2022 तक मंगल ग्रह पर भेजा जायेगा मालवाहक यान

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MANGAL PLANET
मंगल ग्रह

मंगल ग्रह सौरमंडल का ऐसा ग्रह है जो कि हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए एक अबूझ पहेली रहा है, जिसे लेकर वैज्ञानिक आये दिन कुछ ना कुछ नयी खोज करते रहते हैं, मंगल ग्रह सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से इसकी आभा रक्तिम दिखती है, जिस वजह से इसे “लाल ग्रह” के नाम से भी जाना जाता है। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं – “स्थलीय ग्रह” जिनमें ज़मीन होती है और “गैसीय ग्रह” जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है, इसका वातावरण विरल है। और मंगल मंगल ग्रह हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय रहा है, दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा हाल ही में मंगल ग्रह पर खारे पानी की उपलब्‍धता का प्रमाण देने के बाद यह संभावना प्रबल हो गई है कि मंगल पर जीवन है।

मंगल ग्रह को लेकर वैज्ञानिक कई नये शोध करते रहते हैं, इसी क्रम में आविष्कारक इलॉन मस्क ने पांच वर्षो में मंगल ग्रह पर मालवाहक यान भेजने और आधे घंटे के भीतर पृथ्वी के मुख्य शहरों में लोगों को लाने ले जाने के लिए रॉकेट का इस्तेमाल करने की महत्वाकांक्षी योजना के बारें में हाल ही में बताया।

स्पेसएक्स के संस्थापक ने कहा कि अन्तर्ग्रहीय परिवहन प्रणाली जिसे बीएफआर (बिग फकिंग रॉकेट) नाम दिया गया है, उसके आकार को छोटा किया जाएगा ताकि वह कई तरह के काम कर सकें जिससे भविष्य में मंगल ग्रह के अभियानों में मदद मिलेगी.मस्क ने कहा कि उनकी कंपनी ने प्रणाली बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके साथ उन्होनें यह भी कहा कि ‘‘मुझे काफी हद तक भरोसा है कि हम करीब पांच वर्षों में यान का निर्माण पूरा कर सकते हैं और उसका प्रक्षेपण र सकते हैं.’’ उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक कम से कम दो मालवाहक यान लाल ग्रह पर पहुंचेंगे जिनका मुख्य उद्देश्य पानी के स्रोत का पता लगाना होगा।

क्या खास है इस प्रणाली में-

  1. इस परिवहन प्रणाली को बीएफआर नाम दिया गया ।
  2. मंगल ग्रह पर 5 वर्षों तक यान निर्माण करने की प्रतिबद्धता जताई है।
  3. यह यान मंगल पर पानी के स्त्रोत का लगाएंगे पता ।

इस प्रणाली के जरियें 2022 तक वैज्ञानिक मंगल ग्रह के अन्य रहस्यों को भी सुलझा सकते हैं जिन पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

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