मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम – 2 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द

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कॉर्पोरेट मंत्रालय
कॉर्पोरेट मंत्रालय ने कम्पनी अधिनियम के तहत रद्द की मेम्बरशिप

हाल ही में मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए , 2 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है| इसकी वजह कम्पनी लॉ अधिनियमो  का पालन न करना बताया जा रहा है| साथ ही पता चला है की न सिर्फ रजिस्ट्रेशन खत्म किया गया है बल्कि इनके बैंक खातो को भी बंद कर दिया गया है|

इनमे से अधिकतर शेल कम्पनी है , जिन पर समय पर टैक्स न देने , टैक्स चोरी और अवैध लेनदेन का आरोप है| कॉर्पोरेट मंत्रालय के अनुसार इन कंपनियों पर काले धन के  प्रयोग करने का भी अंदेशा है|

आपको बता दे की हाल ही में RBI ने नोट बंदी को  लेकर अपने आकड़े प्रस्तुत किए है, जिनसे साफ़ तोर पर पता चलता है कि, इस नोट बंदी का काले धन पर कोई खास असर नही पड़ा है| जिसके चलते सरकार को आलोचना का भी सामना करना पड़ा था| इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने के लिए इस बड़े कदम को उठाया है|

company law rule is very heavy for compnies
कम्पनी लॉ अधिनियम

कम्पनी लॉ नियम

कॉरपोरेट कानून (“कंपनी” या “निगम” कानून) आधुनिक समय का सर्वाधिक प्रभावी प्रकार का व्यवसाय उपक्रम है। कॉरपोरेट कानून शेयरधारियों, निदेशकों, कर्मचारियों, ऋणदाताओं तथा अन्य हिस्साधारियों, जैसे उपभोक्ताओं, समुदायों तथा पर्यावरण फ़र्म के आंतरिक नियमों के तहत एक-दूसरे के बीच की अंतःक्रियाओं का अध्ययन होता है| कॉरपोरेट कानून विस्तृत कंपनी कानून (या व्यवसाय संघों के कानून) का एक हिस्सा होता है। अन्य प्रकार के व्यवसाय संघों में साझेदारी (अधिकतर कानून फ़र्मों की तरह), या ट्र्स्ट (जैसे कोई पेंशन फ़ंड) अथवा गारंटी द्वारा सीमित कंपनियां (जैसे कुछ विश्वविद्यालयों या चैरिटी) शामिल हो सकती हैं। कॉरपोरेट कानून उस बड़े व्यावसाय के बारे में होता है, जिसका उसके सदस्यों या शेयरधारकों, जो अपने स्टॉकों को निदेशक मंडल के प्रदर्शन के आधार पर खरीदते या बेचते हैं, के प्रति सीमित उत्तरदायित्व या असीमित उत्तरदायित्व वाला पृथक वैध व्यक्तित्व होता है। यह ऐसे फ़र्मों के साथ व्यापार करता है, जो किसी संप्रभु राज्य अथवा उनके उपराष्ट्रीय प्रांतों के कंपनी कानूनों के तहत

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