भारतीय मूल की वैज्ञानिक निशा डिसिल्वा को कैंसर रिसर्च के लिए मिला 81 लाख डॉलर का अनुदान

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NISHA DISLAVA
निशा डिसिल्वा

कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर बैठ जाता है, क्योंकि कैंसर का मरीज जल्‍दी ठीक नही होते हैं और इसके लक्षणों का पता देर से चलता है। कैंसर कई प्रकार का होता है जिनमें, सर्वाइकल कैंसर, ब्‍लैडर कैंसर, कोलोरेक्‍टल कैंसर, स्‍तन कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, एसोफैगल कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर, बोन कैंसर ब्‍लड कैंसर, आदि । कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं।

हांलिकी कैसर को लेकर वैज्ञानिक कई शोध करते आ रहे हैं और नई दवाओं की खोज भी कर रहे हैं। इसी क्रम में अमेरिका में भारतीय मूल की एक वैज्ञानिक को सिर और गर्दन के कैंसर पर अनुसंधान के लिए 81 लाख डॉलर का अनुदान दिया गया है। क्योंकि इनके अनुसंधान से रोगियों को जीवित बचाने की दर में सुधार में काफी सहायता मिल सकती हैं।

वह वैज्ञानिक है निशा डिसिल्वा जिनको सिर और गर्दन के कैंसर को फैलने से रोकने तथा इसकी पुनरावृत्ति को रोकने वाली आण्विक विधियों पर जारी उनके अनुसंधान के लिए प्रतिष्ठित ‘सस्टेनिंग आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट इन रिसर्च’ (एसओएआर) अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उनका मुख्य लक्ष्य कैंसर रोगियों के बचने की दर में सुधार करना है।

डिसिल्वा को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल एंड क्रेनियोफेशियल रिसर्च से अनुदान आठ साल में बांटा जायेगा, निशा डिसिल्वा अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में चिकित्सकीय वैज्ञानिक हैं। निशा डिसिल्वा ने कहा कि सिर और गर्दन का कैंसर विश्व में छठा सर्वाधिक आम कैंसर है और इस बीमारी से काफी लोग झूज रहे हैं, अगर आंकडों पर नजर डाले तो हर साल लगभग छह लाख नए मामले आते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रोग निदान के पांच साल के भीतर लगभग आधे रोगियों की मौत हो जाती है।

निशा डिसिल्वा के इस अनुसंधान की वजह से लाखों लोग को उपचार में मदद मिल सकती है। ऐसी पहल करके निशा ने भारत का भी नाम रोशन किया है, और उनका यह काम काफी सराहनीय है।

 

 

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