंचाना मुश्किल है वहां सरकार घरों को रोशन करने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लेगी और लोगों को बैटरी, 5 LED लाइट और एक पंखा देगी।

मोबाइल ऐप का भी ले सकते हैं सहारा: प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जाएगा और लोग बिजली के कनेक्शन के लिए आवेदन देने से लेकर सारी कार्यवाही मोबाइल ऐप के जरिए ही पूरी कर सकेंगे. गरीब लोगों के लिए बिजली कनेक्शन पाने की प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त होगी, लेकिन बाकी लोगों को भी इसके लिए सिर्फ ₹500 खर्च करने होंगे और वह भी 10 किश्तों में बिजली बिल के साथ लिया जाएगा।

इस आधार पर होगा चयन: किन घरों को मुफ्त में बिजली दी जानी है इसका चयन सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना 2011 के मुताबिक किया जाएगा. ट्रांसफार्मर, मीटर और तारों के लिए भी सब्सिडी: सौभाग्य योजना के तहत ट्रांसफार्मर, मीटर और तारों के लिए भी सब्सिडी दी जाएगी।

बैट्री बैंक भी देगी मोदी सरकार: सौभाग्य योजना के तहत सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में बिजली से वंचित आवासों को मोदी सरकार बैट्री बैंक उपलब्ध कराएगी। इसमें 200 से 300 डब्ल्यूपी का सोलर पावर पैक है, जिसमें पांच एलईडी लाइटें, एक डीसी पंखा, एक डीसी पावर प्लग और 5 साल के लिए मरम्मत शामिल है।

ऊर्जा नीति में किया जाए बदलाव: सरकार को ऊर्जा नीति में बदलाव करना चाहिए, ताकि सबको किफायती दरों पर बिजली मिले। अभियंता संघ के महासचिव राजीव सिंह ने बताया कि देश में बिजली उत्पादन क्षमता 3.30 लाख मेगावाट है, जबकि बिजली की मांग 1.50 लाख मेगावाट है। इसके बाद भी करोड़ों घरों में बिजली नहीं है।

इन राज्यों पर फोकस सौभाग्य योजना के तहत बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान व पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं। सौभाग्य योजना के कुल बजट 16,320 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें सरकारी सहायता के तौर पर 12,320 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण आवासों में बिजली पहुंचाने पर 14,025 करोड़ और शहरी आवासों पर 1732.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

बिजली से वंचित घरों में 25% यूपी-बिहार के, राजस्थान के 20 लाख घर अंधेरे में जीवनयापन कर रहें है।

      राज्य                          बिजली से वंचित घर

  1. उत्तर प्रदेश                   1,46,66,815
  2. बिहार                         64,95,622
  3. झारखंड                      30,47,833
  4. मध्य प्रदेश                   45,02,027
  5. राजस्थान                     20,20,979
  6. हरियाणा                     6,83,690
  7. छत्तीसगढ़                   6,44,458
  8. गुजरात                      23,059

दिल्ली-पंजाब के सभी घरों में बिजली है। मोदी सरकार ने 18,452 गांवों तक बिजली पहुंचाने का टारगेट रखा था। इनमें से अभी 2981 गांवों में बिजली नहीं पहुंची।

(सोर्स: ऊर्जा मंत्रालय)

मोदी सरकार आखिर क्यों सौभाग्य योजना लाई है?

जो सरकार ने बताया: सरकार का कहना है कि हर घर में बिजली होगी तो इससे केरोसिन के इस्तेमाल में कमी लाई जा सकेगी। एजुकेशन, हेल्थ सर्विसेस में सुधार आएगा। हर घर तक रेडियो, टीवी, मोबाइल की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इससे इकोनॉमिक एक्टिविटी और इम्प्लॉइमेंट बढ़ेगा। खासकर महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार होगा।

 जो सरकार चाहती है: इस योजना को पूरा करने का टारगेट मार्च 2019 का रखा गया है। उसी वक्त लोकसभा चुनाव होंगे। लिहाजा, इसे आप चुनावी योजना भी मान सकते हैं। जिन राज्यों को इस योजना के फोकस में रखा गया है, उनमें से मध्य प्रदेश और राजस्थान में अगले साल चुनाव हैं। वहीं, यूपी ऐसा राज्य है जहां बीजेपी-एनडीए को 2014 में सबसे ज्यादा 73 लोकसभा सीटें मिली थीं। इन राज्यों में जम्मू-कश्मीर भी शामिल है, जिसे मुख्यधारा में लाने के लिए मोदी सरकार खासतौर पर जोर दे रही है।

 

 

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