चांद मिशन की तैयारी में नासा भेजेगा अंतरिक्ष यात्रियों को , जानिये कुछ चांद के बारे में रोचक तथ्य

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NASA
नासा इंसानों को चांद पर भेजने की तैयारी में

चांद पर जाना किस का सपना नहीं होता, वह दिन याद करिये जब पहली बार चांद आर्म्सट्रांग और उनके सहयोगी बज एल्डरिन ने चांद पर कदम रखा था और चांद की सतह पर ढाई घंटे बिताए थें। इस दौरान दोनों ने सैम्पल जमा किए थे, प्रयोग किए थे और फोटोग्राफ लिए थे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अभियान में शामिल तीसरे अंतरिक्षयात्री माइकल कोलिंस चंद्रमा की कक्षा में यान को नियंत्रित कर रहे थें।

इसी क्रम में नासा एक बार फिर लोगों को चांद में उतारने की तैयार कर रहा है, इसके बारे में अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन नासा को निर्देशित करेगा कि वह चांद पर लोगों को उतारने और लाल ग्रह या उससे आगे अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले चंद्रमा की स्तह पर उपस्थिति स्थापित करें।

साथ ही उन्होंने कहा कि “हम नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा से वापस लाएंगे – न केवल पैरों के निशान और झंडे पीछे छोड़ने के लिए, बल्कि नींव बनाने के लिए, हमें अमेरिकियों को मंगल और उससे परे भेजना होगा,” पेंस ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

कुछ रोचक तथ्य चांद के बारे में

  1. चांद सूरज की रोशनी से चमकता है। चांद से पृथ्वी की ओर परावर्तित होने वाली सूरज की रोशनी ही शीतल ‘चांदनी’ है।
  2. चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर 27 दिन 7 घंटे 43 मिनट और 11.47 सेकेंड (लगभग 27.3 दिन) में एक चक्कर लगाता है। साथ ही वह अपनी धुरी पर 27.32 दिन में एक बार घूमता है।
  3. पृथ्वी के चारों ओर और अपनी धुरी पर घूमने का लगभग एक ही समय होने के कारण हमें उसका केवल आधा भाग ही दिखाई देता है, और दूसरा भाग अंधेरे में रहता है
  4. चंद्रमा पर किसी भी वस्तु का वजन पृथ्वी से छः गुना कम हो जाता है क्योंकि चंद्रमा का गुरूत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में कम है।
  5. वहां दिन में तापमान 130 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है। रात में चट्टानें ठंडी हो जाती हैं तो तापमान शून्य से 180 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर जाता है।
  6. चांद का वायुमंडल नहीं है, उसका गुरूत्वाकर्षण इतना कम है कि गैसें उसकी पकड़ में नहीं रह सकतीं। इसलिए वहां सूर्योदय और सूर्यास्त का वह नजारा नहीं दिखाई देता जो हमें अपनी पृथ्वी पर दिखाई देता है। चांद अपने आप में कितने रहस्य समेटे हुये है और कितना खास है यह चांद।

नासा

  1. नासा जिसे इंगलिश में National Aeronautics and Space Administration कहते है संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है
  2. फ़रवरी 2006 से नासा का लक्ष्य वाक्य “भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना” है। 14 सितंबर 2011 में नासा ने घोषणा की कि उन्होंने एक नए स्पेस लॉन्च सिस्टम के डिज़ाइन का चुनाव किया है जिसके चलते संस्था के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में और दूर तक सफर करने में सक्षम होंगे और अमेरिका द्वारा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम साबित होंगे।
  3. इस संस्था ने 1 अक्टूबर 1948 से कार्य करना शुरू किया। तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए है जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है।

नासा की इस पहल से इंसानों का भी चांद में जाना संभव हो पायेगा, कभी चांद हमारे लिये कहानियों में था लेकिन आज तकनीकी इतनी तेज हो गयी है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि लोग कभी चांद पर जाकर बस सकते हैंं।

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