रोहिंग्या मुसलमानों पर भारत में भी कानूनी दाव-पेंच शुरु

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रोहिंग्या मुस्लमान के खिालफ हिंसा जारी
हिंसक झड़पों के बीच रोहिंग्या मुस्लमानों का पलायन जारी

भारत में भी रोहिंग्या मुसलमानों का मामला तूल पकड़ने लगा है। सुप्रीम कोर्ट में देश के मशहुर वकील प्रशांत भूषण ने रोहिंग्या मुसलमानों का मामला उठाते हुए कहा था कि अगर सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान कर उन्हे म्यांमार भेजा तो यह उनके लिए मौत को गले लगाने जैसा होगा। प्रशांत भूषण की मांग को राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के नेता के एन गोविंदाचार्य ने कोर्ट में चुनौती दी है।

के एन गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि रोहिंग्या मुसलमान देश के संसाधनों पर एक बोझ है। इन्हे वापिस भेजना जरुरी है। इस याचिका में गोविंदाचार्य ने केंद्र सरकार का समर्थन करते हुए रोहिंग्या मुसलमानों को देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमानो को वापस भेजने के मामले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अब अगली सुनवाई 11 सितंबर को होनी है।

आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है देश में रह रहे 40 हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान का जीवन खतरे में है। प्रशांत भूषण इन लोगों को म्यामांर भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं।

 

म्यामांर की तुलना कश्मीर मसले से।

आंग सान सू पर है अंतराष्ट्रीय दवाब
आंग सान सू ने म्यांमार की तुलना कश्मीर से की।

म्यामांर में रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर घमासान के बीच म्यामांर की स्टेट कांउसलर आंग सान सू की ने इस मसले की तुलना कश्मीर से की है। आंग सान सू के अनुसार निर्दोष लोगों और आतंकवादियों में फर्क होता है।ऐसे में भारत जो त्रासदी कश्मीर में झेल रहा है लगभग उन्ही हालातों का सामना म्यामांर के लोग भी कर रहे हैं। आंग सान सू के अनुसार देश के नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। ऐसे में सरकार वही कदम उठा रही है जो कि सही है।

 

आंग सान सू के खिलाफ सोशल कैंपेन शुरु

सोशल मीडिया पर उठ रही है आवाज
आंग सान सू के खिलाफ सोशल कैंपेन शुरु

नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू के लिए रोहिंग्या मुसलमानों का मसला बेहद पेचीदा नजर आ रहा है। रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को एक बड़ा मुद्दा बनाते हुए हजारों लोगों ने आंग सान सू के खिलाफ एक कैंपेन शुरु कर दिया है।इस कैंपेन मे मैसेज के माध्यम से आंग सान सू से नोबेल पुरस्कार वापसी की मांग की जा रही है। द चेंज आर्ग के नाम से चल रही एक ऑनलाइन कैंपेन में अभी तक लगभग 4 लाख लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस कैपेंन में जुडे लोग चाहते हैं कि सू इन लोगों की हत्या रोकने के लिए कठोर कदम उठाये। ऐसे में कुछ लोग नोबेल पुरस्कार वापसी की मांग भी कर रहे हैं। आपको बता दें कि म्यांमार के राखिन में 25 अगस्त से रोहिंग्या की घर वापसी का सिलसिला शुरु हुआ था जो कि बाद में एक हिंसक आंदोलन में बदल गया। जानकारी के अनुसार म्यांमार में लगभग 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इनमें से सबसे ज्यादा बांग्लादेश से आये हुए हैं।

 

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