भारत के पांच बेहतरीन स्टार्ट अप्स

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भारत के पांच बेहतरीन स्टार्ट अप्स

अगर आप सोचते है कि कोई आपके कौशल को देख कर आपको आगे की ओर ले जायेगा तो आप संभल  जाइए तथा दुनिया को साबित करिए कि आप में वो बात है जिसे यह समाज नही समझता| आईये जानते है कुछ ऐसे ही लोगो की कहानी..

क्लियर कार रेंटल

औरंगाबाद के इस उद्यमी को हम सबको सलाम करना चाहिए| औरंगाबाद के इस व्यक्ति में ऐसी बात है जो हमे प्रेरित करती है| सचिन कटे 28 वर्ष के क्लियर कार रेंटल के संस्थापक हैं|

क्लियर कार रेंटल भारत में कार किराए पर लेने की कंपनी है, लेकिन कुछ ऐसे बिंदु हैं जो हमे उत्साह से भर सकती है| एक छोटे से गाँव में रहने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए रिश्तेदारों के घर पर रहना पड़ा| 11वी क्लास में उन्होंने टूरिंग के ऑफिस में काम शुरू किया|

यही से उन्हें स्टार्ट अप का ख़याल आया फिर क्या था “जहां चाह वहा राह”| अब उन्होंने यात्रा और होटल सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित किया और अब तक उन्होंने  अपनी  टीम के साथ 600 से अधिक वेबसाइटें विकसित की हैं। इस तरह से InfoGird  और NetMantle  अस्तित्व में आया था। सचिन हमेशा यात्रा और आतिथ्य उद्योग से जुड़े था और उद्योग की जरूरतों के बारे में जानते रहे । जुलाई 2010  कार किराए पर लेना शुरू किया गया और बारीकीयों से काम पर ध्यान देना शुरू किया|

क्लियर कार रेंटल दोनों स्थानीय (पूरे दिन और आधे दिन के लिए पैकेज) और बाहरी यात्रा के लिए कार प्रदान करता है। सीसीआर भारत में 150+ शहरों तक कार किराए पर लेने की सेवाएं प्रदान करता है और इसमें लगभग 100 लोगो की एक टीम होती है जो ऑपरेशन का प्रबंधन करती है। सबसे बड़ी बात यह है की बिना किसी आर्थिक सहायता के उन्होंने कंपनी को 150+ शहरों तक बढ़ाया है। सीसीआर बोर्ड पर 1000+ विक्रेताओं के साथ 14000+ कारों की सूची रखता है|

clear car rental start up
क्लियर कार रेंटल

मेडकार्ड्स ऐप:- आपकी सेहत के लिए

कहानी है श्रेयांश मेहता की, जिन्होंने मेडकार्ड्स ऐप को बनाया| अमेरिका के न्यू ऑरलियंस में आयोजित विभिन्न देशों से करीब एक लाख स्टार्टअप्स के आवेदन आए थे और चुना सिर्फ 10 ही जाना था। उन 10 चुनिंदा स्टार्टअप्स में भारत का मेडकार्ड्स ऐप भी है। मेडकार्ड्स भारत का पहला ऐसा ऐप है, जहां डॉक्टर, मरीज, लैब व मेडिकल स्टोर एक साथ मिलेंगे। इसे कोटा के 4 युवाओं श्रेयांश मेहता, निखिल बाहेती तथा उनके दोस्त सायदा धनावथ व मुदित जैन ने बनाया है। डॉक्टर, मरीज, लैब व मेडिकल स्टोर को एक साथ लाने वाला भारत का ये पहला ऐप है, जिसकी शुरुआत कोटा की भीमगंजमंडी डिस्पेंसरी से होगी और इसे 5 साल में 5 करोड़ मरीजों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐप में मरीज का मोबाइल नंबर डालते ही डॉक्टर के मोबाइल पर उसकी पूरी जानकारी आ जाएगी। डिस्पेंसरी पर टेक्निकल लोग बैठेंगे, जो लोगों को ऐप के बारे में जानकारी देंगे। इस ऐप पर पर्चों और रिपोर्ट्स की फोटो डालने से रिकॉर्ड हमेशा के लिए सुरक्षित हो जायेगा। इसमें प्राइवेसी का भी ध्यान रखा गया है। मेडिकल रिपोर्ट केवल इलाज करने वाले डाक्टर या मरीज के ही मोबाइल पर खुलेगी।

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मेडकार्ड्स ऐप
  • Twirl के कपड़े किफायती हैं

