भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी इन ज़रूरी बातों को अवश्य जानें

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INDIAN ECONOMY
भारत विश्व की एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरकर आया है।

भारत को एक वक्त सोने की चिड़िया कहा जाता था।आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के मुताबिक पहली सदी से लेकर दसवीं सदी तक भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। पहली सदी में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विश्व के कुल जीडीपी का 32.9% था।

ब्रिटिश काल में भारत की अर्थव्यवस्था का जमकर शोषण हुआ जिसके कारण 1947 में आज़ादी के समय में भारतीय अर्थव्यवस्था अपने सुनहरी इतिहास के बिल्कुल उलट का सामना कर रही थी।

भारत की अर्थव्यावस्था की कुछ विशेषताएँ-
  • आजादी के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था एक ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ रही है।
  • विश्व व्यापार संगठन के अनुसार वैश्विक निर्यात और आयात में भारत की हिस्सेदारी में क्रमश: 0.7% और 0.8% की वृद्धि हुई है जो 2000 में 1.7% थी और 2012 में 2.5% हो गई थी।
  • 1992 के दौरान देश में उदारीकरण का दौर की शुरू हुआ। इसके बाद अर्थव्यवस्था में सुधार होना शुरू हो गया था।
  • सेवा क्षेत्र आर्थिक विकास का प्रमुख स्रोत हैं। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के आधे से अधिक उत्पादन के साथ श्रम शक्ति का एक तिहाई भाग शामिल है।
भारत – सकल घरेलू उत्पाद की वार्षिक वृद्धि दर-
india gdp growth
जीडीपी बढ़ने और घटने दोनों ही स्थिति में यह शेयर बाजार पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), एक अर्थव्यवस्था के आर्थिक प्रदर्शन का एक बुनियादी माप है। यह एक वर्ष में एक राष्ट्र की सीमा के भीतर सभी अंतिम माल और सेवाओ का बाज़ार मूल्य है। 2013-14 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 113550.73 अरब रुपये था।

GDP
2013-14 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद

यह एक आर्थिक संकेतक भी है जो देश के कुल उत्पादन को मापता है। देश के प्रत्येक व्यक्ति और उद्योगों द्वारा किया गया उत्पादन भी इसमें शामिल होते हैं।

2017 में सबसे कम रही भारत की जीडीपी-
GDP
तस्वीर: पीटीआई

नोटबंदी के कारण देश की जीडीपी दर जनवरी- मार्च तिमाही में 6.1 फ़ीसदी रही। इससे पूरे वित्त वर्ष में वृद्धि दर तीन साल के सबसे निचले स्तर 7.1 फीसदी पर आ गई। विनिर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण आर्थिक वृद्धि की गति धीमी हुई।

वित्त वर्ष 2015-16 में देश की जीडीपी 8 फीसदी और इससे पहले वित्त वर्ष में 7.5 फीसदी रही थी। कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद 2016-17 में वृद्धि दर कम हुई है। यहाँ ये बात जानना ज़रूरी है कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर 2017 की जनवरी-मार्च तिमाही में 6.9 फ़ीसदी रही। भारत ने पहली बार 2015 में जीडीपी वृद्धि के मामले में चीन को पीछे छोड़ा था।

नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव-
demonetization
सरकार ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का एलान किया

सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर 500 और 2,000 रुपये के नए नोटों को शुरू किया था।

सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) की सर्वे में नोटबंदी के बारे में कई बातें सामने आईं  इस सर्वे के अनुसार नोटबंदी के कुछ महीनों बाद ही 15 लाख लोगों को अपनी नौकरियाँ खोनी पड़ी हैं।

नोटबंदी के तत्काल बाद की तिमाही जनवरी-मार्च में वृद्धि दर घटकर 6.1 प्रतिशत रही है। नोटबंदी 9 नवंबर, 2016 को की गई थी। आधार वर्ष 2011-12 के आधार पर नई श्रृंखला के हिसाब से 2015-16 में जीडीपी की वृद्धि दर 8 प्रतिशत रही है पुरानी श्रृंखला के हिसाब से यह 7.9 प्रतिशत रही थी।

नोटबंदी से 2016-17 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीवीए प्रभावित हुआ है। इन तिमाहियों के दौरान यह घटकर क्रमश: 6.7 प्रतिशत और 5.6 प्रतिशत पर आ गया।

विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर चौथी तिमाही में घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले समान तिमाही में 12.7 प्रतिशत रही थी। निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर नकारात्मक रही।

वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी)-
GST
जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगना शुरू हुआ है।

जीएसटी व्यवस्था लागू होने के दूसरे महीने अगस्त में कुल 90,669 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ। 1 जुलाई 2017 से पूर्व किसी भी सामान पर केंद्र एवं राज्य सरकार कई तरह के अलग-अलग कर लगाती थी। लेकिन जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगना शुरू हुआ है।

देश में अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की जीएसटी व्यवस्था को एक जुलाई से लागू किया गया। इसमें एक दर्जन से अधिक केन्द्रीय और राज्य स्तर के अप्रत्यक्ष करों को समाहित किया गया है।

भारत अगले दशक में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है-
india gdp growth
भारत 2028 तक 7000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

इस साल कम जीडीपी के बावजूद भारत अगले दशक में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन सकता है। ब्रिटेन के बैंक एचएसबीसी ने यह कहा कि भारत में सामाजिक पूंजी अपर्याप्त है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी चीज़ों पर खर्च न सिर्फ देश हित में है बल्कि आर्थिक वृद्धि और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।

एचएसबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा, बेशक आज वैश्विक जीडीपी का केवल 3 प्रतिशत है। लेकिन भारत की वृद्धि की प्रवृत्ति को देखने से लगता है कि यह अगले दशक में जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारत वित्त वर्ष 2016-17 में 2300 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था रहा है। लेकिन भारत 2028 तक 7000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिये सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता-
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अर्थव्यवस्था में रफ़्तार लाने के लिए सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है।

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने आने वाले महीनों में अर्थव्यस्था में मज़बूती की उम्मीद जताई। उन्होने कहा कि बेहतर वार्षिक वृद्धि दर को बरकार रखने के लिए, अर्थव्यवस्था को रफ़्तार के साथ पटरी पर लाने की आवश्यकता है।

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान रंगराजन ने कहा कि, यह कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था अब गिरावट से उबर रही है, क्योंकि दो तिमाही के लिए वृद्धि दर 5.7 फ़ीसदी पर बनी हुई है।

उन्होनें कहा कि वार्षिक 6.5 फीसदी दर हासिल करने के लिए बाकी बची तीनों तिमाहियों में अर्थव्यवस्था का 7 फ़ीसदी की दर से बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में रफ़्तार लाने के लिए सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सभी व्यावहारिक परियोजनाओं के पुनरुद्धार, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण और उच्च कॉर्पोरेट निवेश के रास्ते में आने वाली मुश्किलो को दूर करने का सुझाव दिया।

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