अगर चाहते हैं बच्चों में अच्छे बदलाव तो खुद भी रहिये फोन से दूर

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पैंरटस का ज्यादा फोन का इस्तेमाल बना सकता है बच्चों को गुस्सैल

अगर आप भी कर रहे हैं फोन का ज्यादा इस्तेमाल आपके बच्चों का व्यवहार हो सकता है गुस्सैल और आक्रामक!!!

आजकल की इस भागदौड। भरी जिन्दगी में हम टेक्नालॅाजी पर सबसे ज्यादा डिपेंड हो चुके हैं ,क्योंकि हर कोई अपनी जिन्दगीं में इतना व्यस्त है, फिर चाहे वह आजकल के पैरेंटस ही क्यों ना हो, उनके पास इतना समय नहीं है कि वह अपने बच्चों पर थोडा ध्यान दे सकें। देखा जाये तो आजकल के बच्चे इतना ज्यादा एक्टिव हो चुके हैं कि उन्हें ज्यादा सिखाने की जरुरत नहीं है। सबसे पहले एक उदाहरण फोन का ही लीजिये फोन की दुनिया केवल बडों तक ही नहीं सीमित रह गयी है , बल्कि बच्चें भी इस पर पूरी तरह से डिपेंड हैं, और बच्चों का सबसे ज्यादा ध्यान फोन में लगा रहता है।

  •  यदि आप भी बहुत ज्यादा फोन इस्तेमाल कर रहे हैं तो इससे आपके बच्चों पर भी काफी प्रभाव पड.ता है। एक स्टडी के मुताबिक यदि आप ज्यादा फोन पर लगे हुयें तो आपके बच्चें काफी चिडचिडें हो सकते हैं उनके व्यवहार में कई बदलाव आने लगते हैं। इसलिये बच्चों के सामने कम से कम फोन का इस्तेमाल करें।
  • जिसकी वजह से उनको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड.ता है। और बच्चों में ज्यादा फोन के इस्तेमाल की वजह से उनका मानसिक विकास भी सही रुप से नहीं हो पाता है। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 50 प्रतिशत बच्चे स्पाइन से संबधित समस्या से जूझ रहे हैं और इसका सबसे बडा. कारण है बहुत ज्यादा फोन और गैजट का इस्तेमाल करना, और रही बात टीवी की तो हम बच्चों को टीवी देखने से भी नहीं रोक सकते हैं हां लेकिन इतना जरुर कर सकते हैं कि हम सही तरीके से उन पर कट्रोल कर सकते हैं। यदि पैरेंटस बच्चों के लिये थोडा सा समय निकाल कर उनसे बात-चीत करें और उनका मन में क्या चल रहा हैं उसे समझने की कोशिश करें तो बहुत कुछ बदलाव हो सकता है। आजकल छोटे बच्चों में फोन पर बहुत से गेम खेलने की रुचि रहती है।
  •  धीरे-धीरे बडे. होकर उनका यही रुचि उनकी लत बन जाती है और उसका परिणाम ब्लू व्हेल जैसे गेम होते हैं, जिनमें बच्चें आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं।  तो इसके लिये जरुरी है कि हम बचपन से ही उन्हें फोन की आदत के बजाय उन्हें ऐसी चीजे दें जिससे वह कुछ सीखे और समझे। आजकल आनॅलाइन हो या बाजार बहुत से ऐसे गेम है जो केवल बच्चों में कुछ नया सीखने के लिये होते हैं। यदि बच्चा फोन के लिये जिद करता है तो इसकी जगह आप उसको लरनिंग टेबलेट लाकर दे सकते हैं। और यदि बचपन से ही उनमें यह आदत डाल देंगें तो शायद बडे  होकर आपको और बच्चों को परेशानियों का सामना नहीं करना पडेगा।
  • चाइल्ड विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा संभव तो नहीं है कि आप पूरी तरह से टेक्नालॅाजी से दूर हो जायें लेकिन आप कुछ सीमायें भी तय कर सकते हैं यदि आप बच्चों के साथ खाना खाते समय या जब आपके आस-पास बच्चें हों फोन से दूर रहे हैं तो बच्चों का ध्यान खुद फोन से हटेगा। और कोशिश करें उनके साथ एक क्ववालिटी टाइम बिताये  और अपना इनबॅाक्स चेक करने करने अपनी समय सीमा तय करें ।

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