कपड़े हर किसी की जरूरत होती है और इन्हें हम हमेशा चाहेंगे की वो हमारे पसंदीदा हों। वैसे कितने भी कपड़े नए हों, वे कुछ दिन में या तो ख़राब लगने लगते हैं या उनमें कोई डिफेक्ट आ जाता है। अगर हमारे उन पुराने कपड़ों को कंपनी फिर से वापस ले ले और उन पैसों को ऐड ऑन करते हुए हमें नए कपड़े दे दे। ऐसे ही एक स्टार्टअप की शुरुआत हुई है जिसका नाम है ट्विर्ल फैशन स्टोर। यह स्टार्टअप अपने स्टोर के जरिए इंडो वेस्टर्न क्लॉथिंग और एक्सेसरीज उपलब्ध कराएगा। इसका कॉन्सेप्ट कुछ ऐसा है कि कंपनी अपने ग्राहकों से पुराने कपड़े लेगी और उनकी हालत के मुताबिक नए कपड़ों पर आकर्षक छूट देगी। किफायती फैशन उपलब्ध कराने के लिए इस स्टार्टअप की शुरुआत हुई है।

ट्विर्ल की सीईओ सुजाता चटर्जी ने बताया कि हम चाहते हैं कि हमारे ग्राहकों की पहनावा हमेशा नया लगे। इससे कपड़ों की बर्बादी पर भी अंकुश लगेगा। सुजाता का कहना है कि वे लुक गुड, फील गुज और डू गुड की स्ट्रैटिजी पर काम कर रही हैं। ट्विर्ल के कपड़े मुख्यतया नैचुरल फाइबर जैसे कॉटन और लिनेन के बने होते हैं। ये या तो लिमिटेड एडिशन होते हैं और या फिर सिंगल पीस। इसके कपड़े अफोर्डेबल हैं। इनकी प्राइस रेंज 399 से 3500 के बीच में है। ग्राहक कंपनी को जो कपड़े वापस करेंगे उन्हें उसमें से 30 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी।

twirl fashion store
ट्विर्ल फैशन स्टोर।
  • देश का सबसे युवा आंत्रेप्रेन्योर है अमित

अमित अग्रवाल जलपाईगुड़ी के रहने वाले है और देश के सबसे युवा उदमी भी है, अमित की उम्र केवल 21 साल है। अमित को भारत के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने नंबर वन युवा उद्यमी के खिताब से दिया है और ये खिताब उन्हें खुद प्रधानमंत्री मोदी ने दिया। अमित के इनोवेशन ‘अपकार्ट’ ने पहाड़ी इलाकों में सामान को ऊपर चढ़ाने की समस्या को हद से ज्यादा कम कर दिया है। अब तक पहाड़ी रास्तों पर वजनी सामानों को चढ़ाना काफी दुरूह और मंहगा काम हुआ करता था।

क्या है अपकार्ट-अपकार्ट न केवल सीढ़ियों से भार और भारी चीज की समस्या को हल करता है बल्कि अन्य उद्देश्यों को भी पूरा करता है। इसमें एक एर्गोनोमिक हैंडल है जो पूरे 360 डिग्री पर घूमता है। इसकी ट्रॉली के भीतर बना रैक एक मिनी अलमारी के रुप में काम करता है। इसकी ट्राई स्टार व्हील मैकेनिज्म, इसे किसी भी सतह पर काम करने के लिए कामयाब बनाता है। यह सीढ़ियों या चट्टानी इलाके में अच्छे से काम करता है। इसमें एक बटन है, जो एक लॉक के रुप में काम करता है। इसमें चार अलमारियां इनबिल्ट हैं, जिसमें एक पेयजल के लिए, एक लैपटॉप ट्रे, एक बड़ा कपड़े का बैग, एक जूता- चप्पल बैग है। यह एक ऐसा तंत्र है जो सामान को अच्छे से जमाए रखता है साथ ही बजट के हिसाब से अधिक किफायती भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एक इनबिल्ट ट्रैकिंग सिस्टम है जो इसे इस्तेमाल करने वाले के फोन से जुड़ा होता है ताकि कोई अपने सामान को सुरक्षित रूप से ट्रैक कर सकता है।

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युवा आंत्रेप्रेन्योर अमित

महिलाओं के लिए आंत्रप्रेन्योर दिना

जब एक महिला कोई व्यवसाय शुरु करती है तो लोगों की यही सोच होती है कि महिला फैशन इंडस्ट्री में व्यवसाय करेगी। लेकिन दिना वालेचा ने इस धारणा को पीछे छोड़कर अपनी अलग पहचान बनायी है। 2001 में जब दिना वालेचा ने वर्चुअल प्रदर्शनी शुरू की, तब यह बहुत ही मुश्किल था क्योंकि लोगों का मानना था कि प्रदर्शनी आयोजित करके कोई व्यवसाय कैसे कर सकता है?

दिना वालेचा पुणे की हैं। वो अन्य महिलाओं के स्टार्टअप्स को शुरू करने में मदद करती हैं। जहां ये देश पुरुष प्रधान देश है वहीं दिना वालेचा एक अच्छा उदाहरण हैं, कि कैसे एक महिला समाज में बदलाव ला सकती है। 2001 में जब दिना वालेचा ने वर्चुअल प्रदर्शनी शुरू की, तब यह बहुत ही असामान्य था क्योंकि लोगों का मानना था कि प्रदर्शनी आयोजित करके कोई व्यवसाय कैसे कर सकता है ? उन्होंने इसी सोच को बदला है|

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महिलाओं के लिए आंत्रप्रेन्योर दिना

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